भोपाल28 मिनट पहलेलेखक: अनूप दुबोलिया
- कॉपी लिंक

मध्यप्रदेश पुलिस दूरसंचार में सहायक उप निरीक्षक (रेडियो) पद पर वर्ष 2026 में हुई पदोन्नति वरिष्ठता के आधार को लेकर विवादों में है।
रिव्यू डीपीसी के बाद 20 कर्मचारियों की पदोन्नति निरस्त कर उन्हें वापस प्रधान आरक्षक (रेडियो) बना दिया गया। प्रभावित कर्मचारियों का तर्क है कि वरिष्ठता तय करने में विभाग ने कंबाइंड सेलेक्ट लिस्ट के बजाय प्रवर्गवार उपयुक्तता सूची को आधार बनाया, जबकि पदोन्नति नियमों में संयुक्त चयन सूची से इंटर-से वरिष्ठता तय करने का प्रावधान है।
2015 पदोन्नति के दोनों आदेश एक क्रमांक है विवाद की जड़ 1 जनवरी 2014 की आरक्षक (रेडियो) ग्रेडेशन सूची में कर्मचारियों के नाम के सामने मेरिट लिस्ट नंबर दर्ज थे। वर्ष 2015 में आरक्षक से प्रधान आरक्षक पद पर 19 और 30 मई को अलग-अलग आदेश निकले। दोनों का कार्यवाही क्रमांक डी-807/15 समान था।
कर्मचारियों का तर्क है कि इससे दोनों आदेश एक ही पदोन्नति प्रक्रिया का हिस्सा प्रतीत होते हैं। मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2002 के नियम 6(8) से 6(12) के अनुसार विभिन्न प्रवर्गों की चयन सूचियों के बाद कंबाइंड सेलेक्ट लिस्ट तैयार कर उसी आधार पर पदोन्नत कर्मचारियों की इंटर-से वरिष्ठता तय की जानी है।
2025 की प्रधान आरक्षक ग्रेडेशन सूची से उठा नया सवाल वर्ष 2025 की प्रधान आरक्षक (रेडियो) ग्रेडेशन सूची में 'उपयुक्तता सूची' वाले कॉलम में 01/2015 का उल्लेख तीन बार है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे प्रवर्गवार उपयुक्तता सूची का संदर्भ मिलता है, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड में संयुक्त चयन सूची का स्पष्ट उल्लेख नहीं दिखता।
वर्ष 2026 में सहायक उप निरीक्षक (रेडियो) पद के लिए जारी अनारक्षित सूची में एक प्रभावित कर्मचारी का नाम 227वें क्रम पर था। इसके आधार पर उनकी पदोन्नति हुई और उन्होंने कार्यभार भी ग्रहण किया। बाद में 13 जुलाई को पदोन्नति निरस्त कर दी गई। 20 जुलाई को संशोधित आदेश जारी कर उन्हें फिर प्रधान आरक्षक बना दिया गया।
वरिष्ठता किस कैसे तय हुई, यही विवाद
अब सवाल है कि रिव्यू डीपीसी में इंटर-से वरिष्ठता किस रिकॉर्ड के आधार पर तय की गई। उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट नहीं है कि नियम 6(11) के तहत तैयार कंबाइंड सेलेक्ट लिस्ट को आधार बनाया गया या प्रवर्गवार उपयुक्तता सूची से वरिष्ठता बदली गई।
इस बीच विभाग की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में कैविएट दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें पुनरीक्षित आदेश से प्रभावित सभी 20 कर्मचारियों को पक्षकार बनाया गया है। कर्मचारियों की मांग है कि 2015 से 2026 तक की पदोन्नति और ग्रेडेशन प्रक्रिया का रिकॉर्ड सामने रखकर स्पष्ट किया जाए कि वरिष्ठता का वैधानिक आधार कब और किस आदेश से बदला।
डीपीसी के बाद रिव्यू डीपीसी की गई। उसी के अनुसार सूची जारी की गई। - समीर सौरभ, एसएसपी रेडियो, पुलिस टेलीकम्युनिकेशन
.