Jul 30, 2026 06:52 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
Underneat के को-फाउंडर विमर्श रजदान ने 3 करोड़ की नौकरी छोड़कर एक साल दुनिया घूमी। उनकी कहानी की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा है।

विमर्श रजदान
कभी-कभी जिंदगी में सबसे बड़ा फैसला वही होता है जिसे बाकी लोग पागलपन कहते हैं। अभिनेत्री कुशा कपिला के शेपवियर ब्रांड Underneat के को-फाउंडर विमर्श रजदान की कहानी कुछ ऐसी ही है। एक ऐसी नौकरी छोड़ना जो सालाना 3 करोड़ रुपये का पैकेज देती थी, आसान फैसला नहीं होता। लेकिन विमर्श ने यही किया और आज वह इसे अपनी जिंदगी का सबसे सही कदम मानते हैं।
13 साल तक सिर्फ सोने के लिए घर जाते थे
गुरुवार सुबह लिंक्डइन पर शेयर किए एक पोस्ट में विमर्श रजदान ने अपनी पुरानी जिंदगी का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि वह लगातार 13 साल तक बेहद कठिन शेड्यूल में काम करते रहे। रोज 18 से 20 घंटे तक ऑफिस या काम में डूबे रहना उनके लिए आम बात बन चुकी थी। हालत यह थी कि वह घर सिर्फ सोने के लिए जाते थे, बाकी पूरा वक्त काम में ही निकल जाता था। रजदान ने अपनी पोस्ट में लिखा, "13 साल तक मैं सिर्फ सोने के लिए घर जाता था। मैं रोज 18-20 घंटे काम करता था, और यह मेरे लिए सामान्य हो गया था।" फिर एक दिन आया जब उन्होंने यह सब पीछे छोड़ने का फैसला ले लिया। जिस पैकेज और करियर की रफ्तार के लिए लोग तरसते हैं, उसे विमर्श ने बिना किसी हिचकिचाहट के अलविदा कह दिया।
लोगों ने कहा पागलपन
रज़दान ने बताया कि जब उन्होंने इतने भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरी छोड़ने का ऐलान किया, तो कई लोगों ने उन्हें "क्रेजी" करार दिया। किसी को लगा कि वह अपनी मेहनत से बनाई गई करियर की रफ्तार यूं ही गंवा रहे हैं। लेकिन विमर्श ने इन बातों को नजरअंदाज करते हुए अपने फैसले पर कायम रहने की ठानी। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, "फिर एक दिन मैंने बस... सब कुछ छोड़ दिया। एक साल का वक्त निकाला और आइसलैंड, क्रोएशिया, पेरिस और जितनी भी जगहें मुझे मिल सकीं, वहां घूमने निकल पड़ा।" यूरोप के अलग-अलग कोनों में बिताया वह एक साल उनकी सोच के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। काम की भागदौड़ से दूर, नई जगहों, नई संस्कृतियों और खुद के साथ बिताए गए इस वक्त ने उनकी जिंदगी देखने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया।
वापसी के बाद बदल गया काम करने का तरीका
दिल्ली के NIFT से पढ़ाई करने और बाद में IIM कलकत्ता से एमबीए करने वाले विमर्श रजदान ने बताया कि जब वह एक साल बाद वापस काम पर लौटे, तो उन्होंने पहले जैसा तरीका नहीं अपनाया। अपने पोस्ट में राजदान लिखते हैं, "लोगों ने कहा था कि मैं अपनी मोमेंटम गंवा रहा हूं। लेकिन उस साल ने मेरे लिए वो चक्र तोड़ दिया।" रजदान के मुताबिक, वापस आने के बाद उन्होंने खुद को हद से ज्यादा काम में झोंकने की बजाय आराम, सोचने के लिए वक्त और अपने आसपास ऐसे लोगों को तरजीह देना शुरू किया जो असल में जिम्मेदारी उठा सकें। उन्होंने लिखा, "जब मैं वापस आया, तो मैंने पहले जैसा नहीं बनाया। मैंने ग्राइंड के लिए ऑप्टिमाइज करना बंद कर दिया और आराम, सोचने के वक्त, और अपने आसपास सही लोगों के लिए ऑप्टिमाइज करना शुरू किया।"
विमर्श के मुताबिक, इस एक साल की यात्रा ने उन्हें यह सोचने का मौका दिया कि वह असल में क्या बनाना चाहते हैं और किसके साथ मिलकर बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसी स्पष्टता ने उन्हें अपने बाकी दो बिजनेस खड़े करने में मदद की। गौरतलब है कि विमर्श रजदान फैशन और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में करीब दो दशकों का अनुभव रखते हैं। उन्होंने अपने करियर में मार्क्स एंड स्पेंसर, गैप और कैल्विन क्लाइन जैसे कई बड़े ग्लोबल ब्रांड्स के साथ काम किया है। इसके अलावा उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक और बिजनेस भी खड़ा किया था, जिसे उन्होंने घर से शुरू करके 80 से ज्यादा कर्मचारियों तक पहुंचाया। रजदान की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर लोगों को खूब पसंद आई है। पोस्ट के कमेंट सेक्शन में एक यूजर ने लिखा, "कभी-कभी दूरी वह नजरिया देती है, जो लगातार काम में डूबे रहना कभी नहीं दे सकता।"
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwari
शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव
