बिलासपुर11 घंटे पहले
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बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र और उससे लगे ग्राम पंचायतों में अवैध प्लाटिंग पर प्रशासन की रोक के बावजूद भू-माफियाओं का खेल जारी है। शहर से लगे ग्राम पंचायत महमंद में करीब 35 एकड़ कृषि भूमि को सड़कें बनाकर छोटे-छोटे प्लॉटों में तब्दील किया जा रहा है।
आरोप है कि, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) की अनुमति के बिना प्लॉट काटकर खुलेआम बेचे जा रहे हैं, जबकि मौके पर न बिजली की व्यवस्था है, न नाली, न ही अन्य मूलभूत सुविधाएं। एसडीएम मनीष साहू ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
ग्राम पंचायत महमंद में जहां पहले खेतों में कभी फसल लहलहाती थी, वहां अब जेसीबी से सड़कें बनाकर प्लॉटों की मार्किंग कर दी गई है। जगह-जगह बिक्री के लिए प्लॉट दिखाए जा रहे हैं और खरीदारों को भविष्य में विकसित कॉलोनी का सपना दिखाया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जितेंद्र राय और उसके पार्टनर मिलकर अवैध प्लाटिंग कर रहे हैं।

कृषि भूमि को बनाया जा रहा रियल एस्टेट का कारोबार
जानकारी के अनुसार, महमंद में लगभग 35 एकड़ कृषि भूमि को बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए आवासीय प्लॉट के रूप में बेचा जा रहा है। नियमानुसार किसी भी कृषि भूमि पर कॉलोनी विकसित करने से पहले भूमि उपयोग परिवर्तन, टीएंडसीपी की अनुमति और अन्य विभागों की स्वीकृति आवश्यक होती है। लेकिन यहां इन नियमों को दरकिनार कर सीधे प्लॉटिंग की जा रही है।
सड़क बना दी, लेकिन सुविधाओं का कोई इंतजाम नहीं
मौके पर बनाई गई सड़कों को देखकर कॉलोनी का स्वरूप देने की कोशिश जरूर दिखाई देती है, लेकिन वहां न बिजली का नेटवर्क है, न जल निकासी की व्यवस्था और न ही अन्य बुनियादी सुविधाएं। ऐसे में आशंका है कि प्लॉट खरीदने वाले लोगों को भविष्य में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन की रोक के बावजूद कैसे चल रहा कारोबार?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम क्षेत्र और उससे लगे ग्राम पंचायतों में अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश हैं, तब फिर महमंद में इतने बड़े पैमाने पर यह कारोबार कैसे चल रहा है?
क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर कार्रवाई में लापरवाही बरती गई? लोगों का कहना है कि पटवारी, आरआई और राजस्व अफसरों की मिलीभगत से अवैध प्लाटिंग की जा रही है।

SDM बोले- होगी सख्त कार्रवाई
इस पूरे मामले में एसडीएम मनीष साहू ने कहा कि, यदि बिना अनुमति अवैध प्लाटिंग की जा रही है तो यह नियमों का उल्लंघन है। प्रशासन मामले की जांच करेगा और अवैध प्लाटिंग पाए जाने पर जमीन की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने के साथ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
खरीदार भी रहें सतर्क
विशेषज्ञों का कहना है कि, बिना टीएंडसीपी स्वीकृति वाले प्लॉट खरीदना भविष्य में कानूनी विवाद का कारण बन सकता है। ऐसी कॉलोनियों में न तो मूलभूत सुविधाओं की गारंटी होती है और न ही वैधानिक विकास का भरोसा। इसलिए निवेश से पहले संबंधित दस्तावेजों और अनुमतियों की जांच करना जरूरी है।
प्रशासन के दावों पर उठ रहे सवाल
महमंद में जिस तरह कृषि भूमि को तेजी से प्लॉटों में बदला जा रहा है, उसने प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो उपजाऊ खेत अवैध कॉलोनियों में तब्दील हो जाएंगे और बाद में इन्हीं कॉलोनियों को सड़क, बिजली, पानी और नाली जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का बोझ सरकारी तंत्र पर आएगा।
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