2029 में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव? 22 NDA शासित राज्यों का बदलेगा चुनावी कैलेंडर, कितनी विधानसभा होगी भंग?

Published on 24 अग॰ 2026

Time Updated: Monday, August 24, 2026, 16:40 [IST]

One Nation One Election: क्या 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ देश के 22 NDA शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी विधानसभा चुनाव हो सकते हैं? इस सवाल ने एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ा दी है। इसी बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरिद्वार में संतों और धर्मगुरुओं से 'एक देश, एक चुनाव' के पक्ष में जनजागरूकता फैलाने की अपील की है।

शिवराज सिंह चौहान लंबे समय से एक साथ चुनाव के समर्थन में बोलते रहे हैं। उनका तर्क है कि बार-बार होने वाले चुनावों में सरकार, प्रशासन और पैसा चुनावी तैयारियों में लग जाता है। अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हों तो विकास के काम पर ज्यादा फोकस किया जा सकता है।

One Nation One Election 2029

शिवराज ने संतों से क्यों मांगा समर्थन?

हरिद्वार में एक सभा को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' किसी एक पार्टी का एजेंडा नहीं, बल्कि देशहित से जुड़ा फैसला है। उन्होंने संतों से लोगों के बीच इसके फायदे बताने की अपील की।

उन्होंने कहा, "अगर देश आगे बढ़ेगा तो राजनीतिक दल भी आगे बढ़ते रहेंगे।" शिवराज के मुताबिक बार-बार चुनाव होने से समय, पैसा और सरकारी मशीनरी खर्च होती है। एक साथ चुनाव होने पर इन संसाधनों को विकास के काम में लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य के लिए चुनावी व्यवस्था में यह बदलाव जरूरी है।

2029 में ही क्यों हो रही है चर्चा?

मौजूदा चर्चा इसलिए खास है क्योंकि संसदीय समिति अब 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराने की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। इससे पहले प्रस्तावित टाइमलाइन में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का पहला बड़ा चक्र 2034 के आसपास शुरू होने की बात सामने आई थी। अब 2029 को लेकर विकल्पों पर विचार हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक NDA 2029 में अपने शासन वाले 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लोकसभा चुनाव के साथ जोड़ने की संभावना देख रहा है। इसके लिए कुछ विधानसभाओं का कार्यकाल पूरा होने से पहले खत्म करना पड़ सकता है।

कितनी विधानसभाओं का कार्यकाल घटाना पड़ेगा?

यही इस पूरी योजना का सबसे बड़ा सवाल है। 22 इकाइयों में से आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम में लोकसभा और विधानसभा चुनाव पहले से साथ होते हैं। इसलिए वहां अलग से बड़ा बदलाव नहीं करना पड़ेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक बाकी में से 11 राज्यों में 2029 से पहले विधानसभा चुनाव होने हैं। अगर इन्हें 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ जोड़ा जाता है तो चुनावी कैलेंडर बदलने के लिए उनकी मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल कम करना पड़ सकता है।

यानी 2029 की योजना लागू करने के लिए कम से कम 11 ऐसी विधानसभाओं के चुनाव चक्र में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी को एक ही तरीके से भंग किया जाएगा। कुछ मामलों में संवैधानिक व्यवस्था के तहत कार्यकाल घटाने या दूसरे संक्रमणकालीन विकल्पों पर फैसला हो सकता है।

एक अलग संसदीय विमर्श में यह भी सामने आया है कि देशभर में 2029 का चक्र बनाने के लिए कम से कम 13 विधानसभा कार्यकाल घटाने और कुछ अन्य सदनों के कार्यकाल को समायोजित करने जैसे विकल्पों पर विचार हुआ है।

UP से गुजरात तक किन राज्यों पर पड़ेगा असर?

अगर 2029 वाला मॉडल आगे बढ़ता है तो उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर जैसे राज्यों के चुनावी चक्र को भी बदला जा सकता है। कुछ राज्यों में कार्यकाल करीब दो से तीन साल तक छोटा हो सकता है।

वहीं मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव 2028 के आसपास होने हैं। ऐसे राज्यों के मामले में कार्यकाल को 2029 के लोकसभा चुनाव तक लाने के लिए बड़ा बदलाव करना पड़ेगा।

NDA के मुख्यमंत्रियों ने क्या कहा और विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?

कुछ NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने चुनावों को एक साथ कराने के विचार का समर्थन किया है। गोवा, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों की ओर से संसदीय समिति के सामने सकारात्मक रुख रखा गया है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "अगर राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी समय-सारिणी को एक करने के लिए दिल्ली के कार्यकाल में उचित बदलाव करना पड़े तो दिल्ली सरकार राष्ट्रीय हित में इस पर सकारात्मक तरीके से विचार करेगी।" दिल्ली के मामले में 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराने पर मौजूदा कार्यकाल करीब एक साल छोटा हो सकता है।

कांग्रेस और कई विपक्षी दल इस मॉडल को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, "कांग्रेस वन नेशन, वन इलेक्शन के खिलाफ है। हमारा मानना है कि यह असंवैधानिक, लोकतंत्र विरोधी और जवाबदेही के खिलाफ है।"

विपक्ष की बड़ी आपत्ति यह है कि जनता से चुनी गई किसी विधानसभा का कार्यकाल उसकी तय अवधि से पहले खत्म करना राज्यों की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर असर डाल सकता है। कांग्रेस और डीएमके सांसदों ने 2024 में बिल पेश किए जाने का विरोध किया था। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी समिति के सामने इसका विरोध कर चुके हैं।

One Nation One Election Bill में आखिर क्या प्रस्ताव है?

वन नेशन, वन इलेक्शन' के लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानूनों में संशोधन से जुड़े विधेयक लाए गए हैं। संविधान संशोधन बिल 17 दिसंबर 2024 को तत्कालीन कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में पेश किया था। इसके बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया।

बिल में अनुच्छेद 82, 83, 172 और 327 में बदलाव का प्रस्ताव है। मकसद लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए एक साझा चुनावी चक्र तैयार करना है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली हाईलेवल कमेटी ने भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की थी। यह समिति सितंबर 2023 में बनाई गई थी और उसने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी।

अभी अंतिम फैसला हुआ या सिर्फ प्लानिंग चल रही है?

अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। 'वन नेशन, वन इलेक्शन' से जुड़े दोनों विधेयकों की जांच 41 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति कर रही है। समिति का कार्यकाल बढ़ाकर शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह तक कर दिया गया है।

समिति राज्यों में जाकर मुख्यमंत्री, विधायक, अधिकारी, विशेषज्ञ और दूसरे पक्षों से राय ले रही है। हाल की चर्चाओं में समय से पहले विधानसभा भंग करने, मध्यावधि चुनाव और राज्यों के कार्यकाल को समायोजित करने जैसे संवैधानिक सवाल भी शामिल हैं। चुनाव आयोग ने भी संसदीय समिति के सामने कहा है कि छह महीने का नोटिस मिलने पर वह लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने के लिए तैयार हो सकता है। लेकिन 2029 में यह मॉडल लागू होगा या नहीं, इसका फैसला अभी बाकी है।