डिजिटल, पर्दाफाश। फ्रांस में महंगाई और सरकारी सेवाओं की बदहाली के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन हिंसक हो गया। लिमोज शहर में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने टाउन हॉल में आग लगा दी। आग की चपेट में आई यह ऐतिहासिक इमारत करीब 143 साल पुरानी बताई जा रही है। जिसका निर्माण सन् 1883 में हुआ था। आत्र.त्र..गजनी में इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और उसके तबाह होने की खबर सामने आई। इस घटना ने देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पढ़ें :- फ्रांस के स्कूल में 14 वर्षीय छात्र ने चलाई गोलियां, हेडमास्टर और शिक्षिका पर हमला17 अक्टूबर को पेरिस समेत फ्रांस के कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। वाहनों में आग लगाने, दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं।

प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाई गई आग में लिमोज शहर का टाउन हॉल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन, कई शहरों तक फैला
इस आंदोलन की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की कमी और जरूरी संसाधनों की समस्या को लेकर हुई थी। छात्रों ने मांग की कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाए और स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं। धीरे-धीरे विरोध का दायरा बढ़ा और आंदोलन करीब 410 स्कूलों तक पहुंच गया। बाद में विश्वविद्यालयों के छात्रों, अभिभावकों और मजदूर संगठनों ने भी इसमें हिस्सा लेना शुरू कर दिया।
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महंगाई से लेकर पेंशन तक, ये हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में महंगाई पर काबू पाना, वेतन और पेंशन बढ़ाना, सरकारी सेवाओं में सुधार करना और स्कूलों में शिक्षकों व अन्य संसाधनों की कमी दूर करना शामिल है। ट्रेड यूनियनों ने भी वेतन और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग का समर्थन किया।
मैक्रों ने हिंसा की निंदा की
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आगजनी, लूटपाट और सरकारी इमारतों पर हमलों की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने भी कहा कि हिंसा के जरिए राजनीतिक मांगें मनवाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ के मुताबिक, देशभर में करीब 5.5 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जबकि आयोजकों ने यह संख्या लगभग 8 लाख बताई। सरकार के अनुसार, हिंसा के बाद 1,200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया और 150 पुलिसकर्मी घायल हुए। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल सभी लोग हिंसा का हिस्सा नहीं थे और कई जगह शांतिपूर्ण मार्च भी निकाले गए।