भोपाल बायपास पर 5 साल और लगेगा टोल: 7% तक दरें बढ़ीं, हर साल महंगाई के हिसाब से बढ़ेगा शुल्क - Bhopal News

Published on 18 अक्टू॰ 2026

भोपाल1 घंटे पहले

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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

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भोपाल बायपास से गुजरने वाले वाहन चालकों को अगले 5 साल तक टोल देना होगा। राज्य सरकार ने बायपास पर 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक टोल वसूली की मंजूरी दी है।

पिछले अनुबंध की तुलना में टोल दरों में 6 से 7% तक बढ़ोतरी हुई है। नई व्यवस्था में शुल्क थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर हर साल संशोधित किया जाएगा। यानी वाहन चालकों को आने वाले वर्षों में महंगाई के हिसाब से बढ़ा हुआ टोल चुकाना पड़ सकता है।

लोक निर्माण विभाग (PWD) के सूत्रों के मुताबिक, पिछला टोल अनुबंध जुलाई 2026 में समाप्त हो रहा था। सरकार ने नई अवधि के लिए वसूली की अनुमति देने के साथ पीडब्ल्यूडी को इसे पांच साल और बढ़ाने का अधिकार भी दिया है।

हालांकि, अतिरिक्त अवधि के लिए आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यह संबंधित आदेश और शर्तों पर निर्भर करेगा।

टोल वसूली को लेकर विधानसभा में उठ चुके मामले

भोपाल बायपास पर टोल वसूली का मामला पहले भी विधानसभा में उठ चुका है। निवेशक कंपनी का अनुबंध निरस्त होने के बाद MPRDC ने दिसंबर 2019 से टोल वसूली शुरू की थी। इसके बाद वसूली की वैधता, निवेशक से बकाया राशि की वसूली और टोल से होने वाली आय-व्यय का हिसाब सवालों के घेरे में आया।

दिसंबर 2025: निवेशक और टोल वसूली का हिसाब

विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में पूछा था कि भोपाल बायपास पर टोल वसूली कब शुरू हुई, निवेशक कंपनी ने 11 दिसंबर 2019 तक कितनी राशि वसूली और अलग-अलग श्रेणी के कितने वाहन निकले। उन्होंने कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने, अनुबंध निरस्त करने और सरकार द्वारा बाद में की गई वसूली का ब्योरा भी मांगा था।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने जवाब में बताया था कि निवेशक ने 26 मई 2013 से 11 दिसंबर 2019 तक 149.89 करोड़ रुपए टोल वसूला। कंपनी को 22 फरवरी 2021 को ब्लैकलिस्ट किया गया और अनुबंध 17 जुलाई 2020 को निरस्त किया गया।

सरकार ने 12 दिसंबर 2019 से टोल वसूली शुरू की थी। वाहन श्रेणीवार विस्तृत जानकारी के लिए विभाग ने परिशिष्ट का हवाला दिया था।

फरवरी 2026 में फिर ₹241.97 करोड़ की वसूली और सालाना प्रीमियम पर सवाल

विधानसभा में प्रताप ग्रेवाल ने भोपाल बायपास के निवेशक से 241.97 करोड़ रुपए की वसूली के लिए मिसरोद थाने में दर्ज एफआईआर की स्थिति पूछी थी।

सवाल में यह भी पूछा गया कि क्या अनुबंध के अनुसार निवेशक को हर साल 21 करोड़ रुपये प्रीमियम देना था और छह साल तक इसकी वसूली क्यों नहीं हुई।

इसके अलावा 12 दिसंबर 2019 से दिसंबर 2025 तक एमपीआरडीसी द्वारा वसूले गए टोल और रखरखाव तथा कार्यालय प्रबंधन पर हुए खर्च की जानकारी मांगी गई थी। इन सवालों के जरिए टोल वसूली के साथ सरकारी आय-व्यय और बकाया वसूली की स्थिति पर भी जानकारी मांगी गई।

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने टोल वसूली पर सवाल उठाए थे।

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने टोल वसूली पर सवाल उठाए थे।

टोल वसूली पर पुराना विवाद क्या था?

दिसंबर 2025 में पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने भोपाल बायपास पर एमपीआरडीसी की टोल वसूली पर सवाल उठाए थे।

उन्होंने आरोप लगाया था कि 12 दिसंबर 2019 से वसूली शुरू हुई, जबकि संबंधित अधिसूचना 8 दिसंबर 2020 को जारी हुई। उन्होंने वसूली बंद करने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और वसूली गई राशि लौटाने की मांग की थी।

मार्च 2026 में विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में पेश आंकड़ों के आधार पर कई सड़कों पर अधिसूचना से पहले टोल वसूली शुरू होने का आरोप लगाया।

दूसरी ओर, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा था कि टोल की राशि सरकारी खजाने में जमा हुई है और अधिसूचना कई बार पिछली तारीख से भी जारी होती है।

इसलिए इस मामले में अवैध वसूली का निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित अधिसूचना, अनुबंध और विभागीय जवाब को साथ देखना जरूरी है।

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