पुणे मनपा का ढुलमुल रवैया: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी 500 करोड़ का होर्डिंग बकाया वसूलने में सुस्ती| Navbharat Live

Published on 6 अग॰ 2026

Updated On: Aug 06, 2026 | 03:17 PM IST

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सार

Pune Hoarding Dues: सुप्रीम कोर्ट से रास्ता साफ होने के बाद भी पुणे मनपा 500 करोड़ रुपये का होर्डिंग बकाया वसूलने में ढिलाई बरत रही है। अतिरिक्त आयुक्त ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

Despite Supreme Court clearance, Pune Municipal Corporation delays the recovery of over ₹500 crore in pending hoarding dues, sparking criticism

पुणे मनपा (सोर्स - सोशल मीडिया)

विस्तार

Pune Municipal Corporation Hoarding Dues: पुणे महानगर पालिका के ढुलमुल और लाचार रवैये के कारण शहर में विज्ञापन होर्डिंग्स के बकाया शुल्क की वसूली पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बकाया शुल्क वसूलने का रास्ता साफ किए जाने के बावजूद बीते चार महीनों से मनपा प्रशासन हाथ पर हाथ रखकर बैठा हुआ है।

महज खानापूर्ति के लिए कुछ नोटिस जारी करने के अलावा कोई भी ठोस दंडात्मक या व्यावहारिक कार्रवाई नहीं की गई है। शहर में करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम बकाया राशि लंबित होने के बावजूद प्रशासन की यह आपराधिक चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

शुल्क बढ़ोतरी के खिलाफ 2013 से अदालती लड़ाई

इस सुस्ती से न केवल महानगरपालिका को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाने वाले होर्डिंग माफिया के हौसले भी बुलंद हो रहे हैं। पुणे महानगर पालिका ने वर्ष 2013 में होर्डिंग शुल्क को 111 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 222 रुपये प्रति वर्ग मीटर किया था। इसके साथ ही हर वर्ष शुल्क में 10 प्रतिशत की नियमित बढ़ोतरी का प्रावधान भी मंजूर किया गया था।

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इस नीतिगत वृद्धि का विरोध करते हुए होर्डिंग व्यवसायियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में यह साफ कर दिया कि स्थानीय निकाय को अपने अधिकार क्षेत्र में विज्ञापन शुल्क निर्धारित करने और उसमें वृद्धि करने का पूरा अधिकार है।

प्रशासनिक निष्क्रियता से माफिया को फायदा

दिसंबर 2025 में अदालत ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं, जिससे
पुणे मनपा के लिए लाइसेंस फीस की वसूली का कानूनी रास्ता साफ हो गया था। वर्ष 2013 से अब तक होर्डिंग शुल्क की बकाया राशि बढ़कर लगभग 500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

मनपा की निष्क्रियता से होर्डिंग माफिया को फायदा हो रहा है। बिना किसी सख्त कार्रवाई या जब्ती के डर के होर्डिंग कारोबारी बेखौफ होकर जाल फैला रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि मनपा एक तरफ शहर की बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए करोड़ों रुपये का कर्ज लेने की तैयारी कर रही है और वित्तीय तंगी का हवाला दे रही है।

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मनपा की सफाई

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अतिरिक्त आयुक्त प्रजित नायर ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा था, लेकिन वहां भी आदेश पर कोई रोक नहीं लगी। इसके बाद महानगर पालिका चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई और पिछले दो महीनों से जनगणना तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण के कार्य में भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की ड्यूटी लगी रही।

जल्द ही हमारी ओर से ठोस कदम उठाए जाएंगे

आयुक्त प्रजित नायर ने बाताया की सभी प्रशासनिक व्यस्तताओं के पूरा होते ही जल्द ही होर्डिंग शुल्क की बकाया वसूली और संशोधित विज्ञापन दरों को सख्ती से लागू करने के संबंध में निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।

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