तराना मंडी में सोयाबीन भाव को लेकर चक्काजाम:विधायक परमार ने अधिकारियों-व्यापारियों पर साठगांठ का आरोप लगाया, SDM कार्यालय घेरने की चेतावनी दी
उज्जैन4 घंटे पहले
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सोयाबीन के भाव को लेकर प्रदर्शन करते किसान।
उज्जैन जिले की तराना कृषि उपज मंडी में सोमवार को सोयाबीन के भाव को लेकर किसानों ने मंडी के बाहर सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। किसानों का आरोप था कि मंडी में उनकी सोयाबीन की उपज के उचित भाव नहीं लगाए जा रहे हैं। किसानों के मुताबिक मंडी में बोली करीब 4400 रुपए तक लग रही थी, जबकि मंडी के बाहर इसी उपज के 5200 से 5600 रुपए तक भाव मिलने का दावा किया गया। भाव के अंतर को लेकर किसान नाराज हुए और सड़क पर बैठ गए।
दो-तीन व्यापारी ही बोली में शामिल
किसानों का कहना था कि मंडी में पर्याप्त व्यापारी बोली में शामिल नहीं हो रहे हैं। उनका आरोप था कि दो-तीन व्यापारी ही बोली लगाते हैं, जिससे उन्हें प्रतिस्पर्धी भाव नहीं मिल पा रहा। किसानों ने मंडी में पेयजल, शौचालय, तौल कांटे और फड़ पर पड़ी उपज जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी नाराजगी जताई।

एसडीएम की समझाइश पर एक घंटे बाद खुला रास्ता।
विधायक ने साठगांठ के आरोप लगाए
धरने पर पहुंचे विधायक महेश परमार ने अधिकारियों और व्यापारियों के सामने मंडी व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी के अधिकारी और व्यापारी मिलीभगत कर किसानों को उचित भाव से वंचित कर रहे हैं। विधायक ने कहा, “तराना में ही यहां के अधिकारी, मंडी प्रशासन के और व्यापारियों के साथ साठगांठ करके, यहां जो सोयाबीन के भाव मिलने चाहिए किसान भाइयों को, वो मिल नहीं रहे।”
अधिकारियों के सामने नाराजगी जताते हुए विधायक ने कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आगे कहा, “इनकी जांच कराओ पहले भाई कि कितनी तनख्वाह मिलती है और कितने घर हैं इनके!” विधायक ने यह भी कहा कि किसान तीन घंटे से भूखे-प्यासे बैठे हैं और मंडी कर्मचारियों की तनख्वाह किसानों की उपज से चलने वाली मंडी व्यवस्था से जुड़ी है।
विधायक ने मंडी के एक कर्मचारी को लेकर भी अधिकारियों के सामने सवाल उठाए। उन्होंने तहसीलदार से कहा कि यह कर्मचारी बार-बार व्यापारियों के प्रतिनिधि के रूप में क्यों आ रहा है और उसे वहां से हटाने की बात कही।
करीब एक घंटे रहा चक्काजाम
विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक और किसानों की ओर से करीब तीन घंटे तक किसानों के बैठे रहने की बात कही गई। हालांकि तराना एसडीएम अनिरुद्ध मिश्रा ने बताया कि सड़क पर चक्काजाम करीब एक घंटे रहा। सूचना मिलने पर तहसीलदार और पुलिस को मौके पर भेजा गया। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर उनकी समस्या सुनी और समझाइश देकर सड़क से हटाया। इसके बाद यातायात बहाल हो गया।
एसडीएम मिश्रा ने बताया कि किसानों और व्यापारियों के बीच भाव को लेकर कुछ गलतफहमी की स्थिति बनी थी। किसानों को आसपास की मंडियों में चल रहे तुलनात्मक भावों के आधार पर व्यापारियों से समन्वय कर काम करने की समझाइश दी गई है। फिलहाल स्थिति सामान्य है।
बुधवार को SDM कार्यालय घेरने की चेतावनी
विधायक महेश परमार ने कहा कि यदि तराना मंडी में किसानों को आसपास की मंडियों के समान उचित भाव नहीं मिला तो आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बुधवार सुबह 11 बजे विधायक कार्यालय से सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा तक पहुंचकर वहां से एसडीएम कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी दी है।
विधायक ने तराना विधानसभा के नर्मदा पाइपलाइन से छूटे गांवों को जोड़ने, कालीसिंध, टिल्लर और लखुंदर नदी सहित जलाशयों और डैम को पानी से भरने तथा तराना विधानसभा और उज्जैन जिले को सूखा घोषित करने की मांग को भी आंदोलन में शामिल करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की दूसरी मंडियों में किसानों को जिस भाव पर सोयाबीन मिल रही है, वही भाव तराना मंडी में भी मिलना चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आने वाले एक-दो दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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