सड़कों पर खुले पड़़े हैं सीवर चेंबर: सीवर का ठेका 45 दिन में खत्म होना था 143 दिन बाद भी 51 वार्डों में नहीं हुआ लागू - Gwalior News

Published on 12 सित॰ 2026

ग्वालियर20 मिनट पहलेलेखक: अनिल पटेरिया

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सीवर व्यवस्था सुधारने के लिए निगम परिषद ने 21 अप्रैल को ठेका प्रथा खत्म करने का फैसला लिया था, लेकिन 143 दिन बाद भी यह फैसला जमीन पर पूरा नहीं उतर पाया है।

66 पार्षदों और महापौर डॉ.शोभा सिकरवार की मौजूदगी में सभापति मनोज तोमर ने 45 दिन में ठेका खत्म करने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद अब तक केवल 9 वार्डों में ही नई व्यवस्था लागू हो सकी है।

5 सितंबर से शेष 51 वार्डों में भी व्यवस्था शुरू होनी थी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।

इसका असर शहर की सीवर व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। सीवर संबंधी परेशानी से क्षेत्रवासी ही नहीं, पार्षद भी परेशान हैं।

निगम ने एक दिन पहले 36 वार्डों में कर्मचारियों और सामान की व्यवस्था की है। इसमें बड़ी परेशानी भुगतान को लेकर आ रही है। निगम ने शासन को पत्र लिखकर 14 करोड़ मांगे हैं।

निगम में 9 साल से सीवर सफाई और संधारण का काम ठेका व्यवस्था से कराया जा रहा था। जानकारों का कहना है कि कुछ अफसर ठेका व्यवस्था खत्म करने के फैसले से सहमत नहीं हैं। इस कारण 143 दिन बाद भी आदेश पर अमल नहीं हुआ है।

9 वार्डों में ठेका खत्म हुआ, बाकी जगह अब भी ऐसे हालात

  • ललियापुरा: झांसी रोड से ललियापुरा पहुंच मार्ग की डब्ल्यूवीएम रोड पर सीवर चेंबर खुला पड़ा है। यहां के लोगों का कहना है कि शिकायत के बाद भी कोई निराकरण नहीं। इसलिए चेंबर के अंदर पेड़ की टहनियों और पत्थर चारों तरफ से रखे है। इससे हादसा न हो। इस सीवर चेंबर के कारण आए दिन सड़क हादसे होते हैं।
  • नाका चंद्रवदनी रोड: झांसी रोड थाना से नाका चंद्रवदनी रोड अधूरी बनी पड़ी है। यहां पर नई सीवर लाइन के ऊपर लगे चेंबर का ढक्कन टूटा पड़ा है। सुरक्षा को ध्यान में रखकर किसी ने बेरिकेड्स रख दिया है।
  • चार शहर का नाका: यहां से निकलने वालों का कहना है कि सीवर लाइन चोक होने से गंदा पानी सड़क पर बह रहा है।

निगम को इसकी जरूरत

2 सुपर सकर, 2 डंप टैंक: ये 5 करोड़ रुपए की मशीनें मैदान में काम कर रही हैं।

4 जेटिंग मशीन कम सक्शन मशीन: 2.55 करोड़ रुपए का टेंडर खुल गया है।

22 डी सिल्टिंग मशीन: इन्हें खरीदने के लिए 3.76 करोड़ रुपए का टेंडर खुल गया है। कंपनी को एलओए लेटर जारी कर दिया है।

330 कर्मचारी की आवश्यकता 60 वार्डों की सीवर सफाई व्यवस्था की देखभाल के लिए निगम ने 330 आउटसोर्स कर्मचारियों को रखने की जिम्मेदारी निजी कंपनी को दी है। इसके बदले में कंपनी साल के 6.50 करोड़ रुपए लेगी।

महापौर बोलीं- 7 दिन में शेष वार्ड में भी तैनात करें स्टाफ महापौर डा.शोभा सिकरवार ने निगम के अधिकारियों की बैठक बाल-भवन में ली। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि अभी तक ​सीवर सफाई के लिए कितने वार्डों में मैन पावर लगाई है। अधिकारियों ने 36 वार्डों में तैनाती की बात कही। इस पर महापौर ने नाराजगी जताई और कहा कि शेष वार्डों में 7 दिन में कर्मचारी तैनात करें।

सभापति ने आयुक्त से पूछा- ठहराव पर अमल क्यों नहीं निगम सभापति मनोज तोमर ने सीवर संधारण और सफाई को लेकर ​परिषद के ठहराव को लेकर आयुक्त अभिषेक चौधरी को पत्र लिखा। उन्होंने पूछा कि पारित ठहराव में निर्धारित अवधि निकलने के बाद भी क्रियान्वयन का प्रतिवेदन प्रेषित नहीं किया गया है और न ही निर्णय के क्रम में किए गए कार्य की प्रगति से अवगत कराया गया है।

निगमायुक्त बोले- सीवर सुधार पर काम चल रहा नगर निगम आयुक्त आशीष चौधरी ने कहा कि शहर में सीवर समस्या को लेकर जो काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही इसके परिणाम सामने आएंगे। जहां-जहां सीवर के चेंबर खुले हैं तो उनको बंद कराया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फील्ड में नजर आए नहीं तो सख्त एक्शन लिया जाएगा।

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