
नागरमल बाजोरिया. (फाइल फोटो)
भागलपुर के प्रसिद्ध जनसेवक नागरमल बाजोरिया, जिन्हें दुनिया धरतीपकड़ के नाम से जानती थी, अब हमारे बीच नहीं रहे. गुरुवार को पटना में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली. 280 बार चुनावी मैदान में उतरने वाले बाजोरिया भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी तरह के इकलौते शख्स थे. उनके निधन की खबर से भागलपुर समेत पूरे बिहार में शोक की लहर दौड़ गई है.
नागरमल बाजोरिया का चुनावी सफर किसी अजूबे से कम नहीं रहा. उन्होंने देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद से लेकर विभिन्न राज्यों के आम चुनावों तक, हर निर्वाचन में अपना नामांकन दाखिल किया. यहां तक कि जहां भी भारतीय नागरिकों को अनुमति मिली, उन्होंने कुछ अंतरराष्ट्रीय चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमाई. हर बार जमानत जब्त हुई, लेकिन हार के इस सिलसिले ने कभी उनके हौसले को नहीं तोड़ा. बिना किसी आर्थिक चिंता या दायरे के उन्होंने हर चुनाव को एक उत्सव की तरह लड़ा.
‘धरती पकड़’ की उपाधि
सोशल मीडिया के दौर से बहुत पहले ही नागरमल बाजोरिया अपनी मिलनसार कार्यशैली और सामाजिक मुद्दों को बेबाकी से उठाने के लिए देशभर के मीडिया में छाए रहते थे. लगातार हारने के बावजूद उनके चेहरे की मुस्कान और लोकतंत्र के प्रति उनका गजब का जुनून ही उन्हें सही मायनों में ‘धरती पकड़’ की उपाधि दिलाता था.
भारतीय राजनीति की अनूठी मिसाल
नागरमल बाजोरिया भारतीय राजनीति की एक ऐसी अनूठी और जीवट मिसाल थे, जिन्होंने हार-जीत की परवाह किए बिना पंचायत से लेकर राष्ट्रपति पद तक 280 से अधिक चुनाव लड़े. उन्होंने देश के कई बड़े राजनेताओं को चुनौती दी, जिसमें उत्तर प्रदेश के रायबरेली से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अमेठी से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतरना शामिल था.

96 साल की आयु में निधन
वर्ष 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में भी उन्होंने यूपीए प्रत्याशी प्रणब मुखर्जी के सामने अपनी दावेदारी पेश की थी. हर चुनाव में भले ही उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके अटूट मनोबल ने उन्हें हमेशा चर्चा के केंद्र में रखा. हाल ही में 96 साल की आयु में पटना में उनका निधन हो गया, जिसके साथ ही चुनावी राजनीति के एक अनोखे अध्याय का अंत हो गया.
समाजसेवा से भी गहरा नाता
बाजीरिया का व्यक्तित्व केवल चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका समाजसेवा से भी गहरा और संवेदनशील नाता था. भागलपुर शहर में जब भयंकर पेयजल संकट पैदा हुआ, तब उन्होंने अपने निजी खर्च से जगह-जगह नलकूप (चापाकल) लगवाकर जनसेवा की मिसाल पेश की. जमीन से पानी निकालने की इस पहल और हमेशा माटी से जुड़े रहने के उनके स्वभाव के कारण ही लोगों ने उन्हें प्यार से ‘धरती पकड़’ नाम दिया, जो जीवनभर उनकी मुख्य पहचान बना रहा. अपने अंतिम पड़ाव तक बेफिक्र और जुझारू मिजाज के धनी रहे नागरमल बाजोरिया की यह अटूट जीवटता भारतीय जनमानस में हमेशा याद रखी जाएगी.

बरारी शमशान घाट पर होगा अंतिम संस्कार
वे अपने पीछे चार बेटों सतीश, अजय, दिलीप और एक बेटी सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. उनका पार्थिव शरीर भागलपुर स्थित उनके पैतृक आवास एमपी त्रिवेदी निवास लाया गया है, जहां शुक्रवार सुबह 8 बजे उनका अंतिम संस्कार भागलपुर के बरारी शमशान घाट पर किया जाएगा. लोकतंत्र के इस अनोखे और अनमोल सितारे की कमी हमेशा खलती रहेगी.

शिवम
घूमने का शौक, The-VOB , Daily hunt न्यूज़ में 3 साल से ज्यादा के काम का अनुभव.
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