Vijayawada News: आमतौर पर किसी होटल में एक वक्त का खाना खाने के लिए कम से कम 100 रुपए खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में एक ऐसा भोजनालय है, जहां लोगों को सिर्फ 20 रुपए में भरपेट खाना मिल रहा है. मुगलराजपुरम इलाके में चल रहे ‘माना भोजन’ भोजनालय में चावल, करी, चटनी, सांभर और छाछ समेत पूरा भोजन परोसा जाता है.
इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद और कम आय वाले लोगों को कम कीमत में अच्छा खाना उपलब्ध कराना है. साक्षी आदि नारायण और उनके भाई मिलकर इस भोजनालय को चला रहे हैं. उनका कहना है कि लोगों की सेवा करने के उद्देश्य से भोजन की कीमत बेहद कम रखी गई है.
50 रुपए की लागत, सिर्फ 20 रुपए में भोजन
आयोजकों के मुताबिक, एक व्यक्ति का पूरा भोजन तैयार करने में करीब 50 रुपए का खर्च आता है. हालांकि, लोगों से इसके लिए सिर्फ 20 रुपए लिए जाते हैं. बाकी खर्च आयोजक खुद उठाते हैं. भोजनालय में रोजाना चावल, करी, चटनी, सांभर और छाछ परोसी जाती है. आयोजकों का कहना है कि कम कीमत होने के बावजूद खाने की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है.
दोपहर 12 से 3 बजे तक लगता है खाना
‘माना भोजन’ हर दिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक खुला रहता है. दोपहर 12 बजे से ही यहां खाना खाने वालों की कतार लगनी शुरू हो जाती है. यहां छात्र, कर्मचारी, मजदूर और अविवाहित पुरुष बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. खासकर ऐसे अविवाहित पुरुषों के लिए यह भोजनालय काफी मददगार साबित हो रहा है, जिन्हें अपने कमरे में रोज खाना बनाने में परेशानी होती है. महंगाई के दौर में सिर्फ 20 रुपए में भरपेट भोजन मिलना उनके लिए बड़ी राहत है.
छात्र बोले- स्वाद अच्छा लगा तो रोज आने लगे
यहां खाना खाने वाले एक छात्र ने बताया कि उसे पहली बार जब 20 रुपए में लंच मिलने की जानकारी हुई तो उसने भोजनालय में खाना खाने का फैसला किया. पहली बार खाना खाने के बाद उसे स्वाद अच्छा लगा और इसके बाद वह अपने चार दोस्तों के साथ रोज यहां लंच करने लगा. छात्र के मुताबिक, 20 रुपए कोई बड़ी रकम नहीं है, लेकिन इतनी कम कीमत में मिलने वाला खाना काफी अच्छा है. उसे यहां का भोजन बाहर के होटलों के खाने से भी ज्यादा स्वादिष्ट लगता है.
घर जैसा खाना बनाने पर जोर
आयोजकों का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता पर खास ध्यान दिया जाता है. उनका प्रयास है कि लोगों को घर जैसा खाना मिले. इसके लिए वे खाना बनाने की प्रक्रिया पर खुद नजर रखते हैं. आयोजकों के मुताबिक, खाने में बाजार में मिलने वाले तैयार गरम मसाले और सूप पाउडर का इस्तेमाल नहीं किया जाता. जरूरी मसाला पाउडर भी घर पर तैयार किया जाता है, ताकि खाने का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर बनी रहे.
5 दिन में शुरू कर दी सेवा
आयोजकों ने बताया कि लोगों को सस्ता और अच्छा भोजन उपलब्ध कराने का विचार आने के बाद उन्होंने तेजी से तैयारियां पूरी कीं. महज पांच दिनों में भोजनालय की शुरुआत कर दी गई. फिलहाल यहां रोजाना करीब 100 से 200 लोगों को भोजन कराया जा रहा है. आयोजकों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में लोगों की संख्या बढ़ती है तो वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को भोजन उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे.
उनका यह भी कहना है कि अगर भोजन उपलब्ध रहा और लोगों की जरूरत बढ़ी तो निर्धारित तीन घंटे के समय के बाद भी खाना परोसने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी. ‘माना भोजन’ की यह पहल कम कीमत में सम्मानजनक और घर जैसा खाना उपलब्ध कराने की कोशिश के तौर पर लोगों के बीच पसंद की जा रही है.

आशीष कुमार मिश्रा
आशीष कुमार मिश्रा की 6 साल से जर्नलिज्म की Journey जारी है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बनाने में अहम योगदान भारत के राज्यों का है. इन राज्यों से जुड़ी हर खटपट, चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक, वो आप तक पहुंचाने में जुटा हुआ हूं. उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम बड़े राज्यों की सियासत को समझता हूं और बेबाकी से उसे लिखता हूं. जर्नलिज्म की Journey 2017 में न्यूज चैनल समाचार टुडे से स्टार्ट हुई, फिर नेशनल वॉइस के साथ भी काम करने का मौका मिला. दो न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल की तरफ में रुख किया. 2018 में पहली बार हैदराबाद में ईटीवी भारत की डिजिटल विंग टीम से जुड़ा. यहां साढ़े 3 साल का समय बिताने के बाद 2021 में दैनिक भास्कर (लखनऊ) की टीम से जुड़ा. अब यह सफर 2022 से टीवी9 भारतवर्ष के साथ चल रहा है. पत्रकारिता का मैंने ककहरा दैनिक जागरण इंस्टीट्यूट से सीखा. यहीं से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
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