एलआईटी के 3 ऑपरेटरों से बकाया सेलरी की होगी वसूली: पंजाब सरकाार ने जारी किया शो कॉज नोटिस, सेलरी में गड़बड़ी पर मांगा जवाब - Ludhiana News

Published on 21 अग॰ 2026

पंजाब सरकार ने लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (LIT) में तैनात तीन कंप्यूटर ऑपरेटरों पर शिकंजा कस दिया है। राज्य सरकार ने ट्रस्ट प्रशासन को सख्त निर्देश जारी करते हुए ऑपरेटरों संदीप शर्मा, तरनजीत सिंह और सुखदेव सिंह को शोकॉज नोटिस जारी करने और उनके खातो

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यह पूरा मामला वेतनमान में गलत संशोधन और उसके आधार पर वर्षों तक ज्यादा सैलरी दिए जाने से जुड़ा है। स्थानीय निकाय विभाग के 13 अगस्त के आदेश के बाद यह कार्रवाई की जा रही है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के सख्त रुख के बाद सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वसूली से पहले तीनों कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। LIT के कार्यकारी अधिकारी (EO) हरिंदर सिंह ने बताया कि मामला लेखा शाखा को सौंप दिया गया है और सैलरी रिकॉर्ड की जांच के बाद वसूली जाने वाली अंतिम राशि तय होगी।

कंप्यूटर ऑपरेटर को ज्यादा सेलरी देने से लेकर वसूली तक की पूरी कहानी जानिए..

  • सेलरी में गड़बड़ी और गलत पे-स्केल का खेल: यह पूरा मामला कंप्यूटर ऑपरेटरों के निर्धारित पे-स्केल और उन्हें दिए गए संशोधित वेतनमान के बीच के बड़े अंतर से शुरू होता है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद का मूल वेतनमान 1,800-3,200 रुपये निर्धारित किया गया था। पंजाब सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 1998 लागू होने के बाद वेतन ढांचे में बदलाव हुआ, और 5वें पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत इसे 5,910-20,200 रुपये (प्लस 1,900 रुपये ग्रेड पे) में परिवर्तित किया जाना था। लेकिन सेवा रिकॉर्ड की जांच में पाया गया कि इन ऑपरेटरों को नियमों से परे जाकर 10,300-34,800 रुपये प्लस 4,400 रुपये ग्रेड पे का स्केल दे दिया गया। इस भारी अंतर के कारण ऑपरेटरों को हर महीने उनकी वास्तविक पात्रता से कहीं अधिक सैलरी का भुगतान होता रहा, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ।
  • हाईकोर्ट की एंट्री और नेचुरल जस्टिस का नियम: जब स्थानीय निकाय विभाग को इस वित्तीय अनियमितता का अहसास हुआ, तो उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई के वेतनमान घटाने और सीधे वसूली करने की तैयारी शुरू कर दी। विभाग के इस फैसले के खिलाफ प्रभावित कर्मचारियों ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल कर दी। मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत ‘प्राकृतिक न्याय’ को रेखांकित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही राज्य सरकार की नजर में कर्मचारी अपनी पात्रता से अधिक वेतन प्राप्त कर रहे थे, फिर भी उन्हें बिना कारण बताओ नोटिस दिए और बिना उनका पक्ष सुने वेतनमान में कटौती या वसूली नहीं की जा सकती। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर फैसला दिए बिना याचिका का निपटारा कर दिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कर्मचारियों के तर्कों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।
  • स्थानीय निकाय विभाग का आदेश : उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए स्थानीय निकाय विभाग ने अबनया विस्तृत आदेश जारी किया। इस आदेश में आठ कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा की गई थी, जिनमें से लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के तीन कंप्यूटर ऑपरेटर संदीप शर्मा, तरनेजीत सिंह और सुखदेव सिंह पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए। सरकारी निर्देश के बाद एलआईटी के कार्यकारी अधिकारी (EO) हरिंदर सिंह ने मामला तुरंत एंप्लॉयीज की पे-रोल और अकाउंट्स ब्रांच को फॉरवर्ड कर दिया।
  • अकाउंट्स ब्रांच करेगी ऑडिट: आदेश के अनुसार, सरकारी चिंताओं के बावजूद फिलहाल वसूली की कोई निश्चित राशि तय नहीं की गई है। अकाउंट्स ब्रांच अब तीनों ऑपरेटरों की जॉइनिंग डेट से लेकर अब तक के पूरे सैलरी लेजर और पे-रॉल रिकॉर्ड का विस्तृत ऑडिट करेगी। ऑडिट रिपोर्ट तैयार होने के बाद तीनों ऑपरेटरों को औपचारिक 'कारण बताओ नोटिस' थमाया जाएगा। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाएगा। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो लेखा शाखा द्वारा आकलित की गई अतिरिक्त राशि की किस्तों में या एकमुश्त वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।