टॉलस्टॉय के विचारों से 1917 की क्रांति तक: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में रूस की प्रेरणा

Published on 15 अग॰ 2026

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टॉलस्टॉय के विचारों से 1917 की क्रांति तक: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में रूस की प्रेरणा

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में रूस की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। रूसी विचारकों, राजनीतिज्ञों और लेखकों ने कई भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया। 1917 की रूसी क्रांति से भारतीय नेता बहुत प्रभावित हुए थे और उन्हें दमनकारी विदेशी शासन को उखाड़ फेंकने की संभावना दिखने लगी थी।

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महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक जैसे शीर्ष नेता रूसी नेताओं से संपर्क में रहे और उनसे सहायता प्राप्त की। प्रख्यात रूसी लेखक लियो टॉलस्टॉय ने 14 दिसंबर 1908 को भारतीय क्रांतिकारी और लेखक तारकनाथ दास के दो पत्रों के उत्तर में एक पत्र लिखा जो "एक हिंदू के नाम पत्र" नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस पत्र को तारकनाथ ने कनाडा से छपने वाले अपने समाचार पत्र फ्री हिंदुस्तान में छापा।19 नवंबर 1909 को दक्षिण अफ्रीका में रह रहे महात्मा गांधी ने इसे अपने समाचार पत्र इंडियन ओपिनियन में छापा था। इस पत्र में टॉलस्टॉय ने भारतीयों को प्रेम और अहिंसा के मार्ग पर चलकर स्वतंत्रता के लिए प्रयास करने को कहा था। टॉलस्टॉय से महात्मा गांधी को अहिंसक क्रांति का पहला पाठ मिला था।उग्र विचारों के लिए प्रसिद्ध महान भारतीय राजनीतिज्ञ बाल गंगाधर तिलक ने 1905 में रूसी काउंसलेट से संपर्क कर रूसी सैनिक विद्यालयों में भारतीयों के प्रशिक्षण की संभावनाएं तलाशी थीं। तिलक रूस में प्रशिक्षित भारतीय क्रांतिकारियों के साथ भारत में क्रांति की योजना पर काम कर रहे थे। महात्मा गांधी तिलक को अपना राजनैतिक गुरु मानते थे।1908 में तिलक को देशद्रोह के आरोप में सज़ा देने पर लेनिन ने ब्रिटिश सरकार की बहुत कड़ी निंदा की थी। भारतीय क्रांतिकारियों राजा महेंद्रप्रताप और मौलाना बरकतुल्ला ने 1 दिसंबर 1915 को काबुल में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार की स्थापना की, जिसका रूसी बोल्शेविक नेताओं ने समर्थन किया। भारतीय सरकार बनाने का यह पहला प्रयास था।1927 में जवाहरलाल नेहरू ने सोवियत संघ का दौरा किया और वहां के समाजवादी ढांचे से बहुत प्रभावित हुए। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने के बाद आम जनता की स्थिति सुधारने के लिए बनाई गई योजनाओं में सोवियत योजनाओं की झलक मिलती रही।स्वतंत्रता के बाद नेहरू ने सोवियत संघ से प्रेरित सरकार बनाने का प्रयास किया था। सोवियत संघ ने स्वतंत्र भारत में नई तकनीक, शिक्षा और सुरक्षा के मूलभूत ढांचे को खड़ा करने में भी लगातार सहायता दी थी।

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में रूस की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। रूसी विचारकों, राजनीतिज्ञों और लेखकों ने कई भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया। 1917 की रूसी क्रांति से भारतीय नेता बहुत प्रभावित हुए थे और उन्हें दमनकारी विदेशी शासन को उखाड़ फेंकने की संभावना दिखने लगी थी।

महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, बाल गंगाधर तिलक जैसे शीर्ष नेता रूसी नेताओं से संपर्क में रहे और उनसे सहायता प्राप्त की। प्रख्यात रूसी लेखक लियो टॉलस्टॉय ने 14 दिसंबर 1908 को भारतीय क्रांतिकारी और लेखक तारकनाथ दास के दो पत्रों के उत्तर में एक पत्र लिखा जो "एक हिंदू के नाम पत्र" नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस पत्र को तारकनाथ ने कनाडा से छपने वाले अपने समाचार पत्र फ्री हिंदुस्तान में छापा।

19 नवंबर 1909 को दक्षिण अफ्रीका में रह रहे महात्मा गांधी ने इसे अपने समाचार पत्र इंडियन ओपिनियन में छापा था। इस पत्र में टॉलस्टॉय ने भारतीयों को प्रेम और अहिंसा के मार्ग पर चलकर स्वतंत्रता के लिए प्रयास करने को कहा था। टॉलस्टॉय से महात्मा गांधी को अहिंसक क्रांति का पहला पाठ मिला था।

उग्र विचारों के लिए प्रसिद्ध महान भारतीय राजनीतिज्ञ बाल गंगाधर तिलक ने 1905 में रूसी काउंसलेट से संपर्क कर रूसी सैनिक विद्यालयों में भारतीयों के प्रशिक्षण की संभावनाएं तलाशी थीं। तिलक रूस में प्रशिक्षित भारतीय क्रांतिकारियों के साथ भारत में क्रांति की योजना पर काम कर रहे थे। महात्मा गांधी तिलक को अपना राजनैतिक गुरु मानते थे।

1908 में तिलक को देशद्रोह के आरोप में सज़ा देने पर लेनिन ने ब्रिटिश सरकार की बहुत कड़ी निंदा की थी। भारतीय क्रांतिकारियों राजा महेंद्रप्रताप और मौलाना बरकतुल्ला ने 1 दिसंबर 1915 को काबुल में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार की स्थापना की, जिसका रूसी बोल्शेविक नेताओं ने समर्थन किया। भारतीय सरकार बनाने का यह पहला प्रयास था।

1927 में जवाहरलाल नेहरू ने सोवियत संघ का दौरा किया और वहां के समाजवादी ढांचे से बहुत प्रभावित हुए। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने के बाद आम जनता की स्थिति सुधारने के लिए बनाई गई योजनाओं में सोवियत योजनाओं की झलक मिलती रही।

स्वतंत्रता के बाद नेहरू ने सोवियत संघ से प्रेरित सरकार बनाने का प्रयास किया था। सोवियत संघ ने स्वतंत्र भारत में नई तकनीक, शिक्षा और सुरक्षा के मूलभूत ढांचे को खड़ा करने में भी लगातार सहायता दी थी।

Dugin interview - Sputnik भारत, 1920, 21.11.2024

21 नवंबर 2024, 17:51