महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े मामले में जिओमार्ट और संबंधित विक्रेता को उपभोक्ता को राशि लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने उत्पाद की कीमत 13,596 रुपए 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित, मानसिक परेशानी के ल
.
मामला नारनौल के हुडा सेक्टर-1 निवासी हार्दिक गर्ग की ओर से दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार नवंबर 2024 में उन्होंने पारिवारिक कार्यक्रम के लिए जिओमार्ट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से कॉपर वाटर डिस्पेंसर सेट खरीदे थे। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पाद को GG Copper 5L Hammered Copper Water Dispenser Pot Set with Copper Glass with Stand के रूप में दर्शाया गया था।
इसमें कॉपर डिस्पेंसर, कॉपर ग्लास और स्टैंड शामिल होने की जानकारी दी गई थी।

उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के ऑर्डर की कॉपी।
27 सेट का दिया था ऑर्डर
शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसे 27 सेट का ऑर्डर दिया। सामान मिलने के बाद उन्होंने पाया कि कई सेट अधूरे थे और उनमें जरूरी सामान, जिसमें कॉपर ग्लास और स्टैंड शामिल थे, मौजूद नहीं थे। इसके बाद उन्होंने जिओमार्ट से सामान वापस लेने और रकम लौटाने की मांग की।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बार-बार शिकायत और संपर्क करने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की।
दोनों पक्ष आयोग में नहीं हुए पेश
आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, शिकायत 10 सितंबर 2025 को दायर की गई थी और अब इस पर फैसला सुनाया गया। आयोग ने जिओमार्ट और संबंधित कंपनी को नोटिस जारी किया था, लेकिन उनके प्रतिनिधि आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए। इसके बाद मामले में एकतरफा कार्रवाई की गई।
आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ता के साक्ष्यों पर विचार करने के बाद माना कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बताए गए उत्पाद के अनुसार जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन सामान अधूरा मिला। शिकायतकर्ता की ओर से रिफंड की मांग किए जाने के बावजूद समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया।
45 दिन में करनी होगी भुगतान की पालना
आयोग के सदस्य डीएम यादव ने आदेश में जिओमार्ट और संबंधित पक्षों को 13,596 रुपए 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक परेशानी और परेशानी के लिए 5 हजार रुपए तथा मुकदमे के खर्च के लिए 5 हजार रुपए अलग से देने होंगे। आदेश की पालना प्रति प्राप्त होने के 45 दिन के भीतर करनी होगी।
आयोग ने यह भी कहा है कि निर्धारित अवधि में आदेश की पालना नहीं होने पर शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत आगे कार्रवाई के लिए आवेदन कर सकता है।