कल्पना कीजिए, जिस ट्रेन में एक साथ 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं, उसमें पूरे रास्ते कभी 40 तो कभी 60 यात्री ही बैठे हों. देश की इकलौती हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन फिलहाल कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखा रही है. हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चल रही इस ट्रेन में यात्रियों की संख्या इतनी कम रह रही है कि रेलवे को इसके रूट को एक्सटेंड करना पड़ रहा है. अब भारतीय रेल हाइड्रोजन ट्रेन में यात्री की संख्या बढ़ाने के लिए इसे दिल्ली तक ले आने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, इसके रास्ते में कुछ तकनीकी और संचालन से जुड़ी चुनौतियां भी हैं.
यह हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत सेक्शन पर चल रही है. अधिकारियों के मुताबिक, 2,600 यात्रियों की क्षमता वाली इस ट्रेन में जींद से सोनीपत तक के पूरे सफर में आमतौर पर सिर्फ 40 से 60 यात्री ही मिलते हैं. कम यात्रियों की वजह से ट्रेन रोज सिर्फ एक आने-जाने का फेरा लगा रही है. शुरुआती योजना के मुताबिक इसे जींद और सोनीपत के बीच रोज दो फेरे लगाने थे. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, नॉर्दर्न रेलवे पिछले करीब दो महीनों से इस ट्रेन का संचालन कर रहा है. ट्रेन के संचालन और नई तकनीक पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भी लगातार काम कर रही है.
दिल्ली तक क्यों बढ़ाना चाहता है रेलवे?
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कम फुटफॉल को देखते हुए रेलवे अब इस ट्रेन को दिल्ली के आजादपुर स्टेशन तक ले जाने के विकल्प पर काम कर रहा है. आजादपुर दिल्ली का प्रमुख थोक फल और सब्जी बाजार है. रेलवे का मानना है कि अगर ट्रेन दिल्ली तक पहुंचती है तो यात्रियों के लिए इसका इस्तेमाल ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है. स्थानीय लोग भी लंबे समय से ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल रेलवे इस विस्तार से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रहा है. अंतिम फैसला सुरक्षा, तकनीकी जरूरतों और संचालन की व्यवहारिकता को देखने के बाद लिया जाएगा.
17 जुलाई को शुरू हुई थी हाइड्रोजन ट्रेन
भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत 17 जुलाई को हुई थी. यह ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी है. इसे रेलवे की क्लीन और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी की दिशा में एक अहम कदम बताया गया था. हाइड्रोजन ट्रेन में डीजल इंजन की तरह सीधे डीजल का इस्तेमाल नहीं होता. इसमें हाइड्रोजन से बिजली बनाई जाती है, जो ट्रेन को चलाने के लिए इस्तेमाल होती है. इसी वजह से इसे कम प्रदूषण वाली रेल तकनीक के तौर पर देखा जाता है. रेलवे के मुताबिक, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो हाइड्रोजन बेस्ड रेल ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं.
इस रूट पर कम यात्रियों की समस्या नई नहीं है. रेलवे कर्मचारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन से पहले इसी रूट पर चलने वाली डेमू ट्रेन में भी यात्रियों की संख्या काफी कम रहती थी. फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन के अलावा इस रूट पर 3 दूसरी डेमू ट्रेनें भी चल रही हैं. लेकिन इनमें भी बहुत ज्यादा भीड़ नहीं होती. रेलवे से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि जींद और सोनीपत के बीच रोजाना दफ्तर जाने वाले यात्रियों और विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या कम है. यही वजह है कि ट्रेनों को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे हैं.
ट्रेन को दिल्ली तक ले जाने में क्या है परेशानी
हाइड्रोजन ट्रेन का रूट दिल्ली तक बढ़ाने का विचार आसान जरूर लगता है, लेकिन रेलवे के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं. यह हाइड्रोजन ट्रेन 10 कोच की है और इसमें करीब 2,600 यात्रियों के बैठने की क्षमता है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली से चलने वाली ट्रेनों में ज्यादा यात्रियों को ले जाने के लिए आमतौर पर 18-20 या उससे ज्यादा कोच की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा दिल्ली के व्यस्त रेल नेटवर्क में पहले से ही ट्रेनों की आवाजाही काफी ज्यादा है. ऐसे में नई ट्रेन के लिए ट्रैक की उपलब्धता और समय तय करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
एक टैंक में 250-300 किमी तक चलती है ट्रेन
ईंधन के मामले में फिलहाल बड़ी समस्या नहीं बताई जा रही है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन एक बार टैंक पूरी तरह भरने के बाद करीब 250 से 300 किलोमीटर तक चल सकती है. दिल्ली और जींद के बीच दूरी करीब 130 किलोमीटर है. यानी दूरी के हिसाब से ट्रेन एक टैंक में यह सफर कर सकती है. हालांकि, अभी ट्रेन में हाइड्रोजन भरने की सुविधा सिर्फ जींद में है. ऐसे में दिल्ली तक सेवा बढ़ाने पर ईंधन भरने की व्यवस्था और ट्रेन के संचालन की योजना को भी ध्यान में रखना होगा.
पानीपत-सफीदों रूट का विकल्प भी सुझाया
स्थानीय लोगों के बीच ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने की मांग है, लेकिन अगर दिल्ली रूट में संचालन संबंधी दिक्कतें आती हैं तो एक दूसरा विकल्प भी सुझाया गया है. स्थानीय यात्रियों का कहना है कि ट्रेन को सोनीपत से पानीपत और फिर सफीदों होते हुए जींद तक चलाया जा सकता है. इससे एक सर्किट तैयार हो जाएगा. पानीपत एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस रूट से रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है और ट्रेन का इस्तेमाल भी बेहतर हो सकता है. इस प्रस्ताव के मुताबिक ट्रेन जींद से चलकर सोनीपत, पानीपत और सफीदों होते हुए वापस जींद पहुंच सकती है. इस तरह करीब 180 किलोमीटर का एक सर्किट बन सकता है.
सुरक्षा के लिहाज से अभी कोई जल्दबाजी नहीं
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन ट्रेन नई तकनीक पर आधारित है, इसलिए इसके विस्तार को लेकर जल्दबाजी नहीं की जाएगी. विशेषज्ञों की टीम ट्रेन के मौजूदा संचालन के साथ-साथ दिल्ली तक विस्तार के लिए किए जा रहे ट्रायल और तकनीकी पहलुओं पर नजर रख रही है. रेलवे के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है. यानी फिलहाल रेलवे के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 2,600 सीटों वाली ट्रेन में 40-60 यात्री क्यों मिल रहे हैं, बल्कि यह भी है कि ज्यादा यात्रियों तक पहुंचने के लिए इसका रूट कैसे बदला जाए. दिल्ली तक विस्तार एक विकल्प है, जबकि पानीपत-सफीदों वाला सर्किट दूसरा रास्ता हो सकता है. अंतिम फैसला इन सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद लिया जाएगा.
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