20 साल पहले Lata Mangeshkar ने गाया था आखिरी फिल्मी गीत, आज भी दिल को करता है चकनाचूर; मां पर लिखा गया था गाना - lata mangeshkar luka chuppi rang de basanti ar rahman is most emotional song filmed on mother and son

Published on 14 अक्टू॰ 2026

लता मंगेशकर का गाया आखिरी फिल्मी गीत आज भी श्रोताओं को भावुक कर देता है। यह गीत एक मां और ...और पढ़ें

वहीदा रहमान ने निभाया था माधवन की मां का रोल

वहीदा रहमान ने निभाया था माधवन की मां का रोल

HighLights

  1. लता मंगेशकर का आखिरी फिल्मी गीत

  2. मां-बेटे के बीच गहरे रिश्ते को दर्शाता गाना

  3. प्रसून जोशी ने लिखे थे बोल

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) को बॉलीवुड में अपनी रूहानी और दिल को छू लेने वाली आवाज के लिए जाना जाता है। सिनेमा की स्वर कोकिला कही जाने वाली लता दीदी ने अपने पूरे करियर में 30 हजार से अधिक गाने गाए हैं।

लता दीदी का सबसे दर्दभरा गाना

लता जी ने वैसे तो कई रोमांटिक, चुलबुले, देशभक्ति और सैड सॉन्ग्स गाए हैं। लेकिन आज हम आपको उनके एक ऐसे ही दुखभरे गाने के बारे में बताने वाले हैं जिसमें एक मां की तड़प साफ झलकती है। ये गाना जितनी बार भी स्क्रीन पर प्ले हुआ लोगों की आंखे नम हो गईं।

Song (37)

हम बात कर रहे हैं साल 2006 में आई फिल्म रंग दे बसंती (Rang De Basanti) के गाने लुका छुपी (Luka Chuppi) की। ये गाना एक बेहद भावुक और दिल को कचोटने वाला गाना है जिसमें एक मां और बेटे के बीच के गहरे प्रेम और बिछड़ने की कहानी दिखाई गई है।

प्रसून जोश ने लिखे थे लिरिक्स

इस गीत को अपनी आवाज से सजाया है लता मंगेशकर और ए आर रहमान ने। प्रसून जोशी ने इसके बेहद सधे हुए बोल लिखे थे। जादुई संगीतकार कहे जाने वाले रहमान ने ही इसका म्यूजिक तैयार किया था। गाने के बोल लुका छुपी बहुत हुई, सामने आ जा ना...से ही साफ पता चल रहा है कि एक मां अपने बच्चे को ढूंढ रही है।

गाने में छिपी है बेहद भावुक कहानी

फिल्म में आर. माधवन ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट अजय सिंह राठौड़ का किरदार निभाया है। मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह से उनकी मौत हो जाती है। यह गाना फिल्म में तब बजता है जब अजय का पार्थिव शरीर घर लाया जाता है।

यह देखकर अजय की मां जिनका किरदार वहीदा रहमान ने निभाया है पूरी तरह टूट जाती हैं। वह यह मानने को तैयार ही नहीं है कि उसका बेटा इस दुनिया से जा चुका है।

कुछ रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया कि इस गाने को रिकॉर्ड करने के लिए स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने चार दिन तक रिहर्सल की थी। रिकॉर्डिंग के दौरान वह लगातार 8 घंटे तक खड़ी रही थीं जब जाकर ये क्लासिक गीत हमारे बीच आया।