जावेद अख्तर : 27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचा था, फुटपाथ पर सोया 3 दिन भूखा रहा | Javed Akhtar: I arrived in Mumbai with 27 paise, slept on the footpath and went hungry for three days.

Published on 4 अक्टू॰ 2026

मुंबई, भारतीय सिनेमा के सबसे मशहूर लेखकों और गीतकारों में गिने जाने वाले जावेद अख्तर ने अपने करियर की शुरुआत बेहद मुश्किल हालातों में की थी। उनकी पत्नी और मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी ने जावेद अख्तर के संघर्ष भरे दिनों को याद किया। उन्होंने एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए उन दिनों की कहानी बताई, जब वह सिर्फ बड़े सपनों के सहारे मुंबई में टिके हुए थे।

शबाना आजमी ने अपने पोस्ट में लिखा, ''4 अक्टूबर 1964 को महज 19 साल की उम्र में जावेद अख्तर मुंबई के बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचे थे। उनकी जेब में सिर्फ 27 पैसे थे, लेकिन आंखों में बड़े सपने थे। मुंबई में अपनी पहचान बनाने की कोशिश के दौरान उन्हें कई मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा। उन्होंने कई दिनों तक फुटपाथ पर रातें बिताईं। कई बार उन्हें रेलवे स्टेशन और अलग-अलग स्टूडियो के परिसर में सोना पड़ा। उनके पास रहने के लिए कोई तय जगह नहीं थी। हालात इतने खराब हो गए थे कि एक समय ऐसा भी आया जब वह लगातार तीन दिनों तक कुछ खा नहीं पाए।''

शबाना के कहा, ''उस वक्त जावेद के पास पहनने के लिए भी ज्यादा कपड़े नहीं थे। उनके पास जो कपड़े थे, वह भी बेहद खराब हालत में थे। ऐसे हालात में किसी के लिए भी हिम्मत बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जब वह पूरी तरह निराशा के करीब पहुंच गए थे और उनके सामने हार मान लेने का विकल्प था, तब उन्होंने खुद को समझाया कि वह इस तरह मरने के लिए पैदा नहीं हुए हैं और एक दिन ये मुश्किल वक्त जरूर बदलेगा। वक्त के साथ उनकी यह बात सच साबित हुई।''

शबाना ने कहा, ''कुछ सफर लगभग कुछ भी न होने से शुरू होते हैं, बस एक सपना होता है। मेरी लोगों से अपील है कि आप कभी हार न माने। अगर जावेद अख्तर अपने हालात बदल सकते हैं, तो कोई भी ऐसा कर सकता है।''

बता दें कि जावेद अख्तर ने भारतीय सिनेमा में अपनी एक बेहद खास पहचान बनाई। सलीम खान के साथ उनकी जोड़ी 'सलीम-जावेद' के नाम से मशहूर हुई। इस जोड़ी ने 1970 और 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा को कई ऐसी फिल्में दीं, जिन्होंने कहानी कहने के तरीके को बदल दिया। 'जंजीर', 'दीवार', 'शोले' और 'डॉन' जैसी फिल्मों की सफलता में सलीम-जावेद की लेखनी की बड़ी भूमिका रही। बाद में जावेद अख्तर ने गीतकार और शायर के तौर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई और हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए।

शबाना आजमी और जावेद अख्तर ने 9 दिसंबर 1984 को शादी की थी।