डिजिटल अरेस्ट, न्यूड वीडियो कॉल... साइबर फ्रॉड के 4 हथियार: UP में हर महीने ₹100 करोड़ से ज्यादा की ठगी; ढाई लाख शिकायतें, FIR 1% भी नहीं - Uttar Pradesh News

Published on 21 अग॰ 2026

यूपी में हर महीने 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का साइबर फ्रॉड हो रहा है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से हैरान करने वाले आंकड़े सामने आए हैं। बीते 7 महीनों में ढाई लाख से ज्यादा शिकायतें मिलीं, लेकिन सिर्फ 1040 मामलों में ही FIR दर्ज हुई।

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साइबर ठग मोबाइल या कंप्यूटर हैक करने के बजाय अब लोगों का दिमाग हैक कर रहे हैं। इसके लिए वे डर, लालच, प्यार-मोहब्बत और हमदर्दी का सहारा लेते हैं। पढ़े-लिखे युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक इनके जाल में फंसकर 720 करोड़ रुपए से ज्यादा गंवा चुके हैं। समय रहते कार्रवाई होने से 242 करोड़ रुपए खाते में फ्रीज हो गए, लेकिन 478 करोड़ ठगों तक पहुंच गए।

अब साइबर ठगी के 4 तरीकों का पूरा मॉडल समझिए

इस मॉडल में ठग पुलिस या किसी जांच एजेंसी का डर दिखाकर फ्रॉड करते हैं। NCRP के मुताबिक, यूपी में इस तरह केस भले ही कम हों, लेकिन 7 महीने में करीब 23% रकम इसी तरह ठगी गई है।

जुलाई में लखनऊ के एक बुजुर्ग दंपती को साइबर ठगों ने करीब 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का बड़ा अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि दंपती के नाम पर जारी सिम का इस्तेमाल कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।

इससे दंपती इतना डर गए कि उन्होंने खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया। ठग वीडियो कॉल पर लगातार उन्हें निर्देश देते रहे। दंपती के सोने-जागने और खाने-पीने तक पर कंट्रोल कर रहे थे। डर की वजह से दंपती ने अपनी जिंदगीभर की जमा-पूंजी और एफडी तक तुड़वा दी। कुल 70 लाख रुपए ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।

इस मॉडल में अक्सर फोन कॉल या सोशल मीडिया मैसेज के जरिए ठगी की जाती है। इसमें UPI के जरिए पैसे ट्रांसफर कराए जाते हैं। यूपी में सबसे ज्यादा यानी 32% केस इसी मॉडल पर होते हैं।

लालच के जरिए ठगी का हालिया मामला 16 अगस्त को कानपुर से आया था। यहां राजाराम शाक्यवार को सोशल मीडिया ग्रुप में जोड़कर शेयर मार्केट से मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। ठगों ने खुद को एक रजिस्टर्ड सिक्योरिटी कंपनी से जुड़ा बताया। शुरुआत में शेयर बाजार की जानकारियां भेजकर भरोसा जीता। फिर IPO-FPO में निवेश के नाम पर साढ़े 6 लाख रुपए मंगा लिए।

जब राजाराम ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने और पैसे जमा करने को कहा। ठगी का अहसास होने पर राजाराम ने साइबर पोर्टल पर शिकायत की। कल्याणपुर पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, वेबसाइट और रकम के लेन-देन की जांच कर रही है।

करीब 9-10% मामलों में इस मॉडल से ठगी होती है। खास बात यह है कि बदनामी की वजह से ज्यादातर मामलों में लोग शिकायत करने से कतराते हैं।

बीती 6 अप्रैल को मैनपुरी के भोगांव कस्बे में रहने वाले एक रिटायर्ड दरोगा से रोमांस मॉडल के जरिए ठगी हुई। पहले उनके वॉट्सएप पर एक लड़की की कॉल आई। उसने खुद को रिश्तेदार बताया। कुछ देर बाद उसने वीडियो कॉल की। कॉल रिसीव करते ही लड़की न्यूड हो गई। दरोगा ने तुरंत कॉल काट दी।

करीब 40 मिनट बाद लड़की ने दोबारा कॉल किया। उसने कहा कि उसकी मां बीमार है और उसे 1 लाख रुपए की जरूरत है। अगर पैसे नहीं मिले तो वह वीडियो कॉल की रिकॉर्डिंग वायरल कर देगी। दरोगा ने पैसे देने से इनकार कर दिया।

अगले दिन उन्हें वॉट्सएप पर एक एडिटेड वीडियो मिला, जिसमें वह न्यूड लड़की से बात करते दिख रहे थे। बदनामी के डर से रिटायर्ड दरोगा ने उसके बताए बैंक खाते में करीब 3.47 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।

मेरठ में यूपी महिला आयोग की सदस्य डॉ. हिमानी अग्रवाल का जून में वॉट्सएप अकाउंट हैक हो गया था। साइबर ठगों ने उनके कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद पुलिस अधिकारियों, डॉक्टरों और अन्य लोगों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया।

मैसेज में खुद को डॉ. हिमानी अग्रवाल बताकर 45 हजार, 50 हजार और 52 हजार रुपए मांगे। कुछ लोगों ने पैसे ट्रांसफर भी कर दिए। मामला तब खुला, जब कुछ जानने वालों ने डॉ. हिमानी को फोन करके पैसे मांगने की बात कन्फर्म की।

यूपी में इस तरह के मामले करीब 5% ही होते हैं। इसकी वजह है कि लोग अक्सर संबंधित व्यक्ति को फोन करके पूछ लेते हैं और ठगी से बच जाते हैं।

साइबर एक्सपर्ट बोले- जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव बनाते हैं ठग

यूपी पुलिस को साइबर तकनीक की ट्रेनिंग दे रहे साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट रक्षित टंडन कहते हैं- ‘ठगी का तरीका चाहे कोई भी हो, ठग सबसे पहले पीड़ित पर जल्दबाजी में फैसला लेने का दबाव बनाते हैं। वे बार-बार कहते हैं कि आपके पास सिर्फ 5 मिनट हैं। अभी पेमेंट नहीं किया, तो केस दर्ज हो जाएगा। पार्सल जब्त कर लिया जाएगा या बैंक अकाउंट हमेशा के लिए ब्लॉक हो जाएगा।

ऐसे में पीड़ित को सोचने, परिवार से बात करने या संबंधित विभाग से जानकारी लेने का समय नहीं मिलता। वह घबराहट और दबाव में गलत फैसला कर बैठता है। ठग इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं।

अगर आपके साथ साइबर फ्रॉड हो जाए, तो घबराएं नहीं। शुरुआत के एक घंटे को ‘गोल्डन आवर’ मानकर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, ठगी की रकम को होल्ड कराने या वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।’

बच्चे और युवा भी साइबर ठगों के निशाने पर

गेमिंग एप्स: फ्री कॉइंस के लालच में बैंक अकाउंट खाली

छोटे बच्चों को ऑनलाइन गेम में फ्री कॉइंस, रिवॉर्ड या नए कैरेक्टर अनलॉक करने का लालच दिया जाता है। इसके लिए उनसे गेम डाउनलोड करने या किसी लिंक पर क्लिक करने को कहा जाता है। कई बार बच्चे माता-पिता के फोन पर आए पासवर्ड या OTP भी शेयर कर देते हैं। इसके बाद ठग कुछ ही मिनटों में बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं।

फर्जी APK फाइल: शादी का कार्ड या चालान बताकर फोन हैक

ठग वॉट्सएप या SMS के जरिए शादी का कार्ड, चालान अपडेट या गोपनीय जानकारी के नाम पर APK फाइल भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इसे डाउनलोड करके इंस्टॉल करता है, फोन में मैलवेयर आ जाता है। इससे ठग फोन का कंट्रोल हासिल कर लेते हैं। फिर OTP समेत दूसरी जरूरी जानकारी चुरा लेते हैं।

फर्जी ट्रेडिंग और क्रिप्टो प्लान: 500% मुनाफे का लालच

ठग टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के फर्जी ग्रुप बनाकर शेयर बाजार और क्रिप्टो में 500% तक मुनाफे का दावा करते हैं। शुरुआत में फर्जी एप या अकाउंट पर मुनाफा दिखाकर भरोसा जीता जाता है। इसके बाद ज्यादा पैसे लगाने के लिए कहा जाता है। खासकर नई नौकरी शुरू करने वाले युवा जल्दी कमाई के लालच में अपनी जमा-पूंजी गंवा बैठते हैं।

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