हमारे देश में एथेनॉल को लेकर अभी भी कई तरह की बातें सुनने को मिल रही हैं. कुछ लोगों का मानना है कि, E20 से गाड़ी के कई पार्ट्स खराब हो रहे हैं. लेकिन कई कंपनियों ने यह दावा किया है कि, एथेनॉल से उनके गाड़ियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है. जिसमें मारुती सुजुकी कंपनी भी है. दरअसल, मारुति सुजुकी की पुरानी कारों के मालिक इस दुविधा में हैं कि साल 2008 या उसके बाद खरीदी गई गाड़ियों में E20 ईंधन भरवाना सुरक्षित है या नहीं. इस पूरे मुद्दे पर देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने खुद सामने आकर आधिकारिक बयान जारी किया है और पुरानी गाड़ियों के मालिकों की सबसे बड़ी चिंता को चुटकी में दूर कर दिया है.
मारुति सुजुकी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने शेयरधारकों और ग्राहकों को संबोधित करते हुए एक बहुत बड़ा और राहत देने वाला खुलासा किया. उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि साल 2008 के बाद से निर्मित मारुति की सभी गाड़ियां E20 फ्यूल के पूरी तरह अनुकूल हैं.
पुरानी कारों पर दिया बड़ा बयान
बता दें कि, हिसाशी ताकेउची ने कंपनी का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि मारुति सुजुकी ने 2008 के उत्पादन वर्ष से ही अपनी कारों के इंजन पार्ट्स, फ्यूल लाइन्स और रबर मैटेरियल में एथेनॉल कंपैटिबिलिटी को बढ़ाना शुरू कर दिया था. उन्होंने मानना है कि, कंपनी के मौजूदा मॉडल्स तो E20 के अनुकूल हैं ही लेकिन 2008 के बाद बनी पुरानी कारें भी आसानी से E20 पेट्रोल पर चल सकती हैं. वहीं, अब कंपनी का यह बयान उन लाखों कार मालिकों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है जो एथेनॉल की वजह से अपनी पुरानी कार के इंजन, पाइप या रबर सील्स के कटने व गलने की अफवाहों से परेशान हो रहे थे.

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पुरानी गाड़ियों की चिंता हुई खत्म?
दरअसल, साधारण पेट्रोल के मुकाबले एथेनॉल में नमी सोखने की क्षमता ज्यादा होती है. अगर कोई गाड़ी बहुत पुरानी है और उसका इंजन एथेनॉल के लिए तैयार नहीं किया गया है तो E20 ईंधन से उसके फ्यूल पंप, रबर होज और इंजन के अंदरूनी हिस्सों में जंग या सड़न का खतरा पैदा हो जाता है.
इसके चलते ही सरकार द्वारा E20 फ्यूल अनिवार्य किए जाने के बाद से 10 से 15 साल पुरानी गाड़ियों के मालिक काफी असमंजस में थे. लेकिन मारुति द्वारा 2008 से ही अपनी तकनीक को अपडेट करने के खुलासे ने पुराने ग्राहकों के मन से इंजन डैमेज होने के सारे डर को पूरी तरह से खत्म कर दिया है.

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मारुति का बड़ा निवेश
जानकारी दें दे कि, अपनी गाड़ियों को ग्रीन फ्यूल फ्रेंडली बनाने के साथ-साथ मारुति सुजुकी अपनी फैक्ट्रियों को भी पूरी तरह से इको-फ्रेंडली बनाने में लगी हुई है. कंपनी ने आने वाले 5 सालों के लिए करीब 77,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कैपेक्स तय किया है.
इस विशाल बजट का एक बड़ा हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, नए ग्रीन मॉडल्स विकसित करने और कार्बन-न्यूट्रल पहलों पर खर्च किया जाएगा. वहीं, इसके अलावा कंपनी मानेसर, खरखौदा और साणंद प्लांट में सोलर एनर्जी क्षमता को बढ़ाकर 211 मेगावाट करने और बायोमास प्लांट लगाने पर तेजी से काम कर रही है.
क्यों फायदेमंद है यह खबर?
बता दें कि, अगर आपके पास भी मारुति की कोई 2008 के बाद की ऑल्टो, स्विफ्ट, वैगनआर, डिजायर या कोई अन्य मॉडल है तो आपको अपनी कार में अलग से कोई बदलाव या किट लगवाने की जरूरत नहीं है. मारुति सुजुकी की ओर से आई यह आधिकारिक खबर यह साबित करती है कि कंपनी ने भविष्य की टेक्नोलॉजी और ईंधन बदलावों की तैयारी 18 साल पहले ही शुरू कर दी थी.
अब आप बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी पुरानी मारुति कार में पेट्रोल पंप पर मिलने वाला E20 पेट्रोल भरवा सकते हैं और बिना किसी इंजन खराबी के अपनी ड्राइविंग का पूरा आनंद उठा सकते हैं.
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