Thu, 10 Sep 2026 12:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Thu, 10 Sep 2026 12:59 PM IST
सार
इंदौर के स्कीम 171 के पीड़ित 6,000 रहवासियों ने 33 साल से प्लॉट न मिलने पर आईडीए कार्यालय का घेराव किया। ₹5.89 करोड़ विकास शुल्क जमा करने के बाद भी कब्जा न मिलने से नाराज लोगों ने बोर्ड रूम में हनुमान चालीसा पढ़कर तुरंत निर्णय की मांग की।
इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम 171 में अपने आशियाने का सपना देख रहे लगभग 6 हजार प्लॉट धारकों का इंतजार तीन दशक बीत जाने के बाद भी खत्म नहीं हुआ है। लंबे समय से परेशान रहवासियों ने इंदौर विकास प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोग कार्यालय के अंदर दाखिल हो गए और बोर्ड मीटिंग रूम में हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। इस दौरान जनप्रतिनिधि भी रहवासियों के समर्थन में पहुंचे और जल्द से जल्द कब्जा देने की मांग की।
नेता भी पहुंचे रहवासियों के साथ
शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और भाजपा विधायक महेंद्र हार्डिया भी रहवासियों के साथ पहुंचे और अधिकारियों से इस विषय पर चर्चा की। इस दौरान रहवासियों ने संभागायुक्त भास्कर लक्षकार और आईडीए सीईओ परीक्षित झाड़े को कड़े शब्दों में दी चेतावनी। कहा कि अब आश्वासन नहीं चाहिए, निर्णय के बिना कोई चर्चा नहीं होगी। हमें जल्द अपने प्लॉट चाहिए।
बोर्ड रूम में ही घुस गए रहवासी। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विकास शुल्क जमा करने के बाद भी नहीं मिला अधिकार
रहवासियों का कहना है कि वे पिछले 33 वर्षों से अपने प्लॉट पर कब्जा पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। विकास प्राधिकरण ने तीन साल पहले विकास के नाम पर करोड़ों रुपये जमा करवाए थे। दिसंबर 2024 में रहवासियों और सोसायटियों द्वारा करीब 5.89 करोड़ रुपये की राशि बतौर विकास शुल्क जमा कराई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद आज तक जमीनों को योजना से मुक्त नहीं किया गया।
भावुक हुए पीड़ित, आंखों में आ गए आंसू
स्कीम 171 के प्रदर्शन के दौरान एक पीड़ित प्लाटधारक क्षितिज भास्कर अपने पिता को याद कर भावुक हो गए। आंखों में आंसू लिए क्षितिज ने बताया कि उनके ईमानदार पिता ने एक-एक पैसा जोड़कर प्लाट खरीदा था। जिंदगी के आखिरी पड़ाव तक अपने प्लाट के लिए संघर्ष करते रहे। मृत्यु से पहले पिता ने बेटे से कहा था “मेरी राख को इसी प्लाट की नींव में डालना।” 33 साल बाद भी प्लाट नहीं मिला तो बेटे की आंखों में पिता का वही सपना और दर्द छलक उठा।
प्रशासनिक ढिलाई से ठप पड़ा निर्माण कार्य
नियमों के मुताबिक यदि प्राधिकरण 10 वर्षों के भीतर किसी घोषित योजना में विकास कार्य पूरा नहीं करता है, तो जमीनों को योजना से डी-नोटिफाई करने का प्रावधान है। विकास कार्य न होने के कारण प्रभावित 13 गृह निर्माण सोसायटियों और कॉलोनियों के रहवासी न तो अपने प्लॉट पर निर्माण कर पा रहे हैं और न ही उन्हें बेच पा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अंतिम निर्णय चाहिए।