सागर/विदिशा/नर्मदापुरम28 मिनट पहलेलेखक: राहुल शर्मा
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प्रदेश में रोजगार देने वाली फैक्ट्रियों के शटर एक-एक कर गिर रहे हैं और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बढ़ती लागत, कर्ज का दबाव और बाजार में मांग की सुस्ती है।
आरबीआई और सूक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) मंत्रालय की रिपोर्ट्स भी बताती हैं कि महंगे इनपुट, सीमित क्रेडिट और कैश फ्लो संकट से छोटे उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
देश में बीते तीन साल में सबसे ज्यादा एमएसएमई 2025-26 में बंद हुए। यह संख्या 62,747 तक पहुंच गई है, जिससे करीब 3.60 लाख रोजगार खत्म हो गए। बंद हुए एमएसएमई में 4.5% हिस्सेदारी अकेले मध्यप्रदेश की है, जहां तीन साल में 5374 सूक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्योग ठप पड़ गए और 42 हजार से ज्यादा लोगों की रोजी-रोटी छिन गई।
सबसे ज्यादा एमएसएमई 2025-26 में 2861 बंद हुए। इससे 21 हजार से अधिक रोजगार खत्म हुए। वहीं 2024-25 में 1962 और 2023-24 में 552 सूक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्योग बंद हुए हैं। इससे क्रमश: 15696 और 4416 रोजगार पर असर पड़ा है।
IIM में पढ़ाई गई जिस महिला उद्यमी की सफलता, उसका उद्योग बंद
उद्यमी संध्या मिश्रा ने भोपाल के गोविंदपुरा में 1989 में 6 लाख रुपए से फैक्ट्री शुरू की, जहां ट्रांसफॉर्मर बनाकर बिजली कंपनियों को सप्लाई किए जाते थे। सरकारी असंवेदनशीलता ने इसे तबाह कर दिया। 10 करोड़ के टर्नओवर और 200 लोगों को रोजगार देने वाली संध्या को 2018 में नेशनल वूमेन एम्पावरमेंट अचीवर अवॉर्ड मिला।
उनकी सफलता IIM-लखनऊ के सिलेबस में भी शामिल हुई। इसी साल बारिश से फैक्ट्री में जलभराव के कारण सामान खराब हुआ और ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो सके। एक मौका देने के बजाय विद्युत मंडल ने 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर 40 लाख की पेनल्टी लगा दी।
प्रॉपर्टी बेचकर चुकाई देनदारियां
सवा करोड़ के इंश्योरेंस के बावजूद 50 लाख के क्लेम की रिपोर्ट में कंपनी ने सालभर लगा दिया, जिसे पाने के लिए संध्या को आरटीआई तक लगानी पड़ी। प्रशासनिक स्तर पर कहीं सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने विद्युत मंडल की पेनल्टी और ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई को गलत ठहराया। 7 अगस्त को कंज्यूमर फोरम ने भी संध्या के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इंश्योरेंस कंपनी पर जुर्माना लगाया। लेकिन न्यायिक जीत से पहले ही उन्हें देनदारियां चुकाने के लिए प्रॉपर्टी बेचनी पड़ी ।
कर्ज का दबाव : बकाया 12 हजार करोड़ के पार
बीते 5 साल में एमएसएमई को 2.91 लाख करोड़ का कर्ज दिया गया, लेकिन इसके साथ बकाया भी बढ़कर 12,625 करोड़ पहुंच गया। वर्ष 2020-21 में 35,427 करोड़ कर्ज पर 1,679 करोड़ बकाया था, जो 2021-22 में 37,063 करोड़ पर 2,183 करोड़ हुआ। 2023-24 में 2,943 करोड़ बकाया चढ़ा। 2024-25 में 89,148 करोड़ कर्ज के साथ बकाया 3,135 करोड़ रुपये हो गया।
सरकारी कोशिश: सब्सिडी से लुभाने का प्रयास
सरकार ने एमएसएमई को सहारा देने 3 साल में 13,857 इकाइयों को 462.13 करोड़ रु. की मार्जिन मनी सब्सिडी दी, जिससे 1.11 लाख रोजगार का लक्ष्य था। वर्ष 2022-23 में 5,957 इकाइयों को 181.30 करोड़ (47,656 रोजगार), 2023-24 में 5,292 इकाइयों को 185.21 करोड़ (42,336 रोजगार) और 2024-25 में 2,626 इकाइयों को 95.62 करोड़ रुपये देकर 21 हजार रोजगार सृजित किए गए।
प्रदेश में बड़ी संख्या में उद्योग के बंद होने की तीन बड़ी वजह
बंद होने वाले MSME में आधे सरकारी स्कीम का लोन नहीं चुका पाते। बाकी पॉलिसी की मार झेलते हैं। सरकारी सप्लाई में 10% सिक्योरिटी 3 से 10 साल तक जमा रहने से वर्किंग कैपिटल फंसता है। राज्यों में अलग-अलग और बार-बार बदलती पॉलिसी भी समस्या है। पूरे देश में एक जैसी स्कीम हो तो MSME को काफी मदद मिल सकती है। -विपिन जैन, महासचिव, मप्र स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज ऑर्गनाइजेशन
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