अंबाला में धान की पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध: प्रशासन अलर्ट, किसानों को जागरूक कर रही टीमें, खेतों में दिन-रात निगरानी - Ambala News

Published on 25 सित॰ 2026

अंबाला में धान की कटाई का सीजन शुरू होने के साथ ही जिला प्रशासन ने फसल अवशेष जलाने पर रोक लगा दी है। जिलाधीश ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत जिले में आदेश लागू किए हैं। इसके तहत धान/जीरी की कटाई के बाद खेतों में बचे पर

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प्रशासन ने आदेशों के पालना के लिए कृषि विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों और फील्ड स्टाफ की ड्यूटी लगाई है। टीमें गांवों और खेतों में जाकर पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रख रही हैं। खेत में फसल अवशेष जलाते पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले में FIR दर्ज होने के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।

खेतों में पराली जलाता किसान। ( फाइल)

खेतों में पराली जलाता किसान। ( फाइल)

गांव-गांव पहुंचकर किसानों को कर रहे जागरूक

कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि जिले में फील्ड स्टाफ, अधिकारियों और नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। टीमें दिन-रात गांवों और खेतों में निगरानी कर रही हैं और किसानों को पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दे रही हैं।

गांव स्तर पर भी निगरानी और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बच्चों और ग्रामीणों को भी पराली न जलाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

बैठक करते हुए कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह। (फाइल)

बैठक करते हुए कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह। (फाइल)

सुपर सीडर समेत इन मशीनों से करें प्रबंधन

कृषि विभाग ने किसानों को पराली जलाने की बजाय सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रॉ चॉपर और रोटावेटर जैसी कृषि मशीनों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार फसल अवशेषों को खेत में उचित तरीके से मिलाने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बना रहता है और उसकी गुणवत्ता व उर्वरा शक्ति को लाभ मिलता है।

सुपर सीडर मशीन। (फाइल)

सुपर सीडर मशीन। (फाइल)

पराली जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान

विभाग के अनुसार पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव प्रभावित होते हैं और जैविक पदार्थ व पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचता है। आग आसपास के खेतों और संपत्ति तक फैलने का खतरा भी रहता है।

सड़क के पास पराली जलाने से धुएं के कारण दृश्यता प्रभावित होने की आशंका रहती है। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे खुद पराली न जलाएं और आसपास के किसानों को भी इसके लिए जागरूक करें।