Sawan Churiya Niyam : सावन में चूड़ियां पहनने से पहले जान लें ये बात, 16, 21 या 24 में कौन-सी संख्या है शुभ

Published on 5 अग॰ 2026

सावन के महीने में हरी चूड़ियां पहनना सुहाग और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक शास्त्रों में चूड़ियों की कोई निश्चित संख्या तय नहीं है, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और सुविधा के अनुसार चूड़ियां पहनना ही सबसे सही रहता है।

Sawan Churiya Niyam : सावन आते ही चारों तरफ हरियाली, झूले, मेहंदी और हरी चूड़ियों की रौनक बढ़ जाती है। सुहागिन महिलाएं इस पूरे महीने हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनना बेहद शुभ मानती हैं।

बाजारों में भी इस दौरान कांच की हरी चूड़ियों की मांग काफी बढ़ जाती है। लेकिन अक्सर महिलाओं के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर हाथों में कितनी चूड़ियां पहनना सही रहता है?

क्या इसके पीछे कोई धार्मिक नियम है या यह केवल एक परंपरा है?

क्या चूड़ियों की संख्या पहले से तय होती है?

धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों की बात करें तो सावन में चूड़ियों की कोई एक निश्चित संख्या (जैसे 16, 21 या 24) अनिवार्य रूप से नहीं लिखी गई है।

अलग-अलग राज्यों और परिवारों में इसे लेकर अपनी-अपनी लोक परंपराएं हैं:

8-8 का जोड़ा: कई इलाकों में दोनों हाथों में 8-8 चूड़ियां पहनने का रिवाज है।

12-12 का सेट: कुछ जगहों पर दोनों हाथों में 12-12 चूड़ियां पहनी जाती हैं।

मिक्स मैच: कई महिलाएं हरे रंग के साथ लाल, पीली या सोने की चूड़ियां मिलाकर पहनना पसंद करती हैं।

इसलिए चूड़ियों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण आपकी आस्था और पारिवारिक रीति-रिवाज हैं।

सावन में क्यों पहनी जाती हैं हरी चूड़ियां?

सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का समय होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्राप्त किया था।

हरा रंग प्रकृति, समृद्धि, नए जीवन और मन की शांति से जुड़ा माना जाता है। इसी कारण सुहागिनें इस महीने हरी चूड़ियां पहनकर अपने दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि की कामना करती हैं।

अलग-अलग राज्यों के अपने-अपने रिवाज

भारत में सावन के दौरान चूड़ियां पहनने के कई रूप देखने को मिलते हैं:

उत्तर और मध्य भारत: उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश में हरी कांच की चूड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है।

महाराष्ट्र: यहां हरी कांच की चूड़ियों के साथ पतले कंगन या सोने की चूड़ियां मिलाकर पहनने का चलन है।

अन्य क्षेत्र: कई जगहों पर सौभाग्य के प्रतीक के तौर पर हरी चूड़ियों के बीच में लाल या सुनहरी चूड़ियां लगाई जाती हैं।

क्या अविवाहित लड़कियां भी पहन सकती हैं?

हां, अविवाहित लड़कियां भी सावन में हरी चूड़ियां पहन सकती हैं। कई लोक मान्यताओं में कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की कामना और उत्सव के आनंद के लिए हरी चूड़ियां पहनती हैं।

हालांकि, कुछ परिवारों में यह परंपरा केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित रखी जाती है। यह पूरी तरह से आपकी व्यक्तिगत पसंद और घर के रिवाजों पर निर्भर करता है।

चूड़ियां चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

आकार का ध्यान: बहुत तंग चूड़ियां न पहनें, इससे कलाई में दर्द या निशान पड़ सकते हैं।

कांच की सुरक्षा: कांच की चूड़ियां पहनते समय सही साइज चुनें ताकि कलाई में चोट लगने या टूटने का जोखिम न हो।

विकल्प अपनाएं: अगर आपको कांच से एलर्जी है या काम करते वक्त टूटने का डर रहता है, तो आप मेटल या थ्रेड वर्क वाली चूड़ियां भी चुन सकती हैं।

श्रद्धा और सुविधा ही सबसे बड़ी परंपरा

आजकल सोशल मीडिया पर चूड़ियों की खास संख्या को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं, लेकिन इनका कोई ठोस आधार नहीं होता।

सावन का असली उद्देश्य भक्ति, परिवार में सामंजस्य और सकारात्मकता बनाए रखना है। आप जितने भाव और श्रद्धा से चूड़ियां पहनती हैं, वही सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।