45KG चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों वाले 15 कलश... ठेकेदार ने गायब किया हवेली की खुदाई में मिला खजाना; जांच में जुटी पुलिस

Published on 20 जुल॰ 2026

45KG चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों वाले 15 कलश... ठेकेदार ने गायब किया हवेली की खुदाई में मिला खजाना; जांच में जुटी पुलिस

हवेली को तोड़ दिया गया है. उसकी जगह कॉम्प्लेक्स बनाया गया है .

Jaipur Haveli News: राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक पुश्तैनी हवेली से कथित तौर पर करोड़ों रुपये का खजाना मिलने के दावे ने पूरे जिले भर में सनसनी फैला दी है. हवेली के मालिक ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य के दौरान मिले सोने-चांदी और पुराने सिक्कों को ठेकेदार और उसके साथियों ने गायब कर दिया. मामले में शिकायत मिलने के बाद माणक चौक थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

वहीं, सेठी परिवार का व्यापारिक इतिहास और स्थानीय लोगों के दावे भी इस मामले को और दिलचस्प बना रहे हैं. गोपालजी रास्ते के विद्याधर का रास्ता इलाके में स्थित सेठी परिवार की पुश्तैनी हवेली को तोड़कर निर्माण कार्य कराया जा रहा था. हवेली के मालिक राहुल सेठी ने आरोप लगाया है कि खुदाई के दौरान करीब 40 से 45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14 से 15 कलश और 8 से 10 हजार पुराने चांदी के सिक्के मिले थे. उनका दावा है कि ठेकेदार और उसके साथियों ने इस कथित खजाने को आपस में बांट लिया.

कैसे मिली खजाना होने की जानकारी?

राहुल सेठी ने अपनी शिकायत में कहा कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि खुदाई में मिलने वाली कोई भी बहुमूल्य वस्तु परिवार को सौंपी जाएगी. बाद में एक मजदूर ने कथित तौर पर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. शिकायतकर्ता ने दो वीडियो भी पुलिस को सौंपे हैं, जिन्हें जांच का हिस्सा बनाया गया है. हवेली को तोड़ दिया गया है उसकी जगह कॉम्प्लेक्स बनाया गया है. जब हवेली को तोड़ा गया था, तब खजाना मिलने की बात अब की जा रही है.

लोगों में खजाने की चर्चा

इलाके के स्थानीय लोगों का कहना है कि सेठी परिवार पुराने जयपुर के प्रतिष्ठित व्यापारिक परिवारों में रहा है. बताया जाता है कि राहुल सेठी के दादा बद्रीनारायण सेठी 1970 के दशक में जयपुर और मुंबई के बड़े कारोबारियों में शामिल थे. स्थानीय निवासियों का कहना है कि हवेली टूटने के समय से ही इलाके में खजाना मिलने की चर्चा चल रही थी, हालांकि किसी ने खुद इसे देखने की पुष्टि नहीं की है.

कौन थे बद्रीनारायण सेठी?

परिवार के इतिहास के अनुसार बद्रीनारायण सेठी की दो शादियां हुई थीं. पहली पत्नी से दुर्गालाल सेठी और दूसरी पत्नी से घनश्याम सेठी हुए. घनश्याम सेठी के पुत्र तरुण सेठी और राहुल सेठी हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परिवार वर्षों से पुराने जयपुर के प्रतिष्ठित व्यापारिक परिवारों में शामिल रहा है. बताते हैं कि हमारे सामने ही यह पुरानी हवेली थी. करीब डेढ़ साल पहले इसे तोड़ा गया. इलाके में तभी से चर्चा है कि खुदाई में खजाना मिला था. बद्रीनारायण सेठी बहुत बड़े रईस थे, इसलिए लोग मानते हैं कि हवेली में पुराना खजाना हो सकता है.

विद्याधर का रास्ता जयपुर के सबसे पुराने और ऐतिहासिक इलाकों में शामिल है, जहां पर यह हवेली थी. यहां आज भी कई प्राचीन हवेलियां मौजूद हैं. ऐसे में इस कथित खजाने की चर्चा पूरे इलाके में बनी हुई है, लेकिन अब तक किसी सरकारी एजेंसी ने खजाना मिलने की पुष्टि नहीं की है.

हवेली तोड़ने से पहले हुई थी खजाने की खोजबीन

हवेली को जब तोड़ने की तैयारी की जा रही थी, तब हवेली के मालिक राहुल सेठी ने अपने स्तर पर सोना और चांदी को खोजबीन करने की कवायत आधुनिक मशीनों से की थी. उन्होंने कई इंजीनियरों को बुलाकर करीब 2 महीने तक आधुनिक मशीनों के द्वारा खजाना खोजने का प्रयास किया था, लेकि राहुल सेठी को कुछ भी नहीं मिला. ठेकेदार के साथ हुए एग्रीमेंट में खुदाई के समय मिलने वाली चीजों को परिवार को देने की बात लिखी गई है.

पुलिस बोली- जांच के बाद ही होगी पुष्टि

जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने पेन ड्राइव और अन्य साक्ष्य अपने कब्जे में ले लिए हैं. वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी सरकारी एजेंसी ने हवेली से खजाना मिलने की पुष्टि नहीं की है. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हवेली से वास्तव में करोड़ों का खजाना मिला था या यह केवल दावा है.

ध्वज आर्य

ध्वज आर्य

राजस्थान में 2008 से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत. 18 वर्षों के पत्रकारिता करियर में राजनीति, सामाजिक मुद्दे, विकास, अपराध और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर काम. खबर की तह तक जाने, तथ्यों की पुष्टि करने और जटिल विषयों को सरल भाषा में जनता तक पहुंचाने में विशेषज्ञता. प्रिंट से डिजिटल मीडिया तक के बदलाव को करीब से देखा. प्रिंट ,डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्लेटफार्म पर काम का अनुभव. पत्रकारिता की शुरुआत के 10 साल क्राइम रिपोर्टिंग की. पूर्व में समाचार प्लस, इंडिया न्यूज, दैनिक भास्कर और अब नेशनल चैनल TV9 भारतवर्ष में राजस्थान ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी. इस सफर के दौरान ब्रेकिंग न्यूज से लेकर इन्वेस्टिगेशन स्टोरी के साथ कई बड़े खुलासे, कई बड़े चुनाव, आपदा, बड़े आंदोलनों की ग्राउंड ज़ीरो से कवरेज समेत भारत पाकिस्तान युद्ध (ऑपरेशन सिंदूर) को कवर किया. क्राइम की खबरों, बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और युद्ध कवरेज में सबसे ज्यादा रूचि. मेरा मानना है कि खबर सिर्फ एक घटना नहीं है, उसके पीछे का सच भी है. पत्रकारिता का काम सत्ता पक्ष से सवाल पूछना और जनता की आवाज़ बनना है. निष्पक्षता, गति और सटीकता मेरी रिपोर्टिंग के तीन स्तंभ हैं.

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