Phaphamau Assembly Caste Equations: फाफामऊ के जातिगत समीकरण और 2027 का चुनावी गणित

Published on 12 सित॰ 2026

Phaphamau Assembly Caste Equations में OBC, यादव, मुस्लिम, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण और पटेल-कुर्मी मतदाता चुनावी गणित की प्रमुख सामाजिक धुरियां हैं। पुराने सीट-स्तरीय आकलनों में अनुसूचित जाति करीब 70 हजार, ब्राह्मण 50 हजार तथा यादव और पटेल करीब 45-45 हजार बताए गए थे। मुस्लिम मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 30 हजार रहा है। 2026 की अंतिम मतदाता सूची में फाफामऊ का वास्तविक वोटर बेस 3,16,593 है।

फाफामऊ विधानसभा संख्या 254 है। यह सामान्य सीट है और फूलपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। वर्तमान विधायक BJP के गुरु प्रसाद मौर्य हैं। 2022 में उन्होंने SP के अंसार अहमद को 14,324 वोट से हराया था। इसके उलट 2024 लोकसभा चुनाव में फाफामऊ विधानसभा खंड से SP प्रत्याशी 8,833 वोट आगे रहा। यानी 2027 से पहले BJP के पास मौजूदा विधायक और संगठन का फायदा है, लेकिन हालिया संसदीय रुझान मुकाबले को खुला बनाता है।

उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के चुनावी परिणाम काफी हद तक जटिल जातिगत समीकरणों और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर निर्भर करते हैं, जिन्हें आगामी 2027 के चुनाव की दिशा तय करने में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

राज्य के सभी 75 जिलों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया गया है, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या में बदलाव दर्ज हुआ हैं।

प्रयागराज जिले के   फाफामाऊ विधानसभा के 2012 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण में बदलाव दर्ज हुआ है। उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के 2007 से 2022 तक के चुनावी इतिहास, विजेता-उपविजेता प्रत्याशियों और मत प्रतिशत के तुलनात्मक विश्लेषण के लिए मदद ली जा सकती है।

फाफामऊ विधानसभा एक नजर में

विवरणजानकारी
विधानसभाफाफामऊ
विधानसभा संख्या254
जिलाप्रयागराज
लोकसभा क्षेत्रफूलपुर
आरक्षणसामान्य
वर्तमान विधायकगुरु प्रसाद मौर्य
पार्टीBJP
2026 अंतिम मतदाता3,16,593
SIR से पहले मतदाता3,66,178
मतदाताओं की शुद्ध कमी49,585
कमी13.54%
2022 विजेतागुरु प्रसाद मौर्य, BJP
2022 उपविजेताअंसार अहमद, SP
2022 जीत का अंतर14,324 वोट
2024 लोकसभा खंड SP वोट88,999
2024 BJP वोट80,166
2024 BSP वोट18,652
2024 SP की बढ़त8,833 वोट
प्रमुख सामाजिक समूहOBC, यादव, मुस्लिम, SC, ब्राह्मण, पटेल-कुर्मी

2026 की अंतिम SIR सूची में प्रयागराज जिले के कुल मतदाता घटकर 38,65,975 रह गए। फाफामऊ में 3,16,593 मतदाता दर्ज हैं, जबकि अक्टूबर 2025 के पुराने आधार पर यहां 3,66,178 वोटर थे।

Phaphamau Assembly Caste Equations: OBC के साथ यादव-मुस्लिम वोट अहम

Phaphamau Assembly Caste Equations की खासियत यह है कि यहां कोई अकेला सामाजिक समूह आसानी से बहुमत की स्थिति नहीं बनाता। पुराने प्रतिशत-आधारित विश्लेषण में अन्य OBC को करीब 19 प्रतिशत, मुस्लिम 15 प्रतिशत, यादव 12 प्रतिशत, दलित 12 प्रतिशत और ब्राह्मण करीब 9 प्रतिशत बताया गया था। पासी मतदाताओं का भी अलग प्रभाव दर्ज किया गया।

2022 के आसपास के एक दूसरे सामाजिक आकलन में अनुसूचित जाति करीब 70 हजार, ब्राह्मण 50 हजार तथा यादव और पटेल 45-45 हजार बताए गए। इससे इतना स्पष्ट है कि फाफामऊ में जीत के लिए OBC नेतृत्व के साथ दलित, सवर्ण और मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन जोड़ना जरूरी रहता है।

फाफामऊ विधानसभा का संकेतात्मक जातिगत समीकरण

जाति/समुदायपुराना संकेतात्मक अनुमान
अनुसूचित जातिकरीब 70,000
ब्राह्मणकरीब 50,000
यादवकरीब 45,000
पटेल / कुर्मीकरीब 45,000
मुस्लिमकरीब 30,000
मौर्य-कुशवाहा, पाल व अन्य OBCमहत्वपूर्ण उपस्थिति
अन्य सामाजिक समूहशेष मतदाता
2026 आधिकारिक कुल मतदाता3,16,593

ये आंकड़े 2026 की आधिकारिक जाति-वार मतदाता सूची नहीं हैं। पुराने अध्ययनों में जातिगत अनुमान आपस में अलग भी हैं। उदाहरण के लिए एक पुराने प्रतिशत-आधारित प्रोफाइल में मुस्लिम मतदाताओं का अनुपात 15 प्रतिशत और यादव 12 प्रतिशत बताया गया था। इसलिए ऊपर की संख्या का उपयोग सामाजिक प्रभाव समझने के लिए करना चाहिए, न कि मौजूदा जातिवार वोटर गणना के रूप में।

फाफामऊ वोटर लिस्ट 2026: 3,16,593 मतदाता

2027 के चुनाव से पहले फाफामऊ के चुनावी गणित में सबसे बड़ा तथ्यात्मक बदलाव मतदाता सूची का है।

मतदाता सूचीसंख्या
27 अक्टूबर 2025 का आधार3,66,178
10 अप्रैल 2026 की अंतिम सूची3,16,593
शुद्ध कमी49,585
कमी13.54%

मतदाता संख्या में करीब 50 हजार की कमी हुई है। यह बदलाव 2022 में BJP की 14,324 वोट की जीत और 2024 में SP की 8,833 वोट की विधानसभा-खंड बढ़त—दोनों से काफी बड़ा है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि हटे हुए नाम किसी खास जाति या पार्टी के समर्थक थे। ऐसी कोई आधिकारिक जातिवार जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन 2027 में सभी दलों को पुराने बूथ डेटा को 3.17 लाख के नए वोटर बेस के मुताबिक दोबारा तैयार करना होगा।

OBC, मौर्य और पटेल वोट क्यों हैं केंद्र में?

फाफामऊ और पूरे फूलपुर संसदीय क्षेत्र की राजनीति में पिछड़े वर्ग की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। कुर्मी-पटेल, मौर्य-कुशवाहा, यादव और दूसरे OBC समुदाय मिलकर बड़ी सामाजिक ताकत बनाते हैं। पुराने फूलपुर क्षेत्रीय विश्लेषण में भी कुर्मी वोट को खास तौर पर प्रभावशाली बताया गया था।

मौजूदा विधायक गुरु प्रसाद मौर्य की सामाजिक पहचान आधिकारिक विधानसभा प्रोफाइल में पिछड़ी जाति, मौर्य दर्ज है। 2022 में उन्हें 91,186 वोट मिले, इसलिए उनकी जीत को केवल किसी एक OBC समुदाय तक सीमित नहीं किया जा सकता। BJP को OBC आधार के साथ ब्राह्मण, दलित और दूसरे समूहों से भी समर्थन मिला।

2024 लोकसभा चुनाव में SP ने अमरनाथ मौर्य को मैदान में उतारा और उन्होंने फाफामऊ खंड में BJP प्रत्याशी प्रवीण पटेल पर बढ़त बनाई। इससे साफ है कि OBC वोट के भीतर प्रतिस्पर्धा 2027 में भी सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक लड़ाइयों में होगी।

यादव-मुस्लिम और दलित वोट का चुनावी असर

यादव और मुस्लिम मतदाता SP के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक आधार माने जाते हैं। पुराने विस्तृत अनुमान में यादव करीब 45 हजार और मुस्लिम करीब 30 हजार बताए गए थे, जबकि दूसरे पुराने अध्ययनों में दोनों की संख्या इससे अधिक आंकी गई। इसलिए सटीक संख्या पर जोर देने के बजाय इनके राजनीतिक प्रभाव को समझना अधिक उपयोगी है।

अनुसूचित जाति मतदाता भी बड़ा स्विंग ब्लॉक हैं। 2022 में BSP को 27,286 वोट, यानी करीब 13 प्रतिशत वोट मिले थे। 2024 लोकसभा चुनाव में BSP प्रत्याशी को फाफामऊ खंड से 18,652 वोट मिले। BSP के प्रदर्शन में बदलाव BJP-SP मुकाबले पर सीधे असर डाल सकता है।

यही कारण है कि 2027 में SP के लिए यादव-मुस्लिम आधार के साथ दलित और गैर-यादव OBC समर्थन बढ़ाना जरूरी होगा, जबकि BJP के लिए अपने OBC-सवर्ण आधार के साथ दलित वोट में हिस्सेदारी बनाए रखना अहम रहेगा।

ब्राह्मण वोट भी क्यों रहेगा निर्णायक?

पुराने आकलनों में ब्राह्मण मतदाता करीब 50 हजार बताए गए हैं। यह फाफामऊ में इतना बड़ा सामाजिक समूह है कि करीबी चुनाव में इसकी दिशा अकेले कई हजार वोट का अंतर पैदा कर सकती है।

2012 में निर्दलीय और BJP के ब्राह्मण प्रत्याशियों ने मिलकर बड़ी संख्या में वोट हासिल किए थे। 2017 और 2022 में BJP की जीत बताती है कि पार्टी ने OBC नेतृत्व के साथ सवर्ण मतदाताओं का प्रभावी गठजोड़ तैयार किया।

2027 में BJP के लिए ब्राह्मण समर्थन को बनाए रखना और SP के लिए इसमें सेंध लगाना दोनों ही महत्वपूर्ण होंगे।

फाफामऊ विधानसभा चुनाव 2022: BJP की 14,324 वोट से जीत

2022 में BJP के गुरु प्रसाद मौर्य को 91,186 वोट मिले। SP के अंसार अहमद ने 76,862 वोट हासिल किए और BSP के ओम प्रकाश को 27,286 वोट मिले। BJP ने 14,324 वोट से चुनाव जीता।

प्रत्याशीपार्टीवोटवोट शेयर
गुरु प्रसाद मौर्यBJP91,18643.26%
अंसार अहमदSP76,86236.47%
ओम प्रकाशBSP27,28612.95%
लक्ष्मी नारायणJDL2,8971.38%
दुर्गेश पांडेयकांग्रेस2,3911.14%
BJP की जीत14,324

2022 में BSP का लगभग 13 प्रतिशत वोट खास तौर पर महत्वपूर्ण था। यदि यह वोट BJP या SP में से किसी एक तरफ अधिक खिसकता तो जीत का अंतर काफी बदल सकता था।

2012 से 2022 तक कैसे बदला फाफामऊ का चुनावी इतिहास?

पिछले तीन विधानसभा चुनावों में फाफामऊ में SP और BJP दोनों जीत चुकी हैं।

चुनावविजेतापार्टीवोटजीत का अंतर
2012अंसार अहमदSP51,9505,296
2017विक्रमजीत मौर्यBJP83,23925,985
2022गुरु प्रसाद मौर्यBJP91,18614,324

2012 में SP ने सिर्फ 5,296 वोट से सीट जीती थी। 2017 में BJP ने बड़ी बढ़त के साथ सीट पलटी और 2022 में लगातार दूसरी जीत दर्ज की।

इस ट्रेंड में BJP का विधानसभा स्तर पर मजबूत आधार दिखाई देता है, लेकिन 2017 की तुलना में 2022 में उसका जीत अंतर 25,985 से घटकर 14,324 हो गया।

2017 में BJP को मिली थी 25,985 वोट की बढ़त

2017 विधानसभा चुनाव में BJP के विक्रमजीत मौर्य ने 83,239 वोट हासिल किए। SP के अंसार अहमद को 57,254 और BSP के मनोज को 51,983 वोट मिले।

2017 प्रत्याशीपार्टीवोट
विक्रमजीत मौर्यBJP83,239
अंसार अहमदSP57,254
मनोजBSP51,983
BJP की जीत25,985

उस चुनाव में SP और BSP दोनों ने 50 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। विपक्षी वोट का विभाजन BJP की बड़ी जीत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

2012 में SP-BSP के बीच सिर्फ 5,296 वोट का अंतर

2012 में SP के अंसार अहमद को 51,950 वोट मिले। BSP के गुरु प्रसाद मौर्य 46,654 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। जीत का अंतर सिर्फ 5,296 वोट था।

2012 प्रत्याशीपार्टीवोट
अंसार अहमदSP51,950
गुरु प्रसाद मौर्यBSP46,654
मनोज कुमार पांडेयनिर्दलीय21,761
प्रभा शंकर पांडेयBJP17,117
SP की जीत5,296

दिलचस्प रूप से 2012 में BSP से दूसरे स्थान पर रहे गुरु प्रसाद मौर्य ने दस साल बाद BJP प्रत्याशी के रूप में यही सीट जीत ली। इससे फाफामऊ में पार्टी के साथ स्थानीय नेतृत्व की भूमिका भी स्पष्ट होती है।

2024 लोकसभा चुनाव में SP ने बनाई 8,833 वोट की बढ़त

2024 लोकसभा चुनाव में फाफामऊ विधानसभा खंड से SP के अमरनाथ मौर्य को 88,999 वोट मिले। BJP के प्रवीण पटेल को 80,166 और BSP के जगन्नाथ पाल को 18,652 वोट मिले।

SP की BJP पर बढ़त 8,833 वोट रही।

2024 लोकसभा: फाफामऊ खंडवोटवोट शेयर
SP88,99945.46%
BJP80,16640.95%
BSP18,6529.53%
SP की बढ़त8,833

पूरे फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में BJP ने सिर्फ 4,332 वोट से चुनाव जीता, लेकिन फाफामऊ, सोरांव और फूलपुर जैसे ग्रामीण विधानसभा खंडों में SP आगे रही। BJP को इलाहाबाद उत्तर और पश्चिम से मिली बढ़त ने संसदीय सीट बचाई।

इसलिए फाफामऊ का 2024 परिणाम 2027 के लिए SP का महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत है, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनावों की अलग प्रकृति को ध्यान में रखना जरूरी है।

2019 से 2024 में पलटा लोकसभा-खंड ट्रेंड

2019 में फाफामऊ विधानसभा खंड से BJP को 1,03,503 वोट और SP को 78,298 वोट मिले थे। BJP की बढ़त 25,205 वोट थी।

2024 में SP 8,833 वोट आगे निकल गई।

लोकसभा चुनावBJP वोटSP वोटबढ़त
20191,03,50378,298BJP +25,205
202480,16688,999SP +8,833

दो संसदीय चुनावों के बीच सापेक्ष अंतर करीब 34 हजार वोट बदला। उम्मीदवार और गठबंधन अलग होने के कारण इसे सीधा विधानसभा स्विंग नहीं माना जा सकता, लेकिन BJP के लिए यह एक स्पष्ट चेतावनी है।

BJP के लिए 2027 का चुनावी रास्ता

BJP के पास फाफामऊ में लगातार दो विधानसभा जीत और मौजूदा विधायक का फायदा है। गुरु प्रसाद मौर्य के जरिए पार्टी के पास मजबूत OBC नेतृत्व भी मौजूद है।

लेकिन 2024 में विधानसभा खंड में पीछे रहना बताता है कि 2027 में पुराने फॉर्मूले को और व्यापक करना होगा।

BJP की संभावित रणनीति मौर्य व अन्य गैर-यादव OBC + ब्राह्मण + पटेल-कुर्मी में हिस्सेदारी + दलित/Pasi वोट के आसपास रह सकती है। पार्टी के लिए 2022 का 91 हजार से अधिक वोट वाला आधार बनाए रखना पहली जरूरत होगी।

SP के सामने अवसर और चुनौती

SP ने 2024 लोकसभा चुनाव में फाफामऊ खंड में 88,999 वोट हासिल कर BJP से बढ़त बनाई। यह 2022 के विधानसभा चुनाव में मिले 76,862 वोट से लगभग 12 हजार अधिक है।

2027 में पार्टी के लिए मुख्य सामाजिक फॉर्मूला यादव + मुस्लिम + मौर्य/पटेल समेत OBC विस्तार + दलित हिस्सेदारी हो सकता है।

चुनौती यह है कि लोकसभा स्तर की विपक्षी एकजुटता को विधानसभा चुनाव में भी बनाए रखा जाए। प्रत्याशी चयन यहां खास तौर पर महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि सीट का इतिहास बताता है कि स्थानीय उम्मीदवार जातिगत समीकरण में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

BSP का 15-25 हजार वोट बदल सकता है मुकाबला

फाफामऊ में BSP अभी भी नजरअंदाज करने लायक ताकत नहीं है। 2017 में पार्टी को 51,983 वोट मिले थे। 2022 में यह घटकर 27,286 और 2024 लोकसभा चुनाव में 18,652 रह गया।

चुनावBSP वोट
विधानसभा 201751,983
विधानसभा 202227,286
लोकसभा 202418,652

अगर BSP 2027 में दलित वोट के साथ OBC या मुस्लिम मतदाताओं का अतिरिक्त हिस्सा जोड़ती है तो BJP-SP की सीधी लड़ाई त्रिकोणीय हो सकती है। कमजोर BSP की स्थिति में उसका पुराना वोट किस तरफ जाता है, यह भी निर्णायक होगा।

2026 की नई वोटर लिस्ट क्यों बड़ा फैक्टर है?

फाफामऊ में 2026 SIR के बाद 49,585 मतदाता कम हुए हैं।

तुलनासंख्या
2026 SIR में मतदाता कमी49,585
2022 BJP जीत का अंतर14,324
2024 SP-BJP अंतर8,833

मतदाता सूची में बदलाव दोनों हालिया चुनावी अंतर से कई गुना बड़ा है। इसलिए 2027 में नई सूची के अनुसार बूथ प्रबंधन, मतदाता सत्यापन और समर्थक वोट को मतदान केंद्र तक पहुंचाना जातिगत गणित जितना ही महत्वपूर्ण होगा।

युवा वोट और स्थानीय मुद्दे भी करेंगे असर

फाफामऊ में जातिगत समीकरण के साथ बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाएं, भर्ती प्रक्रिया, सड़क और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों का भी असर हो सकता है। 2024 के चुनावी माहौल में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक को लेकर युवाओं की नाराजगी फाफामऊ सहित फूलपुर संसदीय क्षेत्र के ग्रामीण हिस्सों में चर्चा का विषय रही थी।

करीबी चुनाव की स्थिति में जाति के बाहर ऐसे मुद्दे कुछ हजार वोट का स्विंग पैदा कर सकते हैं।

2027 में किन फैक्टरों से तय होगा फाफामऊ चुनाव?

चुनावी फैक्टरसंभावित प्रभाव
OBC वोटसीट की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक धुरी
मौर्य वोटBJP नेतृत्व और SP दोनों की रणनीति में अहम
यादव वोटSP का प्रमुख सामाजिक आधार
पटेल-कुर्मी वोटदोनों बड़े खेमों के लिए निर्णायक
मुस्लिम वोटविपक्षी गठजोड़ के लिए महत्वपूर्ण
दलित/Pasi वोटBSP के कमजोर या मजबूत होने से दिशा बदलेगी
ब्राह्मण वोटबड़ा सवर्ण स्विंग ब्लॉक
मौजूदा BJP विधायकसत्ता पक्ष का स्थानीय संगठनात्मक फायदा
2024 में SP की बढ़तविपक्ष के लिए सकारात्मक संकेत
BSP का प्रदर्शनमुकाबले को दोतरफा या त्रिकोणीय बनाएगा
2026 नई वोटर सूचीपुराने बूथ गणित में बड़ा बदलाव
युवा और स्थानीय मुद्देकरीबी चुनाव में अतिरिक्त स्विंग

फाफामऊ विधानसभा में फिलहाल किसकी स्थिति मजबूत?

विधानसभा इतिहास के आधार पर BJP के पास मजबूत संगठनात्मक स्थिति है। पार्टी ने 2017 और 2022 लगातार दो चुनाव जीते और मौजूदा विधायक गुरु प्रसाद मौर्य के पास स्थानीय राजनीतिक आधार भी है।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव ने SP को मजबूत चुनौतीकर्ता बना दिया है। SP फाफामऊ खंड में 8,833 वोट आगे रही, जबकि 2019 में इसी खंड में BJP 25,205 वोट आगे थी।

इसलिए 2027 से पहले सीट को किसी एक दल के लिए सुरक्षित मानना उचित नहीं होगा। फिलहाल मुकाबला BJP बनाम SP की प्रतिस्पर्धी लड़ाई की ओर जाता दिखाई देता है, जिसमें BSP और उम्मीदवार चयन निर्णायक तीसरा फैक्टर बन सकते हैं।

फाफामऊ विधानसभा के जातिगत समीकरण और 2027 का चुनावी निष्कर्ष

फाफामऊ विधानसभा के जातिगत समीकरण में OBC, यादव, मुस्लिम, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण और पटेल-कुर्मी मतदाता मुख्य सामाजिक ताकतें हैं। पुराने विस्तृत अनुमान में SC करीब 70 हजार, ब्राह्मण 50 हजार और यादव-पटेल करीब 45-45 हजार बताए गए थे। मुस्लिम मतदाताओं का पुराना अनुमान करीब 30 हजार था। अलग-अलग पुराने आकलनों में संख्या बदलती है, इसलिए इन्हें 2026 की आधिकारिक जातिवार मतदाता संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

2026 की अंतिम मतदाता सूची में फाफामऊ का वास्तविक वोटर बेस 3,16,593 है। अक्टूबर 2025 के 3,66,178 मतदाताओं की तुलना में 49,585 वोटर, यानी 13.54 प्रतिशत की कमी हुई है।

राजनीतिक रूप से BJP ने 2022 में 14,324 वोट से सीट जीती थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में SP इसी विधानसभा खंड से 8,833 वोट आगे निकल गई। 2019 में BJP की 25,205 वोट की संसदीय बढ़त का 2024 में पलटना बताता है कि यहां सामाजिक और राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं।

2027 में BJP के लिए मौर्य/गैर-यादव OBC + ब्राह्मण + पटेल-कुर्मी + दलित हिस्सेदारी, जबकि SP के लिए यादव-मुस्लिम + OBC विस्तार + दलित समर्थन सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक फॉर्मूला होगा। BSP अपने पुराने दलित और बहुजातीय वोट में वापसी करती है तो पूरी लड़ाई का स्वरूप बदल सकता है।

करीब 3.17 लाख मतदाताओं वाली फाफामऊ विधानसभा का नतीजा अंततः OBC वोट के भीतर प्रतिस्पर्धा, यादव-मुस्लिम समर्थन, दलित और ब्राह्मण वोट की दिशा, उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ तथा 2026 की नई मतदाता सूची के बाद बने बूथवार जातिगत समीकरण से तय होने की संभावना है।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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