Sawan Somwar Dates : सावन में कैसे करें भगवान शिव की पूजा? जानें 4 सोमवार, शिवरात्रि और तीज की पूरी तिथियां

Published on 5 अग॰ 2026

सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा, जिसमें भक्तों को पूजा-अर्चना के लिए 4 सोमवार मिलेंगे। इस दौरान सही विधि से जलाभिषेक, बेलपत्र और शमी पत्र अर्पित करने से शिव कृपा प्राप्त होती है।

Sawan Somwar Dates : आषाढ़ समाप्त होते ही भगवान शिव की उपासना का पावन महीना सावन शुरू होने जा रहा है। इस बार सावन का शुभारंभ श्रवण नक्षत्र और आयुष्मान योग के बेहद खास संयोग में हो रहा है।

मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भोलेनाथ की भक्तिपूर्वक पूजा करने से जीवन के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

अगर आप भी इस पूरे महीने व्रत और पूजन का संकल्प ले रहे हैं, तो पूजा का सही नियम, समय और सभी प्रमुख पर्वों की तिथियां पहले से जान लेना फायदेमंद रहेगा।

सावन की शुरुआत और समापन कब?

इस साल सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हो रहा है, जिसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ होगा। पूरे महीने शिव भक्त मंदिरों और घरों में शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करेंगे।

सावन सोमवार की पूरी लिस्ट

सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस बार पूरे महीने में कुल 4 सोमवार पड़ रहे हैं:

पहला सोमवार (03 अगस्त): इस दिन रवि योग और श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। नए काम या करियर में प्रगति की शुरुआत के लिए यह दिन बहुत अच्छा माना गया है।

दूसरा सोमवार (10 अगस्त): इस दिन श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत और पूजन कर सकते हैं।

तीसरा सोमवार (17 अगस्त): इस दिन शिव योग और प्रदोष काल का संगम हो रहा है। साथ ही इसी दिन नागपंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा। यह दिन पारिवारिक शांति और दांपत्य जीवन के कष्ट दूर करने के लिए उत्तम है।

चौथा व अंतिम सोमवार (24 अगस्त): सावन के आखिरी सोमवार पर व्रत रखकर भक्त पूरे महीने के अनुष्ठान का पूर्ण फल प्राप्त करते हैं।

सावन के अन्य प्रमुख त्योहारों की तिथियां

सावन के महीने में शिव पूजन के अलावा कई प्रमुख व्रत और त्योहार भी आते हैं:

सावन शिवरात्रि: 11 अगस्त (महादेव के जलाभिषेक के लिए सबसे महत्वपूर्ण रात्रि)

हरियाली अमावस्या: 12 अगस्त (पितृ पूजन और पौधे लगाने का विशेष दिन)

हरियाली तीज: 15 अगस्त (सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का पर्व)

शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा का सही तरीका

सावन में पूजा करते समय सही क्रम का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:

जल चढ़ाने का नियम: सुबह स्नान के बाद सबसे पहले तांबे के लोटे से शिवलिंग पर केवल शुद्ध जल अर्पित करें।

अन्य सामग्रियां: जल चढ़ाने के बाद किसी दूसरे बर्तन से दूध, दही, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करें।

विशेष वस्तुएं: सावन में शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि शमी पत्र अर्पित करने से भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं।

मंत्र जाप: पूजन के दौरान निरंतर “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें। इससे मानसिक शांति मिलती है और कष्टों से राहत मिलती है।

किस समय पूजा करना सबसे ज्यादा फलदायी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में शिव पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह तड़के) और प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) सबसे उत्तम माने जाते हैं।

इन समयों में शांत मन से किया गया जलाभिषेक और ध्यान विशेष फल प्रदान करता है।