स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कंपनियों का फर्जीवाड़ा: कर्मचारियों की सैलरी-अंशदान से 54 करोड़ निकाले, PF खाते खाली - Bhopal News

Published on 21 अग॰ 2026

भोपाल/नर्मदापुरम/सागर/झाबुआ/मंडला/विदिशा28 मिनट पहलेलेखक: अमित शर्मा

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मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर, सुरक्षा गार्ड, वार्ड बॉय और रसोइयों जैसे पदों पर काम करने वाले छोटे कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) में करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा सामने आया है।

दैनिक भास्कर ने स्वास्थ्य विभाग और ईपीएफओ के आधिकारिक रिकॉर्ड (2022 से मई 2026) के 15,585 से अधिक पन्नों की पड़ताल की तो सामने आया कि 4 प्रमुख आउटसोर्स कंपनियों ने कर्मचारियों के वेतन से 12% पीएफ काटा और सरकार से भी 13% अंशदान व 1% पोर्टल चार्ज लिया। लेकिन 53 करोड़ 81 लाख 12 हजार 360 रुपए कर्मचारियों के पीएफ खातों में जमा ही नहीं कराए गए।

गंभीर बात यह है कि सीएमएचओ और सिविल सर्जन कार्यालयों में अधिकारियों और लेखापालों (अकाउंटेंट्स) की अनदेखी व मिलीभगत के चलते बिना सत्यापन और फर्जी/एडिटेड चालानों के आधार पर ही करोड़ों रुपए का भुगतान जारी कर दिया गया।

बैतूल जिले में तो मैसर्स ज्यूस इंटरप्राइजेज को दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में 2.08 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। जिले में कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या 250 थी, लेकिन रिकॉर्ड में 428 से 450 कर्मचारी दिखाकर सरकार से पीएफ का अतिरिक्त पैसा निकाला गया और वास्तविक कर्मचारियों का पीएफ भी गायब कर दिया गया।

कंपनियों के 15,585 पन्नों के रिकॉर्ड की जांच में खुलासा

10.20 करोड़ चोरी मृत्युंजय ट्रेडर्स

डायरेक्टर: गौरव पाठक

कंपनी ने झाबुआ और मंडला में 40.78 करोड़ का भुगतान लिया। हर महीने 2 से 3 कर्मचारियों के चालान लगाकर पूरे बिल पास कराए। 10.20 करोड़ से अधिक की पीएफ राशि जमा नहीं की गई।

1.17 करोड़ गायब गौरिका वेंचर प्रा. लिमिटेड डायरेक्टर: भूमिका पाठक

फर्म को मंडला सीएमएचओ ने 836 कर्मचारियों के लिए कार्यादेश दिया। कंपनी ने पीएफ अंशदान के 4 माह में 1.17 करोड़ के बिल पास कराए, लेकिन अगस्त 2026 तक एक रुपए भी जमा नहीं किया।

5.32 करोड़ का अंतर स्कॉईबुल सिक्युरिटी सर्विस मालिक: रामरत्न द्विवेदी

8 से ज्यादा जिलों में कंपनी के 27 हजार कर्मचारियों का 8.44 करोड़ रु. पीएफ जमा होना था। कम वेतन पर चालान बनाकर सिर्फ 3.11 करोड़ रु. जमा किए, 5.32 करोड़ रु. जमा नहीं हुए। {कंपनी के मैनेजर प्रशांत चौहान से इस बारे में पूछा तो उन्होंने आवाज नहीं आने की बात कहकर बाद में बात करने को कहा और फोन काट दिया।

हमारा अभी पेमेंट ही नहीं हुआ है, तो पीएफ कैसे जमा करें। वहीं दूसरी कंपनी मृत्युंजय के सभी कर्मचारियों की पीएफ राशि जमा करते हैं।' -गौरव पाठक, डायरेक्टर मृत्युंजय ट्रेडर्स/ पार्टनर-गौरिका वेंचर

स्वास्थ्य विभाग के एक पीड़ित आउटसोर्स कर्मचारी ने बताया कि हर महीने उसकी सैलरी से 1,500 से 1,800 रुपए तक पीएफ काटा गया, लेकिन जब ईपीएफओ पोर्टल पर पासबुक चेक की तो खाते में बैलेंस शून्य मिला।

कंपनियों पर एफआईआर, अफसरों से रिकवरी संभव

भास्कर एक्सपर्ट - गिरीश पटवर्धन, संविधान विशेषज्ञ

बिना चालान सत्यापन के भुगतान करना सीधे तौर पर जवाबदेही और भ्रष्टाचार का मामला है।

कंपनियों पर: ईपीएफ अधिनियम के तहत बकाया राशि की वसूली, 100% तक हर्जाना, बैंक गारंटी जब्ती, ब्लैकलिस्टिंग और धोखाधड़ी (बीएनएस/आईपीसी) की धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा सकती है।

अफसरों पर: बिना वेरिफिकेशन और जांच-पड़ताल के बिल पास करने वाले सीएमएचओ, सिविल सर्जन और अकाउंटेंट पर विभागीय जांच कराकर पद से निलंबन और सरकारी धन के नुकसान की रिकवरी की कार्रवाई भी हो सकती है।

हर जिले से रिकॉर्ड मांगे, अफसर बोले- कार्रवाई करेंगे

मामला संज्ञान में है। वित्त विभाग को जांच के निर्देश दिए हैं। सभी जिलों से बिल-पीएफ से जुड़ी जानकारी मंगाई है। कंपनियों से पीएफ वसूल कर जमा कराएंगे।' -दिशा नागवंशी, एएमडी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन

मामला गंभीर है। आउटसोर्स कंपनियों और बिल पास करने वाले सीएमएचओ, सिविल सर्जन और लेखापालों की भूमिका की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।' -एस. धनराजू, आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा

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