भोपाल के किसान रामसिंह कुशवाहा पॉलीहाउस में फूलों की खेती से रोज कमा रहे 4-6 हजार रुपये

Published on 11 सित॰ 2026

11 सितंबर 2026, भोपाल: भोपाल के किसान रामसिंह कुशवाहा पॉलीहाउस में फूलों की खेती से रोज कमा रहे 4-6 हजार रुपये – भोपाल जिले के फंदा क्षेत्र के बड़खेड़ा बोंडर गांव के किसान रामसिंह कुशवाहा ने पारंपरिक खेती छोड़कर एक एकड़ में सेंसर आधारित ऑटोमैटिक पॉलीहाउस में फूलों की खेती शुरू की। आज वे रोजाना 4 से 6 हजार रुपये तक कमा रहे हैं।

उनके पॉलीहाउस में गुलाब, जरबेरा और गेंदा समेत करीब 30 हजार पौधे लगे हैं। रोजाना 1,500 से 2,000 जरबेरा फूल निकलते हैं, जबकि सभी किस्मों को मिलाकर हर दिन करीब 4,000 फूलों का उत्पादन होता है।

सब्सिडी से लगा सेंसर आधारित सिस्टम

रामसिंह ने बताया कि पॉलीहाउस में तापमान, नमी और सिंचाई को नियंत्रित करने वाला सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम लगाने में करीब 4 लाख रुपये की लागत आई। इसमें से 2 लाख रुपये की सब्सिडी उन्हें एकीकृत उद्यानिकी विकास मिशन (आईएचडीएम) योजना के तहत मिली।

इस सिस्टम की मदद से पौधों को जरूरत के मुताबिक ही पानी और खाद मिलता है, जिससे फूलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर हुए हैं। परिवार अब पूरी तरह इस खेती पर निर्भर हो चुका है और आसपास के गांवों के किसान भी तकनीक की जानकारी लेने आते हैं।

सरकार को दिया शुक्रिया

रामसिंह कुशवाहा ने कहा, “सरकारी योजनाओं ने हमें आत्मनिर्भर बनाया और समाज में एक नई पहचान दी है।” उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए इसका श्रेय दिया।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, पॉलीहाउस और सेंसर आधारित खेती से पानी और खाद की बर्बादी काफी कम हो जाती है, जबकि उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है। भोपाल के आसपास फूलों की मांग शहरी बाजारों, शादी-समारोहों और मंदिरों में लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिल जाता है।

रामसिंह की खेती को देखने अब जिले के दूसरे किसान भी पहुंच रहे हैं, जो पॉलीहाउस लगाने और सब्सिडी पाने की प्रक्रिया समझना चाहते हैं। स्थानीय उद्यानिकी विभाग के अधिकारी भी उनके खेत को एक मॉडल के तौर पर दिखाते हैं, ताकि दूसरे किसान परंपरागत खेती से हटकर संरक्षित खेती की तरफ प्रेरित हों।

खेती में तकनीक अपनाने से पहले रामसिंह को भी शुरुआत में निवेश जुटाने और सिस्टम चलाना सीखने में मुश्किलें आई थीं। लेकिन सब्सिडी की मदद और लगातार निगरानी से उन्होंने धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ाया और अब यह खेती परिवार की आय का मुख्य जरिया बन गई है।

पॉलीहाउस में लगे सेंसर मिट्टी की नमी, तापमान और हवा में नमी का स्तर लगातार मापते हैं और उसी के आधार पर सिंचाई अपने आप शुरू या बंद हो जाती है। इससे न सिर्फ पानी की बचत होती है, बल्कि पौधों को सही समय पर सही मात्रा में पोषण भी मिलता रहता है, जिससे फूलों का आकार और रंग भी बेहतर बना रहता है।

भोपाल जैसे शहरी इलाकों के नजदीक होने का फायदा भी रामसिंह को मिलता है, क्योंकि ताजा कटे फूलों को कुछ ही घंटों में स्थानीय फूल मंडी और सजावट के कारोबारियों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे परिवहन में लगने वाला समय कम होता है और फूलों की गुणवत्ता खराब होने का खतरा भी घट जाता है।

जिला उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रामसिंह जैसे किसानों की सफलता से आसपास के इलाकों में संरक्षित खेती को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। कई किसान अब सब्जियों की जगह फूलों या दूसरी नकदी फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं, क्योंकि पॉलीहाउस से मिलने वाली आय पारंपरिक खेती के मुकाबले कहीं ज्यादा और स्थिर रहती है

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