
संत बन चुके पूर्व CRPF जवान की फिर हुई सेवा में वापसी.
Morena News: जीवन कई बार इंसान को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होती, लेकिन अगर दिल में देशभक्ति का जुनून और न्याय पाने की जिद्द हो तो समय का कोई भी चक्र इंसान के हौसले को नहीं तोड़ सकता. मुरैना जिले से एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है. छिछावली गांव निवासी गिरवर सिंह तोमर (54), जिन्हें 26 साल पहले CRPF से बर्खास्त कर दिया गया था और जिन्होंने हताशा में संत का जीवन अपना लिया था, अब एक बार फिर अपनी वही खाकी वर्दी पहनकर देश सेवा में तैनात होने जा रहे हैं.
गिरवर सिंह तोमर को बचपन से ही देश सेवा करने का जुनून था. कड़ी मेहनत और लगन के बल पर वर्ष 1991 में उनका चयन CRPF में हवलदार (हेड कांस्टेबल) के पद पर हुआ था. लगभग आठ वर्षों तक उन्होंने बेहद निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दीं. हालांकि, सेवा के दौरान ही एक वरिष्ठ अधिकारी से हुए विवाद के बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाई गई और 21 अक्टूबर 1999 को उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया.
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बारहद्वारी मंदिर में ले ली शरण
अचानक नौकरी चले जाने से गिरवर सिंह गहरे मानसिक तनाव में आ गए. कुछ समय तक परिजनों के साथ रहने के बाद उन्होंने सांसारिक जीवन से दूरी बना ली और गांव से एक किलोमीटर दूर बारहद्वारी मंदिर में शरण ले ली. वहां चार-पांच साल बिताने के बाद वे मुरैना के प्रसिद्ध गुफा मंदिर चले गए. धीरे-धीरे उनका जीवन पूरी तरह अध्यात्म में रम गया और मंदिर के मुख्य पुजारी ने उन्हें गिरवरदास महाराज का नया नाम दिया.
इलाहाबाद हाई कोर्ट में लड़ी लड़ाई
भले ही गिरवरदास महाराज ने साधु का चोला पहन लिया था, लेकिन उनके भीतर बैठा सिपाही कभी शांत नहीं हुआ. उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के फैसले को अन्यायपूर्ण मानते हुए 1999 में ही इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. वर्ष 2007 में एकल पीठ ने उनके पक्ष में निर्णय सुनाया, लेकिन विभाग द्वारा स्टे लेने के कारण मामला डबल बेंच में चला गया. फिर भी गिरवर सिंह ने हार नहीं मानी और वर्षों तक अपनी लड़ाई जारी रखी.
कोर्ट के आदेश पर बहाल हुई सेवा
28 अगस्त 2025 को कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए CRPF को तीन महीने के भीतर गिरवर सिंह को पुनः नियुक्ति देने का स्पष्ट निर्देश दिया. आखिरकार, कानूनी अड़चनों को पार करते हुए 26 अगस्त 2026 को CRPF ने उन्हें सेवा में बहाल करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया.
बीजापुर में मिली नई तैनाती
26 साल लंबे चले इस कानूनी संघर्ष के बाद अब गिरवर सिंह को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में नई पोस्टिंग दी गई है. ढलती उम्र के इस पड़ाव पर भगवा वस्त्र त्यागकर फिर से खाकी वर्दी पहनने की यह कहानी केवल एक नौकरी की बहाली भर नहीं है, बल्कि यह अटूट धैर्य, न्याय प्रणाली पर विश्वास और देश सेवा के प्रति कभी न मरने वाले जुनून की एक मिसाल है.
एयरफोर्स में है बेटा
बात करें गिरवर सिंह तोमर के परिवार की तो उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं. दोनों बेटियों की शादी हो गई है. एक बेटा एयरफोर्स में जवान है. दूसरा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है. कानूनी जीत के बाद परिवार में खुशी की लहर है. फिलहाल गिरवर सिंह तोमर की उम्र इस समय 54 साल है. अभी भी वह 6 साल तक CRPF में अपनी सेवा दे सकेंगे.

शिव चौबे
शिव चौबे को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक का अनुभव है. शिव ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संस्कृत विषय में शिक्षा प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक अखबार से की. इसके बाद वर्ष 2019 में वे ETV भारत से बतौर संवाददाता जुड़े, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और शिक्षा से जुड़ी उनकी कई महत्वपूर्ण रिपोर्टों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जान जोखिम में डालकर जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की और व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया. उनकी रिपोर्ट्स के बाद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़े. वर्ष 2021 में शिव चौबे ने TV9 भारतवर्ष में जिला रिपोर्टर के रूप में नई भूमिका की शुरुआत की. इसके बाद वर्ष 2023 में वे PTI (Press Trust of India) से जुड़े. यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण खोजी रिपोर्टें कीं, जिनमें सिवनी जिले का चर्चित सर्पदंश घोटाला, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय से जुड़ा गोबर घोटाला तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई घोटाले शामिल है. इसके अलावा उन्होंने CAA के दौरान लगे कर्फ्यू, बरगी क्रूज हादसे और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की जमीनी रिपोर्टिंग कर अपनी अलग पहचान बनाई. निष्पक्ष, जनसरोकारों से जुड़ी और खोजी पत्रकारिता के लिए शिव चौबे को विशेष रूप से जाना जाता है.
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