बिहार में गंगा के जलस्तर ने 2016 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है और पानी एक फीट ऊपर बह रहा है। राज्य में बाढ़ से करीब 50 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
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केंद्रीय कृषि व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को जमीन और आसमान से बाढ़ के नुकसान का जायजा लिया। दोनों नेताओं ने मनेर, दिघवारा, राघोपुर, मुंगेर तथा भागलपुर के बाढ़ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वे जमीनी हालात का जायदा लिया।
बिहार में गंगा, गंडक और सरयू नदियों का पानी उतरते ही बाढ़ का खौफनाक मंजर सामने आ गया है। राज्य में 700 से अधिक ग्रामीण सड़कें डूबी थीं, जिनमें 100 से ज्यादा पूरी तरह बह गईं, 400 सड़कें 50% से अधिक टूटीं और 200 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं। नदियों का पानी घटने से अब नावें चलना भी बंद हो गई हैं।

मौसम विभाग ने आज पटना समेत 14 जिलों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। जबकि 7 जिलों में यलो अलर्ट है। इन सभी 21 जिलों में 40Kmph की रफ्तार से हवा चल सकती है। आकाशीय बिजली गिरने को लेकर विशेष चेतावनी है।
पटना मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 19 सितंबर से मानसून की विदाई की संभावना जताई जा रही है। उससे पहले प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। 22 सितंबर से मौसम साफ होने की उम्मीद है।

बाढ़ पीड़ित बच्चों से मिले CM सम्राट, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह
बुधवार को केंद्र की टीम बिहार में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने पहुंची। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को पटना पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
सीएम सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले हाजीपुर में ट्रैक्टर और हेलिकॉप्टर से बाढ़ का जायजा लिया। बाढ़ की स्थिति देखने के बाद कृषि मंत्री ने कहा कि यहां फसलों का काफी नुकसान हुआ है।
इसके बाद दोनों मुंगेर पहुंचे, जहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित बच्चों से मुलाकात भी की। मुंगेर से भागलपुर के बीच बनने वाली 83 किलोमीटर लंबी गंगा पथवे परियोजना को लेकर सम्राट चौधरी ने मुंगेर में बड़ा ऐलान किया है।
उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट के मूल डिजाइन में बदलाव किया गया है। अब यह सड़क एलिवेटेड (पुलनुमा) नहीं बनाई जाएगी, बल्कि इसे पूरी तरह ‘एट-ग्रेड’ (भू-स्तरीय सड़क) के रूप में बनाया जाएगा।
मुंगेर के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भागलपुर पहुंचे। यहां उन्होंने हेलिकॉप्टर के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया।
शिवराज सिंह के दौरे की कुछ तस्वीरें…

मुंगेर में सीएम सम्राट और शिवराज सिंह चौहान बाढ़ पीड़ित बच्चों से मुलाकात की।

भागलपुर में बाढ़ पीड़ितो से सीएम और शिवराज सिंह चौहान ने मुलाकात की।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और कृषि मंत्री शिवराज बोट से बाढ़ प्रभावित इलाके में पहुंचे।

राघोपुर दियारा इलाके में पानी भरा होने के कारण ट्रैक्टर से निरीक्षण पर निकले।

केंद्रीय मंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन सतर्क दिखा।
बीते 24 घंटे में कैसा रहा मौसम….
बुधवार को पटना समेत 5 जिलों में तेज बारिश हुई। सबसे ज्यादा खगड़िया में 72 MM बारिश दर्ज की गई। बांका में 70 MM, दरभंगा में 70 MM, पूर्णिया में 56 MM और मुजफ्फरपुर में 49.8 MM बारिश हुई। इसके बावजूद पूरे मानसून सीजन में बिहार में बारिश सामान्य से काफी कम है।
बिहार में अब तक 899.9 MM बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इसके मुकाबले केवल 577.3 MM बारिश दर्ज की गई है। इस तरह राज्य में अब तक सामान्य से 36% कम बारिश हुई है। वहीं, 37.3 डिग्री तापमान के साथ कैमूर सबसे गर्म जिला रहा।
सीवान में आकाशीय बिजली गिरने से दादा-पोते की मौत हो गई, जबकि एक युवक घायल है। भोजपुर में मछली पकड़ने गए मछुआरों ने एक घड़ियाल पकड़ा। इसके बाद वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई।

बिहार के प्रमुख जिलों का तापमान

आगे कैसा रहा मौसम
पटना में आज भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवा चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अलर्ट के अनुसार पटना ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में है। बारिश के दौरान कुछ स्थानों पर तेज हवा चल सकती है।
अगले 2 से 3 दिनों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों पर अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना है। अगले 5 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में भी कोई विशेष बदलाव नहीं होने का पूर्वानुमान है।
मानसून की वापसी के लिए बनने लगी परिस्थितियां
मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, 19 सितंबर 2026 के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं। हालांकि बिहार में फिलहाल बारिश की गतिविधियां बनी हुई हैं।
मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, समुद्र तल पर मानसून की द्रोणिका सौराष्ट्र और उससे सटे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर बने निम्न दबाव क्षेत्र से होते हुए डीसा, जयपुर, आगरा, लखनऊ, गया और सागर द्वीप तक फैली है।
इसके अलावा उत्तरी गंगीय पश्चिम बंगाल से उत्तर ओडिशा तक भी एक द्रोणिका बनी हुई है। उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर तटीय ओडिशा के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है।