
तेलंगाना के बुनकर नल्ला विजय कुमार ने बनाई अद्भुत रेशमी साड़ीImage Credit source: X/@PTI
अमूमन एक साड़ी को रखने के लिए हमें अलमारी में काफी जगह चाहिए होती है, लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि पूरी 5.5 मीटर लंबी साड़ी एक छोटी सी माचिस की डिब्बी (Matchbox Silk Saree) में समा सकती है? जी हां, यह बिल्कुल सच है. तेलंगाना के सिरसिल्ला (Sircilla) के एक बेहद प्रतिभाशाली बुनकर ने यह कमाल कर दिखाया है. उन्होंने इस खास और दुर्लभ रेशमी साड़ी को आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध श्रीशैलम मंदिर में देवी भ्रमरम्बा (Srisailam Goddess Bharamaraba) को भेंट किया है.
1 हफ्ता, पूरा परिवार और अद्भुत कारीगरी
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, ये खास साड़ी ‘कलारत्न’ पुरस्कार पाने वाले हथकरघा बुनकर नल्ला विजय कुमार (Nalla Vijay Kumar) ने बनाई है. उन्होंने बताया कि इस अनोखी साड़ी को उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर करीब एक हफ्ते की मेहनत के बाद पारंपरिक हथकरघे पर बुना है. विजय कुमार ने इस सुंदर साड़ी को बनाने का पूरा श्रेय देवी मां की असीम कृपा को दिया है.
इस ‘जादुई’ साड़ी की खासियत क्या है?
यह साड़ी पूरी तरह से मानक आकार की है, जिसकी लंबाई 5.5 मीटर और चौड़ाई 48 इंच है. पूरी लंबाई होने के बावजूद इस रेशमी साड़ी का वजन केवल 200 ग्राम है. इसे पारंपरिक ‘इकत’ (Ikkat) पैटर्न में बेहद खूबसूरती से डिजाइन किया गया है. इसकी बुनाई इतनी महीन और बेहतरीन है कि मोड़ने पर यह साड़ी एक छोटी सी माचिस की डिब्बी में आसानी से फिट हो जाती है.
मंदिर ट्रस्ट ने किया स्वागत और सम्मान
नल्ला विजय कुमार ने इस अनोखी साड़ी को श्री भ्रामरांबा मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर ट्रस्ट बोर्ड (Sri Bhramaramba Mallikarjuna Swamy temple Trust Board) के अध्यक्ष पोथुगुंटा रमेश नायडू और न्यासी बोर्ड की सदस्य कोडे कंथिवर्धिनी की उपस्थिति में भेंट किया. इस अद्भुत भेंट को स्वीकार करते हुए मंदिर के अध्यक्ष रमेश नायडू ने बुनकर की कला की जमकर सराहना की.
उन्होंने कहा कि हथकरघा बुनाई केवल एक पेशा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही हमारी देश की एक महान और गौरवशाली कला है. उन्होंने सभी से अपील की कि वे देश के बुनकरों और हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा दें. उपहार स्वरूप, मंदिर प्रशासन की ओर से इस प्रतिभाशाली बुनकर और उनकी टीम को विशेष दर्शन की व्यवस्था कराई गई.
यहां देखिए माचिस की डिब्बी में समा जाने वाली साड़ी का वीडियो
VIDEO | Andhra Pradesh: Sircilla weaver offers matchbox-sized silk saree to Srisailam deity, showcasing handloom craftsmanship.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/Q6LvyIv5vB
— Press Trust of India (@PTI_News) July 14, 2026

अभिषेक राय
अभिषेक राय (Abhishek Roy) अभी TV9 भारतवर्ष के डिजिटल विंग में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (Assistant News Editor) हैं. पत्रकारिता में उन्हें 14 साल से ज्यादा का अनुभव है और इस फील्ड में उनकी अपनी एक अलग पहचान है. अपने करियर में उन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया है. शुरुआत में वे भोपाल के 'पीपुल्स समाचार' अखबार (Peoples Samachar) से जुड़े. यहां उन्होंने प्रिंट मीडिया का काम सीखा. इसके बाद वे दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) ग्रुप में लंबे समय तक रहे. खास बात ये कि उन्होंने भास्कर के अखबार और वेबसाइट, दोनों जगह काम किया. इससे उन्हें पुरानी और नई, दोनों तरह की पत्रकारिता का अनुभव मिला. अभिषेक ने अहमदाबाद के 'जानो दुनिया' (Jano Duniya) न्यूज चैनल में भी काम किया. यहां उन्होंने टीवी मीडिया में अपनी काबिलियत दिखाई. अभिषेक को राजनीति और विदेशी मामलों की अच्छी समझ है. वे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक कूटनीति को बहुत ही बारीकी से समझते हैं. हालांकि, वर्तमान में डिजिटल मीडिया की बदलती मांग को देखते हुए वे अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. इन दिनों वे ट्रेंडिंग खबरों, वायरल टॉपिक्स और हटके कंटेंट पर काम कर रहे हैं. अभिषेक के लिए पत्रकारिता महज एक पेशा या सिर्फ पाठकों तक सूचनाएं या खबरें पहुंचाना नहीं है. उनका विजन और उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक है. वे मानते हैं कि एक पत्रकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि पाठकों को हर बार कुछ नया और अनूठा पढ़ने को मिले. कंटेंट ऐसा हो जो पाठकों की सोच के दायरे को विस्तृत करे और उन्हें एक नया नजरिया दे. अभिषेक को पत्रकारिता के साथ-साथ ट्रैवलिंग का भी शौक है. भागदौड़ भरी जिंदगी से जब भी फुर्सत मिलती है, वे पहाड़ों की तरफ निकल जाते हैं और सुकून के पल बिताते हैं.
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