Difference between Section 144 CrPC and 163 BNSS: नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस द्वारा लागू की गई ‘धारा 163 BNSS’ वास्तव में क्या है और यह पुरानी ‘धारा 144 CrPC’ से कैसे अलग है. धारा 163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 का वह प्रावधान है जो जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट को आपात स्थिति, आपातकालीन उपद्रव या हिंसा/दंगे की आशंका के समय 5 या उससे अधिक लोगों के एक जगह एकत्र होने, विरोध मार्च निकालने और हथियार ले जाने पर रोक लगाने का कानूनी अधिकार देता है. यह कोई नया कानून नहीं, बल्कि पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की प्रसिद्ध ‘धारा 144’ का ही नया और पुनर्गठित रूप है, जिसे 1 जुलाई 2024 से लागू नए आपराधिक कानूनों के तहत नया नाम Section 163 दिया गया है.
#WATCH | Delhi: Vajra Van deployed, Delhi Police and RAF personnel stationed for security, and Police barricades put up around Parliament Street Police Station ahead of a proposed march to Parliament by CJP today, 20th July. pic.twitter.com/7hsNdoJIzK
— ANI (@ANI) July 20, 2026
धारा 163 BNSS क्या है और नई दिल्ली में यह क्यों लागू हुई?
20 जुलाई 2026 यानि आज से संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हो रही है. इसी दिन CJP ने शिक्षा में जवाबदेही और सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर से संसद तक मार्च का आह्वान किया है. सार्वजनिक शांति भंग होने, वीआईपी सुरक्षा और यातायात में बाधा की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पूरे नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है. इसके तहत केवल जंतर-मंतर पर पूर्व अनुमति के साथ सीमित प्रदर्शन की छूट है. संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में 5 या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने और तख्तियां/लाठियां लेकर चलने पर पूर्ण प्रतिबंध है.
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धारा 163 लागू होने पर क्या पाबंदियां रहती हैं?
- जमावड़े पर रोक: सार्वजनिक स्थलों पर 5 या उससे अधिक लोगों का एक साथ खड़ा होना या एकत्र होना प्रतिबंधित रहता है.
- मार्च और जुलूस पर प्रतिबंध: बिना लिखित प्रशासनिक अनुमति के कोई भी रैली, विरोध मार्च या सभा आयोजित नहीं की जा सकती.
- वस्तुओं के परिवहन पर बैन: लाठी, डंडे, हथियार, बैनर, तख्तियां, ज्वलनशील पदार्थ या पत्थरबाजी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री ले जाने पर रोक होती है.
- यातायात में रुकावट न डालना: सड़कों को ब्लॉक करने या आम जनता की आवाजाही को बाधित करने पर त्वरित हिरासत का प्रावधान है.
धारा 163 BNSS और धारा 144 CrPC में अंतर
धारा 144 CrPC का मुख्य उद्देश्य उपद्रव और खतरे को तत्काल रोकना था, जबकि धारा 163 BNSS का मुख्य उद्देश्य उपद्रव और आपातकालीन खतरे का तुरंत निवारण है. धारा 163 BNSS और धारा 144 CrPC में एकत्र होने की सीमा 5 या उससे अधिक गैर-कानूनी जमावड़ा बराबर है. मुख्य अंतर कानून की धारा के नंबर और उल्लंघन पर लगने वाले दंड के प्रावधानों में है. पहले धारा 144 का उल्लंघन करने पर आईपीसी की धारा 188 के तहत एफआईआर दर्ज होती थी. अब धारा 163 BNSS का उल्लंघन करने पर BNS की धारा 223 के तहत मामला दर्ज किया जाता है, जिसमें लोक सेवक के आदेश की अवहेलना पर 6 महीने तक की जेल या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.