झारखंड में सड़कों पर 'यमदूत' बनी तेज रफ्तार: 2025 में 527 जिंदगियां हुईं खत्म, युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा प्रभावित Speeding turns into the 'Messenger of Death' on Jharkhand's roads: 527 lives lost in 2025; the younger generation is the most affected.

Published on 13 जुल॰ 2026

झारखंड में सड़कों पर 'यमदूत' बनी तेज रफ्तार: 2025 में 527 जिंदगियां हुईं खत्म, युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा प्रभावित

झारखंड की सड़कों पर बेलगाम रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़ों ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। साल 2025 के दौरान सड़क हादसों में 527 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि इन मृतकों में सबसे बड़ी संख्या 18 से 30 वर्ष के युवाओं की है। प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट बताती है कि लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण हर दिन राज्य के किसी न किसी कोने में कोई परिवार अपना चिराग खो रहा है।

युवाओं पर टूटा दुखों का पहाड़

सड़क सुरक्षा ऑडिट की रिपोर्ट के अनुसार, कुल मौतों में से करीब 60 प्रतिशत हिस्सा युवाओं का है। करियर की शुरुआत करने वाले या अपने सुनहरे भविष्य के सपने देख रहे 18 से 30 साल के युवा सड़क हादसों का मुख्य शिकार बन रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोपहिया वाहनों पर बिना हेलमेट के स्टंट करना, नशे में गाड़ी चलाना और सड़क नियमों की अनदेखी करना इस आयु वर्ग में मौतों का सबसे बड़ा कारण है। यह आंकड़ा न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि परिवार के पालन-पोषण में लगे युवाओं की कमी से एक बड़ा सामाजिक संकट भी पैदा हो गया है।

क्यों जानलेवा साबित हो रहे हैं झारखंड के हाईवे?

झारखंड के प्रमुख राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) की पहचान के बावजूद हादसों में कमी नहीं आ रही है। तेज रफ्तार के अलावा, सड़कों पर आवारा पशुओं का घूमना, गड्ढे और रात के समय खराब स्ट्रीट लाइटें भी हादसों को न्योता देती हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण और उपनगरीय सड़कों पर मौत का आंकड़ा अधिक है, क्योंकि वहां चिकित्सा सुविधाएं तुरंत उपलब्ध नहीं हो पातीं। 'गोल्डन आवर' यानी हादसे के एक घंटे के भीतर इलाज न मिल पाने के कारण भी कई घायलों की जान सड़क पर ही चली जाती है।

अब प्रशासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति

मौतों का यह भयावह ग्राफ देखकर अब परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस ने कमर कस ली है। आगामी दिनों में राज्यभर में विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें ओवरस्पीडिंग पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने सभी जिला मुख्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे ब्लैक स्पॉट्स पर तत्काल प्रभाव से साइन बोर्ड लगाएं और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी बढ़ाएं। इसके साथ ही, युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षण संस्थानों में विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। सड़क पर अपनी जान बचाने के लिए अब नियमों का पालन करना विकल्प नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुका है।