Updated On: Jul 16, 2026 | 04:02 PM IST
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सार
Vasai Virar Dogs Attack: वसई-विरार में आवारा कुत्तों के आतंक पर विधायक स्नेहा दुबे ने विधानसभा में सवाल उठाए। 5 साल में 4.5 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी केवल 28,000 कुत्तों की नसबंदी हुई।

आवारा कुत्ता (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
Vasai Virar Dog Sterilisation: वसई-विरार मनपा क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक और उनके काटने की लगातार बढ़ती घटनाओं ने स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पूरे शहर में इस वक्त करीब 1 लाख से अधिक आवारा कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं, जिससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में हर समय डर बना रहता है। इस बेहद गंभीर और जनहित से जुड़े मुद्दे को वसई की विधायक स्नेहा दुबे ने विधानसभा के मानसून सत्र में बेहद पुरजोर तरीके से उठाया और सरकार से इस पर तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग की।
करोड़ों का बजट साफ, पर जमीनी नतीजा ‘शून्य’ विधायक स्नेहा दुबे ने सदन में मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े करते हुए वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर लगभग 4.5 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके हैं, लेकिन नतीजा
‘ढाक के तीन पात’ ही रहा। इतने भारी-भरकम बजट के बावजूद पांच साल में महज 28,000 कुत्तों की ही नसबंदी की जा सकी है। विधायक ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि इतने बड़े वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र के लिए सिर्फ 2 नसबंदी केंद्र ही कार्यरत हैं, जो कि यहां की विशाल आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं।
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अदालती निर्देशों का बहाना बनाने से नहीं मिलेगी राहत
विधायक स्नेहा दुबे ने सरकार के इस जवाब पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि अधिकारियों और मंत्रियों द्वारा केवल अदालती निर्देशों का बहाना बनाने से वसई-विरार की त्रस्त जनता को राहत नहीं मिलने वाली है। सरकार को जमीनी स्तर पर इच्छाशक्ति दिखानी होगी।
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मंत्री का जवाब : सिर्फ केंद्र बढ़ाने से नहीं होगा काम
विधानसभा में जब इस मुद्दे पर संबंधित विभाग के मंत्री से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की तकनीकी पेचीदगियों का हवाला दिया। मंत्री ने सदन को बताया, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, हर मनपा को पशुओं के लिए एक सर्वसुविधायुक्त शेल्टर होम बनाना अनिवार्य है।
नसबंदी के बाद कुत्ते को कम से कम पांच दिनों तक केंद्र में डॉक्टर की देखरेख में रखना पड़ता है, इसलिए सिर्फ नसबंदी केंद्र बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए उचित प्लानिंग, शेड्यूलिंग और बुनियादी ढांचे की जरूरत है। साथ ही कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार मनपा को ही इनके भोजन और दवाइयों की व्यवस्था देखनी होगी।
स्नेहा दुबे विधायक ने बाताया की सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का केवल विधानसभा में उल्लेख कर देना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी और समयबद्ध तरीके से लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है। वसई-विरार में अतिरिक्त नसबंदी केंद्र खोलना, सुसज्जित एनिमल शेल्टर बनाना और सरकार के आदेशों का कड़ाई से पालन कराने के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन करना आज समय की सबसे बड़ी मांग है।
