प्रियंका गांधी की 'गोमूत्र एक्सपर्ट' वाली टिप्पणी पर बवाल, 200 से ज्यादा शिक्षाविदों ने लिखी चिट्ठी

Published on 30 जुल॰ 2026

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी को लेकर दिए गए बयान पर विवाद गहरा गया है. देश के शिक्षा जगत ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है. 215 कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों और नामचीन शिक्षाविदों ने एकजुट होकर प्रियंका गांधी को एक खुला पत्र लिखा है और उनकी टिप्पणी पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई है. शिक्षाविदों ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को किसी भी शिक्षाविद या वैज्ञानिक के बारे में टिप्पणी करते समय जिम्मेदारी और तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि बिना सोचे-समझे या तथ्यहीन बयान देने से देश के प्रतिष्ठित संस्थानों और विद्वानों के सम्मान को ठेस पहुंचती है.

Over 200 academicians write open letter to Priyanka Gandhi objecting to her remarks against IIT Madras Director V Kamakoti.

Mockery no substitute for reasoned engagement: Academicians in open letter to Priyanka Gandhi. pic.twitter.com/z8i6YOv00P

— Press Trust of India (@PTI_News) July 30, 2026

कौन हैं प्रोफेसर वी कामाकोटी, जिन्हें प्रियंका गांधी ने ‘गोमूत्र एक्सपर्ट’ बताकर संसद में कसा तंज?

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शैक्षणिक उपलब्धियों का दिया हवाला

खुले पत्र में प्रो वी कामाकोटी के देश और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए अतुलनीय योगदान और उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है. हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि प्रो. कामाकोटी जैसे विद्वानों के सम्मान की रक्षा करना समाज और देश की सामूहिक जिम्मेदारी है. प्रियंका गांधी से मांग करते हुए शिक्षाविदों ने कहा है कि वे अपने बयान पर पुनर्विचार करें और इस संबंध में सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण जारी करें.
इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में जेएनयू (JNU) की कुलपति प्रो. शांतिश्री धूलिपुडी पंडित, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.डी. कुलकणी, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. अप्पा राव पोडिले और आईआईएम कलकत्ता के निदेशक प्रो. आलोक कुमार राय समेत कई शीर्ष शिक्षाविद शामिल हैं.

कौन हैं प्रो वी कामाकोटी?

प्रो. कामाकोटी देश के अग्रणी कंप्यूटर वैज्ञानिकों में से एक हैं. वे भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ (Shakti) को विकसित करने वाली टीम के प्रमुख रहे हैं. इसके अलावा वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) के सदस्य भी हैं और उन्हें उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है. सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में जो उच्चस्तरीय टास्क फोर्स बनाई है, उसमें प्रो. कामाकोटी को भी शामिल किया गया है.

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क्या था पूरा मामला?

लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने तंज कसते हुए कहा था कि नई कमेटी में पूर्व आईबी चीफ, आईटी कंपनी के मालिक और एक गोमूत्र एक्सपर्ट शामिल हैं. दरअसल, प्रो. कामाकोटी ने पूर्व में पारंपरिक ज्ञान पर चर्चा के दौरान गोमूत्र के औषधीय गुणों पर टिप्पणी की थी. शिक्षाविदों ने कहा कि यदि किसी के विचारों या शोध पर आपत्ति है तो उस पर वैज्ञानिक बहस होनी चाहिए, न कि उनका राजनीतिक मजाक उड़ाया जाना चाहिए.