दादरी में चेक बाउंस केस में 2 महीने की कैद: दोस्त से लिया था 3 लाख का फ्रेंडली लोन; अब 1 महीने में देने होंगे 4.20 लाख रुपए - Charkhi dadri News

Published on 15 अक्टू॰ 2026

चरखी दादरी में 3 लाख रुपए के चेक बाउंस होने से जुड़े एक आपराधिक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMIC) लक्ष्य गर्ग की कोर्ट ने आरोपी राकेश को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने दोषी को 2 महीने की साधारण जेल तथा शिकायतकर्ता को ₹4,20,000/ का भुगतान देन

.

जानकारी अनुसार, चरखी दादरी के वार्ड 13 में रहने वाले अजय कुमार ने 14 अक्टूबर 2020 को कोर्ट में शिकायत दी थी। उसने बताया कि रोहतक जिले के चांदी गांव (महम क्षेत्र) के रहने वाले राकेश के साथ उसके पारिवारिक व मैत्रीपूर्ण संबंध थे। आरोपी ने अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए 3 लाख रुपए का फ्रैंडली लोन मांगा था, जो उसे दे दिया गया।

देनदारी चुकाने के लिए आरोपी ने इंडसइंड बैंक (शाखा लाखन माजरा, रोहतक) का 3 लाख रुपए का चेक 6 अगस्त 2020 जारी किया। जब शिकायतकर्ता ने इसे बैंक में लगाया, तो यह 1 सितंबर 2020 को "खाताधारक द्वारा भुगतान रोका गया" की टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस का जवाब न मिलने पर मामला कोर्ट पहुंचा। आरोपी ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया।

सुरक्षा चेक का दावा: आरोपी राकेश का तर्क था कि उसने वर्ष 2019 में किस्तों में 3 लाख रुपएलिए थे और सुरक्षा के तौर पर बिना तारीख का चेक दिया था।

रकम लौटाने की दलील: आरोपी ने दावा किया कि उसने और उसके पिता ने नकद और ऑनलाइन माध्यम से पूरी रकम वर्ष 2019-2020 के दौरान लौटा दी थी।

हैंडराइटिंग एक्सपर्ट रिपोर्ट: बचाव पक्ष ने हैंडराइटिंग एक्सपर्ट (DW-3) की रिपोर्ट पेश की, जिसके अनुसार चेक पर दर्ज तारीख आरोपी की लिखावट में नहीं थी।

कोर्ट में सुनवाई में ये निकला नतीजा

न्यायिक मजिस्ट्रेट लक्ष्य गर्ग ने दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों का गहन विश्लेषण करते हुए कुछ बिंदु रेखांकित किए। इनमें…

हस्ताक्षर की स्वीकारोक्ति: आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की है। एनआई एक्ट की धारा 118 और 139 के तहत कोर्ट यह मानकर चलती है कि चेक वैध कानूनी देनदारी के लिए जारी किया गया था।

बयानों में विरोधाभास: धारा 263(g) Cr.P.C के तहत दिए गए बयान में आरोपी ने रकम 2017-2018 में उधार लेने की बात कही, जबकि अपनी गवाही (DW-2) में उसने 2019 में पैसे लेने का दावा किया। कोर्ट ने इसे गंभीर विरोधाभास माना।

लिखित प्रमाण का अभाव: रकम वापस लौटाने का कोई लिखित दस्तावेज या रसीद कोर्ट में पेश नहीं की जा सकी।

पुलिस शिकायत व नोटिस का जवाब न देना:आरोपी ने सुरक्षा चेक के दुरुपयोग की कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई और न ही लीगल नोटिस का कोई जवाब दिया, जो शिकायतकर्ता के दावे को मजबूत करता है।

कोर्ट ने सुनाई ये सजा

कोर्ट ने आरोपी को धारा 138 एनआई एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए धारा 143(1) सहपठित धारा 357(3) Cr.P.C के अंतर्गत 2 महीने की कैद और आदेश के 1 महीने के भीतर ₹4,20,000/- का मुआवजा देने का आदेश दिया। समय पर मुआवजा न देने पर धारा 421 Cr.P.C के तहत वसूली की जाएगी।

निर्णय के पश्चात दोषी राकेश द्वारा ऊपरी कोर्ट में अपील दायर करने के लिए अर्जी दाखिल करने पर कोर्ट ने ₹50,000/- के जमानत बॉन्ड पर उसकी सजा को 13 नवंबर 2026 तक के लिए निलंबित कर दिया है।