थानेदार ने थाने में वर्दी की धौंस दिखाकर ऐसे रिश्वत ली, जैसे किडनैपर वसूली करता है। प्रेम संबंध के मामले में दोनों पक्षों में समझौता हो जाने के बावजूद युवक को 4 दिन थाने में बंद रखा और छोड़ने के एवज में 50 हजार रुपए मांगे।
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विधवा मां को गहने गिरवी रखने पड़े। मामला बारां जिले के मोठपुर थाने का है। पीड़िता ने ACB को शिकायत दी, लेकिन थानेदार देवकरण जाल में नहीं फंसा।
पीड़िता थानेदार के चैंबर में गई और रिश्वत देने लगी तो थानेदार ने मुंह पर अंगुली रखकर चुप रहने का इशारा किया और बोला- श…श…श…यहां कैमरे लगे हैं।
थानेदार और कॉन्स्टेबल ने रिश्वत लेने के लिए पीड़ित से जो भी कहा, वे सारी आपसी बातें वॉयस रिकॉर्डर में रिकॉर्ड हो गईं। 5 महीने बाद ACB मोठपुर थाने के थानेदार देवकरण, कॉन्स्टेबल कुलदीप के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। पढ़िए रिपोर्ट...
राजीनामे के बाद बेटे को छुड़ाने गई थी थाने
पीड़ित का बेटा और समाज की एक युवती एक दूसरे को पसंद करते थे। युवती चौथी बार अपना घर छोड़कर उसके बेटे के पास आ गई थी। इससे पहले तीन बार युवती को समझाकर उसके परिजनों के पास भेज दिया था।
युवती के परिजनों ने पीड़ित के बेटे के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने उसके बेटे को पकड़ लिया। बाद में दोनों पक्षों में राजीनामा हो गया था।
राजीनामे के बाद पीड़ित 22 फरवरी को 4 दिन से बारां के मोठपुर थाने में बंद अपने बेटे को छुड़ाने के लिए पहुंची। वहां थानेदार देवकरण ने बेटे को छोड़ने के एवज में 50 हजार रुपए मांगे। पीड़ित थाने से लौटी और एक परिचित को घटना के बारे में बताया।
पीड़ित की बहन इस परिचित के यहां मजदूरी करती है। परिचित के कहने पर पीड़ित ने 23 फरवरी को ACB में संपर्क किया। पीड़ित ने ACB को पूरा घटनाक्रम बताया।
उसने बताया- एक दिन पहले अपने बेटे को छोड़ने की गुहार को लेकर मोठपुर थाने गई थी। थाना इंचार्ज देवकरण ने पूरे दिन थाने पर बैठाए रखा। देर शाम को बेटे से मिलवाया। इसके बाद थानेदार ने अपने चैंबर में बुलवाया...

कैमरे से डरा थानेदार...बोला - मैं मदद कर रहा हूं
पूरी घटना बताने के बाद ACB ने थानेदार को रिश्वत लेते रंगे हाथों ट्रैप करने की तैयारी शुरू कर दी। पीड़ित ने बताया कि वह बहुत गरीब और कम पढ़ी-लिखी है।
वह हमेशा एक परिचित को थाने लेकर जाती है। ACB ने उस परिचित को ट्रैप का पूरा प्लान समझाया। अगले दिन 24 फरवरी को पीड़ित और उसका परिचित थाने पहुंचे। वहां पहुंचने से पहले उन्होंने रिकॉर्डर ऑन कर दिया था। रिकॉर्डर में सारी बातचीत रिकॉर्ड हो गई…
- पीड़ित : आपने 50 हजार के लिए कहा था। मेरे पास इतने नहीं हैं।
- थानेदार : तो?
- पीड़ित : 20 हजार रुपए की ही व्यवस्था कर पाई हूं।
- थानेदार : ठीक है।
- पीड़ित : मैं 20 हजार रुपए आपको देने के लिए साथ लाई हूं...
(थानेदार ने मुंह पर अंगुली रखी और चुप रहने का इशारा किया)
- थानेदार (धीरे से) : यहां कैमरे लगे हुए हैं। चुप होकर बैठो। मैं मदद कर रहा हूं।
- पीड़ित : कैसे साब?
- थानेदार : युवती के बयान तुम्हारे पक्ष में करवा दिए हैं। कल तुम्हारे लड़के को पेश कर देंगे। जमानत हो जाएगी।
(इसके बाद थानेदार ने रिश्वत लेने के लिए इशारा किया। कॉन्स्टेबल कुलदीप को अपने चैंबर में बुलाया और फिर सभी को बाहर भेज दिया।)

बेटे को कोर्ट ले जाते समय थानेदार-कॉन्स्टेबल से मिली, लेकिन हुआ शक
ACB टीम ने रिकॉर्डर देकर रिश्वत की बात करने के लिए कहा था, ताकि रिश्वत मांगने के आरोपों की पुष्टि हो सके, लेकिन पीड़ित ने थानेदार और कॉन्स्टेबल से बातचीत के बाद रिश्वत के पैसे दे दिए।
ऐसे में ACB को पहले से तैयारी का मौका नहीं मिला और ट्रैप की कार्रवाई नहीं हो सकी। थाने से लौटकर पीड़ित ने ACB टीम को सारी बात बता दी।
ACB ने रिकॉर्डर के जरिए थाने में हुई बातचीत को सुना तो पीड़ित की बताई बात सही निकली और रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई। पीड़ित ने ACB को कहा कि कल (25 फरवरी) रिश्वत के बाकी पैसे लेकर आने को कहा है।
जब वे लेंगे, तो उससे पहले आपको बता देंगे, जिससे आप रंगे हाथों पकड़ सकें। फिर ACB ने रिकॉर्डर को अपने पास सुरक्षित रख लिया।
अगले दिन बेटे को कोर्ट में ले जाते समय पीड़िता थानेदार और कॉन्स्टेबल मिली तो दोनों ने ही रिश्वत के बचे रुपयों को लेकर कोई बात नहीं की। ACB एएसपी विजय स्वर्णकार ने बताया कि थानेदार को ट्रैप को लेकर शक हो गया था।

5 महीने बाद ACB मोठपुर थाने के थानेदार और कॉन्स्टेबल के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
पीड़ित ने दूसरा शिकायती पत्र सौंपा
इसके बाद पीड़ित ने 13 मार्च को फिर ACB को संपर्क किया और कार्रवाई के लिए दूसरा शिकायती पत्र सौंपा। शिकायती पत्र में लिखा कि पुलिस ने 50 हजार मांगे थे, हमने 20 हजार दिए और बाकी बाद में देने को कहा था।
बाद में वे 20 हजार लेकर ही संतुष्ट हो गए और बकाया रकम देने के लिए ही नहीं कहा। इस कारण ट्रैप की कार्रवाई नहीं हो सकी, लेकिन रिश्वत की सारी बातें रिकॉर्डर में रिकॉर्ड हुई है। इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की।
ACB ने वापस वाइस रिकॉर्डर के मेमोरी कार्ड को निकलवाया। ACB ने रिकॉर्ड हुई बातचीत को विश्वास के दो व्यक्तियों को सुनाया। उन्होंने थानेदार और कॉन्स्टेबल की ही आवाज होने की पुष्टि भी की। इसके बाद 14 जुलाई को मामले की FIR दर्ज कर ली गई है।
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