रांची14 मिनट पहलेलेखक: अमरेंद्र कुमार
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राज्य के चुनिंदा उच्च शिक्षण संस्थानों में अब रिसर्च और इनोवेशन की शुरुआत ग्रेजुएशन से ही कराने की तैयारी है। मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के नाम पर सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में ‘लिटिल आइंस्टीन क्लब’ बनाए जाएंगे। इसका मकसद विद्यार्थियों को रटने के बजाय क्रिटिकल थिंकिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग और हैंड्स-ऑन लर्निंग से जोड़ना है।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने क्लब स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को पिछले महीने तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मंजूरी दी थी। इसके बाद विभाग ने 74.22 करोड़ रुपए के संभावित खर्च को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि राज्य योजना प्राधिकृत समिति जल्द ही इस पर स्वीकृति दे सकती है। सरकार का मानना है कि राज्य के अधिकांश उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक स्तर पर शुरुआती रिसर्च ट्रेनिंग और शोध की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी शोध पद्धति, वैज्ञानिक अन्वेषण, डेटा संग्रह-विश्लेषण और नवाचार की प्रक्रियाओं से अक्सर स्नातकोत्तर या उससे आगे की पढ़ाई में जुड़ते हैं।
रिसर्च से प्रोटोटाइप तक की ट्रेनिंग
लिटिल आइंस्टीन क्लब के तहत स्नातक विद्यार्थियों के लिए तीन वर्षीय कैरिकुलम-इंटीग्रेटेड कार्यक्रम चलेगा। पहले साल बेसिक रिसर्च स्किल सिखाई जाएगी। दूसरे साल विद्यार्थियों को सामाजिक समस्याओं के समाधान और प्रोटोटाइप विकास से जोड़ा जाएगा। तीसरे साल उन्हें रिसर्च असिस्टेंटशिप का अवसर मिलेगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार इस परियोजना का संचालन झारखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद (जेसीएसटीआई) करेगा। पहले चरण में राज्य के 221 उच्च शिक्षण संस्थानों को इससे जोड़ा जाएगा। इनमें 3 राज्य विश्वविद्यालय, 18 निजी विश्वविद्यालय, 100 राजकीय डिग्री व राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज और 100 सरकारी कॉलेज शामिल हैं।
जानिए...तीन साल में कैसे आगे बढ़ेगा कार्यक्रम
पहले-दूसरे सेमेस्टर: फाउंडेशन कोर्स के तहत ऑनलाइन ‘सर्टिफिकेट बेस्ड रिसर्च एकेडमिक प्रोग्राम’ चलेगा। पहले सेमेस्टर में फाउंडेशनल रिसर्च एप्टीट्यूड और दूसरे में एडवांस्ड रिसर्च एप्टीट्यूड का सर्टिफिकेट मिलेगा। छात्र रिसर्च थिंकिंग, डेटा संकलन और एकेडमिक इंटीग्रिटी सीखेंगे।
तीसरा सेमेस्टर: 100 इच्छुक छात्रों को 5-5 के 20 समूहों में बांटा जाएगा। ये स्थानीय समस्याओं पर काम करेंगे और पोस्टर प्रेजेंटेशन देंगे। इसके लिए संस्थान को 10 हजार और प्रत्येक चयनित समूह को 3 हजार रुपए की वित्तीय सहायता मिलेगी।
चौथा सेमेस्टर: चुने गए 3 सर्वश्रेष्ठ समूहों को मॉडल बनाने के लिए अधिकतम 20 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी।
पांचवां सेमेस्टर: जेसीएसटीआई के जरिए मॉडल्स का फुल-स्केल परीक्षण, इनक्यूबेशन और पेटेंट कराया जाएगा। छात्र फैकल्टी के पेड प्रोजेक्ट्स से भी जुड़ेंगे।
छठा सेमेस्टर: रिसर्च असिस्टेंटशिप के तहत छात्र रिसर्च पेपर और डेटा एनालिसिस का काम करेंगे। राज्य के 25 सर्वश्रेष्ठ रिसर्च असिस्टेंट और 25 बेस्ट वर्किंग मॉडल्स को 20-20 हजार रुपए का नकद पुरस्कार मिलेगा।
निगरानी के लिए 8 सदस्यीय हाई लेवल कमेटी गठित होगी
योजना की पारदर्शिता और मॉनिटरिंग के लिए तकनीकी शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय हाई लेवल कमेटी गठित होगी। उच्च शिक्षा निदेशक इसके सह-अध्यक्ष और जेसीएसटीआई के कार्यकारी निदेशक सदस्य सचिव होंगे। झारखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर योजना के लिए समर्पित वेब पोर्टल विकसित करेगा। झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट एकेडमी डिजिटल सिलेबस, वीडियो लेक्चर और क्वेश्चन बैंक तैयार करेगी। पढ़ाई स्टेट एलएमएस पोर्टल के जरिए होगी।
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