मध्य प्रदेश: शिवपुरी में नरवर किले से 500 साल पुरानी और 3000 किलो की तोप चोरी, क्रेन-ट्रक लेकर आए थे 30 बदमाश - miscreants stole 500 year old three thousand kilogram cannon from shivpuris narwar fort

Published on 17 जुल॰ 2026

मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित नरवर किले से सिंधिया राजवंश की 500 साल पुरानी 3000 किलो वजनी तोप चोरी हो गई है। ...और पढ़ें

शिवपुरी के नरवर के किले से 500 साल पुरानी तोप चोरी

शिवपुरी के नरवर के किले से 500 साल पुरानी तोप चोरी

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से हथियारबंद बदमाशों ने सिंधिया राजवंश की 500 साल पुरानी तोप चोरी कर ली है। इस वारदात ने किले की सुरक्षा व्यवस्था और पुरातत्व विभाग के संरक्षण के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नरवर के किले में 14 तोपें रखी गई थीं, ऐतिहासिक तोप चोरी होने के बाद अब यह संख्या 13 रह गई है।

रात के अंधेरे में घुसे बदमाश

पुलिस के अनुसार, 5 और 16 जुलाई की दरम्यानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश किले में घुसे। बदमाश अपने साथ क्रेन और ट्रक जेसी मशीनें लेकर आए थे। किले के ओपन कचहरी परिसर में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में से 3000 किलो वजनी अष्टधातु की एक तोप को उठाकर ले गए।

घटना के समय ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी ने बताया कि बदमाशों के पास आधुनिक हथियार थे। उन्होंने जान से मारने की धमकी देकर हमें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। किले में पर्याप्त रोशनी और टॉर्च जैसी सुविधाएं तक नहीं थीं। हमारे पास सिर्फ लाठी थी। वारदात के बाद अब परिसर में 13 तोपें ही बची हैं।

तैयारी के साथ आए थे बदमाश

जांच में पता चला है कि बदमाश किले के पिछले रास्ते से दाखिल हुए थे। उन्हें पहले से पता था कि तोप कहां रखी है और उसे ले जाने के लिए कितने लोगों की जरूरत होगी। इसी कारण वे 25 से 30 की संख्या में और लोडिंग वाहन के साथ पहुंचे।

इस मामले में सबसे हैरानी की बात यह है कि करीब 12 दिन पहले भी किले और आसपास संदिग्ध गतिविधियां देखी गई थीं। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना भी दी थी, लेकिन सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई और न ही अतिरिक्त निगरानी की व्यवस्था की गई।

क्यों खास है तोप?

पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, यह तोप 16वीं शताब्दी की है। यह भारती सैन्य इतिहास और उस समय की उन्नत धातु कर्म तकनीक का प्रतीक है। इस तोप पर बनी विशेष नक्काशी और ऐतिहासिक चिह्न इसे खास और बेहद दुर्लभ बनाते हैं।

इस ऐतिहासिक धरोहर की कीमत पैसों में नहीं आंकी जा सकती है, लेकिन अवैध एंटीक बाजार में इसकी कीमत करोड़ों हो सकती है। इसी वजह से पुलिस को शक है कि इस वारदात के पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह का हाथ हो सकता है।

पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ डकैती और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। साइबर सेल की मदद से उन नेटवर्कों की भी पड़ताली की जा रही है जो ऐतिहासिक वस्तुओं की तस्करी से जुड़े हैं।