Explainer: 14 राज्य, 9 माह ऑपरेशन; 200 गिरफ्तारियां: कैसे ध्वस्त हुआ ISI समर्थित शहजाद भट्टी आतंकी नेटवर्क: NIA के Ex DGP ने बताया
Sep 09, 2026 03:29 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली

कुलकर्णी ने बताया कि यह ऑपरेशन लगभग नौ महीनों के तालमेल भरे काम का नतीजा था, जो नवंबर 2025 में शुरू हुआ था। इसमें मल्टी-एजेंसी सेंटर (MAC) के जरिए कई राज्यों की पुलिस फोर्स के बीच खुफिया जानकारी इकट्ठा की गई और बांटी गई।

15 अगस्त से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों ने शहजाद भट्टी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।
इस साल के जश्न-ए-आजादी से ठीक पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के हाथ एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी और वो है पाकिस्तान से संचालित होने वाले एक बड़े आपराधिक और आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़। दरअसल, 15 अगस्त से ठीक पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) का समर्थन प्राप्त शहजाद भट्टी नेटवर्क का पर्दाफाश कर उसे ध्वस्त कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों ने 14 राज्यों में एक साथ बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया और 200 से अधिक गुर्गों को गिरफ्तार किया।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के पूर्व स्पेशल DGP, IPS (रिटायर्ड) अतुलचंद्र कुलकर्णी ने News18 को बताया है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने नौ महीने तक (नवंबर 2025 से अगस्त 2026) शहज़ाद भट्टी नेटवर्क का पीछा किया। इस दौरान 14 राज्यों में ऑपरेशंस चलाए गए और इस दौरान 253 लोगों को हिरासत में लिया और पाकिस्तान-बेस्ड शहज़ाद भट्टी नेटवर्क (SBN) से जुड़े 200 से ज़्यादा ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार कर उस नेटवर्क का खात्मा किया गया। SBN पाकिस्तान-बेस्ड टेरर-गैंगस्टर सिंडिकेट था, जिस पर सोशल मीडिया, संगठित अपराध और आसानी से बहकावे में आने वाले भारतीय युवाओं का इस्तेमाल करके देश भर में हिंसा और जासूसी का नेटवर्क फैलाने का आरोप था।
विध्वंसक हमलों की साजिशें नाकाम
15 अगस्त से ठीक पहले इस कार्रवाई के साथ ही खुफिया एजेंसियों ने स्वतंत्रता दिवस के आसपास देश भर में विध्वंसक हमलों की साजिशों को भी नाकाम कर दिया। 12 अगस्त को केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच तालमेल और खुफिया जानकारी साझा करके किए गए इस ऑपरेशन ने सीमा-पार आतंकवाद के एक चिंताजनक मॉडल का खुलासा किया, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को भर्ती करते थे,उन्हें छोटे-मोटे आपराधिक कामों के लिए पैसे देते थे और धीरे-धीरे उन्हें रेकी (निगरानी), हथियारों की तस्करी और टारगेटेड आतंकी/हिंसक गतिविधियों में शामिल किया करते थे।
इंस्टाग्राम-फेसबुक से 'आतंकी भर्ती'
कुलकर्णी के अनुसार, यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा समर्थित है और भारत में कम-तीव्रता वाले हमलों, हथियारों की तस्करी, जासूसी और लक्षित हत्याओं के लिए काम कर रहा था। उन्होंने बताया है कि ये नेटवर्क इंस्टाग्राम-फेसबुक से 'आतंकी भर्ती' करता था और उसके निशाने पर जेन-जी यानी 18 से 23-30 साल तक के बेरोजगार युवक हुआ करते थे। इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना बहावलनगर (पाकिस्तान) का गैंगस्टर शहजाद भट्टी (उर्फ "डॉन ऑफ पंजाब") है। भट्टी पारंपरिक आतंकवादी सेल के बजाय सोशल मीडिया को भर्ती का बाजार बनाकर काम कर रहा था, जिसके इंस्टाग्राम पर लगभग 2.5 लाख और फेसबुक पर 4.5 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
रेकी करने के लिए 1,000 से 5,000 रुपये
वह इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, सिग्नल, व्हाट्सएप, स्नैपचैट और यूट्यूब के जरिए भारत के 18 से 25 वर्ष के बेरोजगार युवाओं, छोटे अपराधियों और आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को निशाना बनाता था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, भट्टी का मॉडल हिंसा की एक 'गीग इकोनॉमी' (Gig Economy) की तरह काम करता था। शुरुआत में यह नेटवर्क युवाओं को 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (एजेंसियों के अनुसार एक फर्जी फ्रंट संगठन) के पोस्टर लगाने या रेकी करने के लिए 1,000 से 5,000 रुपये देता था। छोटे कामों के जरिए भरोसा जीतने के बाद उन्हें गंभीर काम (जैसे पुलिस स्टेशनों और संवेदनशील स्थलों की फोटोग्राफी, हथियार और ड्रग्स की डिलीवरी) सौंपे जाते थे।
भट्टी नेटवर्क टारगेट किलिंग भी करवाता था
NIA के Ex DGP ने बताया कि भट्टी नेटवर्क टारगेट किलिंग भी करवाता था। उन्होंने बताया कि सुरक्षाकर्मियों की हत्या जैसे गंभीर हमलों के लिए भुगतान राशि 3 लाख रुपये तक बढ़ाकर दी जाती थी। इसके अलावा इस नेटवर्क में भर्ती होने वाले कई लोग (जैसे बिरयानी विक्रेता, अदरक विक्रेता) बिना किसी वैचारिक कट्टरता के सिर्फ पैसों या गैंगस्टर कल्चर के आकर्षण में फंसकर अनजाने में आतंकी साजिश का हिस्सा बन जाते थे।
ड्रोन, चिट्टा (हेरोइन) और दाऊद इब्राहिम कनेक्शन
कुलकर्णी के मुताबिक, यह सिंडिकेट संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद का एक घातक मिश्रण था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते दिल्ली-एनसीआर तक ड्रोन और 'डेड-ड्रॉप' प्रणाली के जरिए हेरोइन ("चिट्टा") और पाकिस्तानी ऑर्डनेंस फैक्टरी के मार्का वाले ग्रेनेड, आईईडी (IED) और पिस्टल की तस्करी की जाती थी। उन्होंने बताया कि कराची में बैठा दाऊद इब्राहिम का करीबी मुन्ना झिंगाड़ा इस नेटवर्क में आईएसआई और भारतीय आपराधिक गिरोहों के बीच एक सेतु की तरह काम कर रहा था। इसके अलावा, मुंबई के पूर्व विधायक बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपी जीशान अख्तर को भी भट्टी ने भारत से भागने में मदद की थी।
भट्टी गैंग की प्रमुख वारदातें और कार्रवाई
कुलकर्णी ने बताया कि इस नेटवर्क के खिलाफ देश भर में 100 से अधिक FIR दर्ज की हैं। यह नेटवर्क गुरदासपुर में पुलिसकर्मियों की हत्या, जालंधर में भाजपा नेता मनोरंजन कालिया के घर पर ग्रेनेड हमले, एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के घर पर हमले और रांची में RSS दफ्तर पर पेट्रोल बम फेंकने जैसी घटनाओं में शामिल रहा है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई के दौरान नेटवर्क से जुड़े 100 से अधिक इंस्टाग्राम खातों को ब्लॉक कर दिया है, जिससे इनके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है।