Updated On: Jul 29, 2026 | 10:02 AM IST
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सार
Aurangabad Tourism Corridor: छत्रपति संभाजीनगर की ऐतिहासिक तटबंदी और धरोहरों को संरक्षित करने के लिए 15 मीटर दायरे के अतिक्रमण हटाए जाएंगे। पर्यटन कॉरिडोर का प्रस्ताव भी तैयार किया जाएगा।

संभाजीनगर पर्यटन कॉरिडोर का प्रस्ताव (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
विस्तार
Chhatrapati Sambhajinagar Heritage Development: छत्रपति संभाजीनगर शहर की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने और पर्यटन को नई दिशा देने के उद्देश्य से महानगरपालिका ने बड़ा निर्णय लिया है। ऐतिहासिक किलेबंदी (तटबंदी) और उसकी 15 मीटर परिधि के भीतर मौजूद सभी अतिक्रमणों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही शहर के ऐतिहासिक दरवाजों, किलेबंदी और अन्य धरोहर स्थलों को विकसित करने के लिए विस्तृत ‘टूरिज्म कॉरिडोर’ प्रस्ताव तैयार कर जिला नियोजन समिति को भेजने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय वारसा जतन समिति की बैठक में लिया गया, जिसमें महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
वारसा जतन समिति के अध्यक्ष जयंत देशपांडे की अध्यक्षता में आयुक्त कार्यालय में आयोजित बैठक में शहर की ऐतिहासिक तटबंदी, सुरक्षा दीवारों और आसपास के क्षेत्र की समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि नियमानुसार तटबंदी से 15 मीटर के भीतर स्थित सभी अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए। संबंधित विभागों को अभियान चलाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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ऐतिहासिक दरवाजों व तटबंदी की होगी सफाई
बैठक में यह भी तय किया गया कि शहर के ऐतिहासिक दरवाजों, तटबंदी की दीवारों तथा अन्य विरासत स्थलों पर उगी घास, झाडियां और पेड़-पौधों को हटाकर व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा। इस कार्य की जिम्मेदारी संबंधित वार्ड अधिकारियों को सौंपी गई है, ताकि ऐतिहासिक धरोहरों का मूल स्वरूप सुरक्षित रखा जा सके।
आयुक्त अमोल येडगे ने कहा कि छत्रपति संभाजीनगर को समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का गौरव प्राप्त है। इस धरोहर का संरक्षण करने के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शहर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों को जोड़ते हुए ‘टूरिज्म कॉरिडोर’ का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाए। इस प्रस्ताव को जिला नियोजन समिति के समक्ष निधि स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
46 लाख रुपए की निधि से किए जाएंगे संरक्षण के कार्य
बैठक में हेरिटेज सेस से प्राप्त लगभग 46 लाख रुपये की राशि से शहर के पुराने पानी के बंबों (जल संरचनाओं) के संरक्षण का निर्णय भी लिया गया। यह कार्य इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के माध्यम से कराने पर समिति ने सैद्धांतिक सहमति दी।
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बैठक में समिति के सदस्य सचिव तथा उपसंचालक नगररचना मनोज गर्जे, शहर अभियंता संजय कोंबडे, अतिरिक्त शहर अभियंता अनिल तनपुरे, सहायक नगररचनाकार कौस्तुभ भावे, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की डॉ. शिल्पा जामगडे, रजनीश कुमार, राज्य पुरातत्व विभाग के वी. पी. राठोड, इंटैक के मुकुंद भोगले तथा संभाजीनगर महानगरपालिका के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
