संभल-हिंसा आरोपी वारिस ने कोर्ट में खुद को नाबालिग बताया: जन्म प्रमाण पत्र में उम्र 16 साल, आधार में 22; 2017 में नगर पालिका से बना था सर्टिफिकेट - Sambhal News

Published on 4 सित॰ 2026

संभल-हिंसा आरोपी वारिस ने कोर्ट में खुद को नाबालिग बताया:जन्म प्रमाण पत्र में उम्र 16 साल, आधार में 22; 2017 में नगर पालिका से बना था सर्टिफिकेट

सनी गुप्ता, संभल33 मिनट पहले

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संभल हिंसा के मुख्य आरोपी और फरार गैंगस्टर शारिक साठा के साथी वारिस ने खुद को नाबालिग बताते हुए एससी-एसटी कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। वारिस पर NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगा है और वह करीब डेढ़ साल से मुरादाबाद जेल में बंद है।

वारिस की ओर से कोर्ट में लगाए गए जन्म प्रमाण पत्र में उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2010 दर्ज है। इस हिसाब से उसकी उम्र करीब 16 साल है। यह जन्म प्रमाण पत्र 2017 में संभल नगर पालिका परिषद से जारी हुआ था। वहीं, उसके आधार कार्ड में जन्म वर्ष 2004 दर्ज है। आधार कार्ड में संशोधन भी कराया गया है।

पिता के आधार पर बना जन्म प्रमाण पत्र, अब जांच शुरू

वारिस के जन्म प्रमाण पत्र को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। संभल के सीओ/एसआई प्रभारी कुलदीप कुमार ने नगर पालिका परिषद से उन सभी दस्तावेजों की जानकारी मांगी है, जिनके आधार पर 2017 में यह प्रमाण पत्र जारी किया गया था।

यह प्रमाण पत्र तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता ने जारी किया था। शुरुआती जांच में थाना नखासा के खग्गू सराय निवासी फरमान का आधार कार्ड सामने आया है। पुलिस को आशंका है कि इसी आधार कार्ड का इस्तेमाल वारिस का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में किया गया था।

सीओ कुलदीप कुमार के मुताबिक, नगर पालिका से आवेदन की मूल फाइल मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे और उसमें वारिस की जन्मतिथि 1 जनवरी 2010 दर्ज करने का आधार क्या था।

जन्म प्रमाण पत्र के लिए स्कूल या अस्पताल का रिकॉर्ड जरूरी

सीओ कुलदीप कुमार ने बताया कि जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अस्पताल का प्रमाण पत्र या स्कूल की मार्कशीट/ट्रांसफर सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज जरूरी होते हैं। वहीं, एक साल से अधिक उम्र के व्यक्ति का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन के साथ सभासद के लेटरहेड, माता-पिता और दो गवाहों के आधार कार्ड तथा नोटरी पब्लिक के समक्ष दिया गया शपथ पत्र भी लगाया जाता है।

पुलिस अब 2017 में नगर पालिका में जमा की गई वारिस की आवेदन फाइल की जांच करेगी। दस्तावेज सामने आने के बाद ही उसकी वास्तविक उम्र को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

2017 में प्रमाण पत्र जारी करने वाले EO भी जांच के दायरे में

वारिस का जन्म प्रमाण पत्र वर्ष 2017 में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी राजकुमार गुप्ता ने जारी किया था। राजकुमार गुप्ता 2011 से 2017 तक नगर पालिका परिषद संभल के अधिशासी अधिकारी रहे।

पुलिस के मुताबिक, राजकुमार गुप्ता के कार्यकाल में जारी दस्तावेजों और अन्य मामलों की भी जांच चल रही है। बीती 2 जुलाई को संभल पुलिस ने उन्हें करीब 101 करोड़ रुपए कीमत की 38 बीघा जमीन का गलत तरीके से पट्टा आवंटित करने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद 12 अगस्त को उनकी मुरादाबाद जेल से रिहाई हुई थी। राजकुमार गुप्ता के कार्यकाल में खरीदे गए वाहनों की जांच भी सीओ कुलदीप कुमार कर रहे हैं।

24 नवंबर 2024 को सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा

वारिस पर 24 नवंबर 2024 को संभल में एक विवादित धार्मिक स्थल के सर्वे के दौरान हुई हिंसा में हत्या का आरोपी होने का भी आरोप है।

19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट, चंदौसी में वाद दायर किया गया था। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे किया गया। दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर को हुआ।

इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। सर्वे को लेकर विवाद बढ़ने के बाद हिंसा भड़क गई। पुलिस पर पथराव और फायरिंग की गई। घटना में पांच लोगों की मौत हुई थी। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एएसपी अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर समेत 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

12 FIR में 2750 से ज्यादा लोगों पर केस

हिंसा के मामले में संभल कोतवाली और थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस के मुताबिक, 2750 से ज्यादा लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए।

बाद में चार्जशीट में साक्ष्यों के आधार पर विधायक पुत्र सुहैल इकबाल का नाम निकाल दिया गया। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट समेत 158 आरोपियों को जेल भेजा गया। इनमें तीन महिलाएं और फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन कथित गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस और गुलाम भी शामिल हैं।

शारिक साठा पर रेड कॉर्नर नोटिस

पुलिस के मुताबिक, शारिक साठा को संभल हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता माना गया है। वह अभी फरार है और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है। शारिक के कथित गुर्गे मुल्ला अफरोज पर अक्टूबर 2025 में रासुका लगाई गई थी। इसके बाद वारिस और गुलाम के खिलाफ भी NSA की कार्रवाई की गई।

अब जन्म प्रमाण पत्र की फाइल से खुलेगा उम्र का राज

वारिस ने कोर्ट में जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर खुद को नाबालिग बताया है, जबकि उसके आधार कार्ड में जन्म वर्ष 2004 दर्ज है। दोनों दस्तावेजों में उम्र का यह बड़ा अंतर अब पुलिस जांच का केंद्र है। नगर पालिका से 2017 की मूल आवेदन फाइल और उसमें लगे दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस यह पता लगाएगी कि जन्मतिथि 1 जनवरी 2010 किस आधार पर दर्ज की गई थी। इसके बाद ही वारिस के नाबालिग होने के दावे पर स्थिति साफ होगी।

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