बिहार से यूपी तक...24 घंटे में बिजली गिरने से 13 की मौत, वज्रपात को प्राकृतिक आपदा क्यों नहीं मानती सरकार?

Published on 20 जुल॰ 2026

बिहार से यूपी तक...24 घंटे में बिजली गिरने से 13 की मौत, वज्रपात को प्राकृतिक आपदा क्यों नहीं मानती सरकार?

बिजली गिरने से 24 घंटे में बिहार, यूपी और झारखंड में 13 मौतें हुई हैंImage Credit source: Getty Images

मानसून के साथ उत्तर और मध्य भारत में आकाशीय बिजली फिर जानलेवा साबित हो रही है. पिछले 24 घंटों में बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में बिजली गिरने से 13 लोगों, जिनमें बच्चे और किसान शामिल हैं, की मौत हो गई. इनमें बिहार में 6, उत्तर प्रदेश में 4 और झारखंड में 3 मौतें दर्ज हुईं. संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, 2025 में देशभर में बिजली गिरने से 2,800 से अधिक और 2024 में करीब 2,500 लोगों की मौत हुई थी. हर साल औसतन 2,500-3,000 लोग इसकी चपेट में जान गंवाते हैं. हालांकि, भारत सरकार बिजली गिरने से होने वाली मौतों को प्राकृतिक आपदा से मरना नहीं मानती है. 2023 से कई राज्य इसे प्राकृतिक आपदा घोषित करने की मांग कर रही है, लेकिन इसे अब तक नहीं माना गया है.

बिहार, यूपी और झारखंड में 13 मौत

बिहार (6 मौतें): गया, औरंगाबाद और कैमूर जिलों के ग्रामीण इलाकों में खेत में रोपाई और काम कर रहे किसान अचानक कड़की बिजली का शिकार बने. उत्तर प्रदेश (4 मौतें): पूर्वांचल और बुंदेलखंड के हिस्सों में अचानक आए आंधी-तूफान के बीच पेड़ के नीचे शरण लेने वाले ग्रामीणों पर बिजली गिरी. झारखंड (3 मौतें): संथाल परगना और छोटानागपुर के पठारी क्षेत्रों में मवेशी चराने गए चरवाहे और बच्चे इसकी चपेट में आए.

बाढ़ और तूफान से ज्यादा जानलेवा ‘बिजली’

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्राकृतिक आपदाओं और ‘प्रकृति के प्रकोप’ से होने वाली कुल मौतों में 35% से 40% हिस्सेदारी अकेले आकाशीय बिजली की होती है. यही वजह है कि हर साल बिजली गिरने से बाढ़, तूफान, लू और भूस्खलन जैसी कई अन्य प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में अधिक लोगों की जान जाती है. देश में हर वर्ष औसतन 2,000 से 2,500 से ज्यादा लोगों की मौत आकाशीय बिजली की चपेट में आने से होती है. इन घटनाओं के सबसे ज्यादा शिकार ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसान, खेतिहर मजदूर, चरवाहे और खुले आसमान के नीचे काम करने वाले लोग बनते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान वे लंबे समय तक खुले मैदानों में रहते हैं.

सरकार आकाशीय बिजली को प्राकृतिक आपदा क्यों नहीं मानती?

1. सरकार का तर्क: जागरूकता से रोकी जा सकती हैं मौतें

केंद्र सरकार का कहना है कि आकाशीय बिजली चक्रवात या भूकंप जैसी व्यापक आपदा नहीं, बल्कि स्थानीय और अल्पकालिक घटना है. सरकार का कहना है कि अर्ली वार्निंग सिस्टम, मौसम अलर्ट और जागरूकता से अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है, इसलिए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की जरूरत नहीं है.आपदा प्रबंधन मंत्रालय का मानना है कि यदि लोग खराब मौसम के दौरान खुले मैदान या पेड़ों के नीचे जाने से बचें, तो जनहानि काफी हद तक कम हो सकती है.

2. संसद में भी उठ चुका है मुद्दा

वर्ष 2024 में सांसद वी.के. श्रीकंदन ने लोकसभा में प्राइवेट मेंबर बिल के जरिए आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में शामिल करने की मांग उठाई थी. बिल में बिजली गिरने से मौत, चोट और संपत्ति के नुकसान पर अलग कानून बनाकर मुआवजा और पुनर्वास का प्रस्ताव रखा गया था. बिल में बिजली गिरने से मौत पर परिजनों को कम से कम 10 लाख रुपये का मुआवजा, एक आश्रित को नौकरी, घायलों का मुफ्त इलाज, पुनर्वास और फसल, पशुधन और संपत्ति के नुकसान की भरपाई का प्रस्ताव दिया गया था. हालांकि, संसदीय चर्चा के दौरान केंद्र सरकार ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने से इनकार किया.

3. बड़ा कारण आर्थिक बोझ भी

यदि आकाशीय बिजली को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाता है, तो राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के नियमों के तहत मुआवजे का बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार को वहन करना पड़ेगा. सामान्य राज्यों में यह हिस्सेदारी 75% और पूर्वोत्तर राज्यों में 90% तक होती है. यानी केंद्र सरकार को हर साल हजारों पीड़ितों के लिए मुआवजा, पुनर्वास और नुकसान की भरपाई पर भारी खर्च उठाना पड़ेगा. निजी सदस्य विधेयक के वित्तीय ज्ञापन में भी अनुमान लगाया गया था कि इस व्यवस्था पर करीब 1,000 करोड़ रुपये सालाना और 5,000 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च आ सकता है.

4. हर साल बढ़ सकता है सैकड़ों करोड़ रुपये का खर्च

देश में हर वर्ष हजारों लोग आकाशीय बिजली की चपेट में आते हैं. यदि इसे राष्ट्रीय आपदा का दर्जा मिल जाता है, तो मौतों के अलावा पशुधन और फसल नुकसान के लिए भी मुआवजा देना होगा. इससे केंद्र सरकार पर हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है.

बिजली गिरने से कैसे बचा जा सकता है?

1. गरज सुनते ही सुरक्षित जगह पर पहुंचें

बिजली की गड़गड़ाहट सुनाई दे या आसमान में चमक दिखाई दे, तो तुरंत किसी पक्के मकान या बंद जगह में चले जाएं. खुले मैदान, खेत, छत और ऊंची जगहों पर बिल्कुल न रुकें.

2. पेड़, बिजली के खंभे और धातु की चीजों से दूर रहें

बारिश के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा होना सुरक्षित नहीं होता. इसके अलावा बिजली के खंभे, लोहे की बाड़, ट्रैक्टर, बाइक, साइकिल और अन्य धातु की वस्तुओं से दूरी बनाए रखें, क्योंकि इनमें बिजली का प्रवाह हो सकता है.

3. घर के अंदर भी सावधानी बरतें

बिजली चमकने के दौरान तार वाले फोन, टीवी, कंप्यूटर, फ्रिज जैसे बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल न करें. नल, शॉवर या पानी के संपर्क से भी बचें, क्योंकि बिजली पाइपों के जरिए भी फैल सकती है.

4. खुले में फंस जाएं तो यह करें

यदि सुरक्षित जगह तक पहुंचना संभव न हो, तो जमीन पर सीधे लेटने की बजाय दोनों पैरों को जोड़कर नीचे झुक जाएं और सिर को घुटनों के बीच रखें. इससे बिजली के करंट का असर कम हो सकता है. किसी पेड़ या ऊंची वस्तु के नीचे शरण लेने की गलती न करें.

5. मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज न करें

भारतीय मौसम विभाग (IMD) की चेतावनियों और दामिनी जैसे लाइटनिंग अलर्ट ऐप पर नजर रखें. अलर्ट मिलते ही खेतों, नदी-तालाबों और खुले इलाकों से तुरंत निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाएं. बिजली चमकने के कम से कम 30 मिनट बाद ही दोबारा खुले में जाएं.

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विशाल मैथिल

विशाल मैथिल

भोपाल के रहने वाले हैं. कम्प्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन और मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद डिजिटल मीडिया में कदम रखा. दैनिक भास्कर से शुरुआत हुई. इसके बाद टाइम्स नाउ नवभारत और अमर उजाला जैसे संस्थान में टेक जर्नलिस्ट के दौर पर करने के बाद TV9 भारतवर्ष से जुड़े हैं. सोशल मीडिया कैंपेन को लीड करने और हिंदी मैग्जीन में भी काम करने का मौका मिला. फिलहाल टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और स्मार्टफोन की खबरें आप तक आसान भाषा में पहुंचाने का काम कर रहे हैं. गैजेट्स कंपेरिजन, गैजेट्स रिव्यूज और मोबाइल रिचार्ज जैसे टॉपिक्स पर भी अच्छी पकड़ रखते हैं. रिसर्च, एक्‍सप्‍लेनर, डाटा स्‍टोरी और इंफोग्राफिक्स के साथ जटिल खबरों को आसानी से कहने और टेक जगत की छोटी-बड़ी अपडेट आप तक पहुंचाने का हुनर रखते हैं. गैजेट्स के अलावा किताबों और म्यूजिक में भी खूब मन लगता है.

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