Madan Bhaiya MLA Fund Report MLALAD: चार वर्षों में 567 विकास कार्य प्रस्तावित, 365 को मिली स्वीकृति

Published on 14 जुल॰ 2026

Madan Bhaiya MLA Fund Report में मुजफ्फरनगर जिले की खतौली विधानसभा सीट पर विधायक निधि से प्रस्तावित विकास कार्यों की चार साल की तस्वीर सामने आई है। उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग की चार आधिकारिक विधायकवार PDF रिपोर्टों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 के बीच खतौली विधायक मदन भैया के नाम से कुल 567 विकास कार्यों की संस्तुति दर्ज की गई। इनमें से 365 कार्यों को स्वीकृति मिली, दो प्रस्ताव संबंधित रिपोर्टों में स्वीकृति के लिए लंबित रहे और 200 प्रस्ताव निरस्त दर्ज किए गए।

चार वर्षों के आंकड़ों में सबसे अधिक 286 विकास कार्य वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रस्तावित किए गए। लेकिन इसी वर्ष 129 प्रस्ताव निरस्त भी हुए। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 96 कार्यों की संस्तुति की गई और सभी 96 को स्वीकृति मिल गई। वर्ष 2024-25 में 136 प्रस्तावों में से 71 स्वीकृत, एक लंबित और 64 निरस्त रहे। वहीं 2026-27 की जुलाई 2026 तक उपलब्ध रिपोर्ट में 49 कार्य प्रस्तावित, 41 स्वीकृत, एक लंबित और सात निरस्त दर्ज हैं।

इन आंकड़ों के अनुसार चार वर्षों में मदन भैया के नाम से दर्ज कुल प्रस्तावों की स्वीकृति दर करीब 64.37 प्रतिशत रही। निरस्त प्रस्तावों का हिस्सा लगभग 35.27 प्रतिशत है। यह अनुपात बताता है कि एक ओर खतौली विधानसभा से बड़ी संख्या में विकास प्रस्ताव भेजे गए, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक, तकनीकी अथवा पात्रता संबंधी कारणों से हर प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चारों आधिकारिक PDF में रुपये में आवंटन, जारी धनराशि या वास्तविक खर्च का विवरण नहीं है। रिपोर्टों में केवल विकास कार्यों की संख्या और उनकी स्वीकृति की स्थिति दर्ज है। इसलिए इसे विधायक निधि की वित्तीय व्यय रिपोर्ट नहीं, बल्कि MLALAD कार्य-स्वीकृति रिपोर्ट के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।

Madan Bhaiya MLA Fund Report: चार वर्षों का वर्षवार विवरण

वित्तीय वर्षअनुशंसित कार्यकुल लंबितकुल स्वीकृतनिरस्त कार्यस्वीकृति प्रतिशत
2023-24960960100%
2024-251361716452.21%
2025-26286015712954.90%
2026-2749141783.67%
कुल567236520064.37%

चार वर्षों के कुल आंकड़ों में अनुशंसित, लंबित, स्वीकृत और निरस्त प्रस्तावों का योग आपस में मेल खाता है। कुल 567 अनुशंसित कार्यों में 365 स्वीकृत, दो लंबित और 200 निरस्त दर्ज हैं।

हालांकि प्रत्येक वित्तीय वर्ष की रिपोर्ट उस समय की स्थिति बताती है जब डेटा पोर्टल से निर्यात किया गया। किसी पुराने वर्ष की रिपोर्ट में लंबित दिखाया गया प्रस्ताव बाद में स्वीकृत, संशोधित या निरस्त हो सकता है। इसीलिए इन आंकड़ों को संबंधित रिपोर्ट की तारीख की स्थिति के रूप में पढ़ना अधिक उचित होगा।

वर्ष 2023-24 में सभी 96 विकास प्रस्ताव स्वीकृत

वित्तीय वर्ष 2023-24 की आधिकारिक विधायकवार रिपोर्ट में क्रम संख्या 15 पर मदन भैया, विधानसभा क्षेत्र संख्या 15 खतौली और नोडल जनपद मुजफ्फरनगर दर्ज हैं। उनके नाम के सामने कुल 96 अनुशंसित और 96 स्वीकृत कार्य दिखाए गए हैं। कोई कार्य स्वीकृति के लिए लंबित नहीं था और कोई प्रस्ताव निरस्त भी नहीं हुआ।

वित्तीय वर्ष 2023-24 के प्रमुख आंकड़े

विवरणसंख्या
अनुशंसित कार्य96
कुल स्वीकृत कार्य96
लंबित प्रस्ताव0
निरस्त प्रस्ताव0
स्वीकृति दर100%

वर्ष 2023-24 चारों रिपोर्टों में मदन भैया के लिए सबसे बेहतर स्वीकृति प्रदर्शन वाला वर्ष रहा। विधायक द्वारा भेजे गए सभी प्रस्ताव प्रशासनिक प्रक्रिया में स्वीकार किए गए।

विधायक निधि का कोई प्रस्ताव स्वीकृत होने से पहले भूमि, कार्य की सार्वजनिक उपयोगिता, अनुमानित लागत, कार्यदायी संस्था और योजना की पात्रता जैसी कई जांचों से गुजरता है। ऐसे में सभी 96 प्रस्तावों की मंजूरी यह संकेत देती है कि उस वर्ष भेजे गए प्रस्ताव प्रारंभिक स्तर पर योजना के नियमों के अनुरूप पाए गए।

लेकिन इस रिपोर्ट से यह नहीं पता चलता कि ये 96 काम किस गांव या वार्ड में प्रस्तावित थे। कार्यों के नाम, लागत, निर्माण शुरू होने की तारीख और पूर्णता की स्थिति भी उपलब्ध विधायकवार सारांश में दर्ज नहीं है।

इसलिए 96 कार्य स्वीकृत होने का अर्थ यह नहीं माना जा सकता कि सभी कार्य उसी वर्ष पूरे भी हो गए थे। स्वीकृति के बाद निविदा, धनराशि जारी करने, निर्माण और अंतिम भुगतान की प्रक्रिया अलग होती है।

2024-25 में 136 प्रस्ताव, 64 कार्य निरस्त

वित्तीय वर्ष 2024-25 में खतौली विधायक के नाम से 136 विकास कार्यों की संस्तुति दर्ज हुई। इनमें 71 कार्यों को मंजूरी मिली, एक प्रस्ताव स्वीकृति के लिए लंबित रहा और 64 प्रस्ताव निरस्त कर दिए गए।

वर्ष 2024-25 का विवरण

विवरणसंख्या
अनुशंसित कार्य136
कुल लंबित1
कुल स्वीकृत71
निरस्त कार्य64
स्वीकृति दर52.21%
निरस्तीकरण दर47.06%

इस वर्ष अनुशंसित प्रस्तावों में लगभग आधे को ही स्वीकृति मिल सकी। कुल 136 में से 71 प्रस्ताव स्वीकृत हुए। स्वीकृति प्रतिशत करीब 52.21 रहा।

वहीं 64 प्रस्तावों का निरस्त होना महत्वपूर्ण है। यह कुल अनुशंसित कार्यों का करीब 47.06 प्रतिशत है। यानी लगभग हर दूसरा प्रस्ताव प्रशासनिक स्वीकृति तक नहीं पहुंच पाया।

प्रस्ताव निरस्त होने के संभावित कारण

आधिकारिक रिपोर्ट किसी विशेष प्रस्ताव के निरस्त होने का कारण नहीं बताती। विधायक निधि योजना में सामान्यतः प्रस्ताव निम्न परिस्थितियों में अस्वीकृत हो सकते हैं—

  • प्रस्तावित निर्माण स्थल निजी या विवादित हो;
  • भूमि संबंधित विभाग या सार्वजनिक संस्था के नाम न हो;
  • वही काम किसी दूसरी सरकारी योजना में पहले से स्वीकृत हो;
  • प्रस्ताव योजना के नियमों के तहत पात्र न हो;
  • तकनीकी आगणन में आवश्यक जानकारी अधूरी हो;
  • प्रस्तावित लागत उपलब्ध विधायक निधि से अधिक हो;
  • कार्य का स्वरूप सार्वजनिक के बजाय सीमित या निजी लाभ का हो;
  • कार्यदायी संस्था की तकनीकी आपत्ति हो;
  • प्रस्ताव में स्थल, लंबाई या निर्माण मानक स्पष्ट न हों।

इन कारणों में से खतौली के 64 प्रस्ताव किन वजहों से निरस्त हुए, यह सारांश रिपोर्ट से पता नहीं चलता। इसके लिए कार्यवार रिपोर्ट अथवा जिला प्रशासन के स्वीकृति आदेशों की आवश्यकता होगी।

स्थानीय पारदर्शिता के लिए निरस्त प्रस्तावों का नाम, स्थान, अनुमानित लागत और निरस्तीकरण का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट होगा कि कमी प्रस्ताव तैयार करने में थी, जमीन की उपलब्धता में थी या जिला स्तर की तकनीकी प्रक्रिया में।

2025-26 में सबसे अधिक 286 विकास कार्य प्रस्तावित

वित्तीय वर्ष 2025-26 में मदन भैया के नाम से चार वर्षों में सबसे अधिक 286 विकास कार्यों की संस्तुति की गई। इनमें से 157 को स्वीकृति मिली और 129 प्रस्ताव निरस्त दर्ज हुए। संबंधित पंक्ति में कोई प्रस्ताव लंबित नहीं दिखाया गया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़े

विवरणसंख्या
अनुशंसित कार्य286
कुल स्वीकृत157
कुल लंबित0
निरस्त कार्य129
स्वीकृति प्रतिशत54.90%
निरस्तीकरण प्रतिशत45.10%

वर्ष 2025-26 में प्रस्तावों की संख्या 2024-25 की तुलना में 150 बढ़ गई। यह करीब 110 प्रतिशत की वृद्धि है। लेकिन स्वीकृत कार्यों की संख्या 71 से बढ़कर 157 होने के बावजूद निरस्त प्रस्ताव भी 64 से बढ़कर 129 हो गए।

इस वर्ष स्वीकृति दर लगभग 54.90 प्रतिशत रही। यानी प्रस्तावित कार्यों में आधे से कुछ अधिक को मंजूरी मिली। शेष 45.10 प्रतिशत प्रस्ताव निरस्त हुए।

प्रस्तावों की संख्या बढ़ी, स्वीकृति दर सीमित रही

286 विकास प्रस्ताव किसी एक विधानसभा क्षेत्र के लिए बड़ी संख्या है। यह स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग, विद्यालय, पेयजल या सार्वजनिक भवन जैसी जरूरतों की व्यापक मांग को दिखा सकता है।

लेकिन अधिक प्रस्ताव भेजना अपने आप में बेहतर प्रदर्शन का प्रमाण नहीं है। वास्तविक प्रभाव इस बात से तय होगा कि—

  • प्रस्ताव कितने संतुलित और पात्र थे;
  • उनमें कितने कार्यों को समय पर मंजूरी मिली;
  • कितने काम जमीन पर शुरू हुए;
  • कितने निर्माण पूरे हुए;
  • स्वीकृत लागत के मुकाबले वास्तविक भुगतान कितना हुआ;
  • निर्माण से कितनी आबादी को लाभ मिला।

वर्ष 2025-26 में 129 प्रस्तावों का निरस्त होना यह भी बताता है कि बड़ी संख्या में प्रस्ताव योजना के मानकों अथवा प्रशासनिक जांच को पूरा नहीं कर सके।

यदि एक ही तरह की तकनीकी कमियां बार-बार सामने आईं तो विधायक कार्यालय और जिला प्रशासन के बीच प्रस्ताव तैयार करने से पहले बेहतर समन्वय की जरूरत थी। भूमि सत्यापन और तकनीकी पात्रता पहले जांच लेने से निरस्तीकरण की संख्या कम की जा सकती थी।

2026-27 में 49 प्रस्ताव, 41 को मिली मंजूरी

वित्तीय वर्ष 2026-27 की आधिकारिक रिपोर्ट में क्रम संख्या 15 पर मदन भैया के नाम से कुल 49 विकास कार्य अनुशंसित दर्ज हैं। इनमें 41 कार्यों को स्वीकृति मिली, एक प्रस्ताव लंबित और सात प्रस्ताव निरस्त दर्ज हैं।

वर्ष 2026-27 की स्थिति

विवरणसंख्या
अनुशंसित कार्य49
कुल स्वीकृत41
कुल लंबित1
निरस्त कार्य7
स्वीकृति प्रतिशत83.67%
निरस्तीकरण प्रतिशत14.29%

वित्तीय वर्ष 2026-27 की स्वीकृति दर 83.67 प्रतिशत है। यह 2024-25 और 2025-26 के मुकाबले काफी बेहतर है। निरस्त प्रस्तावों का अनुपात भी घटकर 14.29 प्रतिशत रह गया।

लेकिन वर्ष 2026-27 की रिपोर्ट को पिछले तीन वर्षों के अंतिम आंकड़ों की तरह नहीं पढ़ा जा सकता। यह रिपोर्ट 13 जुलाई 2026 को निर्यात की गई थी। उस समय वित्तीय वर्ष के केवल शुरुआती तीन महीने से कुछ अधिक समय ही बीता था।

जुलाई 2026 के बाद नए विकास प्रस्ताव पोर्टल पर दर्ज हो सकते हैं। पहले से दर्ज लंबित प्रस्ताव स्वीकृत या निरस्त हो सकते हैं। इसलिए 2026-27 के 49 अनुशंसित और 41 स्वीकृत कार्य पूरे वित्तीय वर्ष का अंतिम आंकड़ा नहीं हैं।

चार वर्षों में 567 प्रस्तावों का क्या अर्थ है?

चारों रिपोर्टों में कुल 567 विकास कार्यों की संस्तुति दर्ज होना बताता है कि खतौली विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि के माध्यम से बड़ी संख्या में स्थानीय जरूरतों को संबोधित करने की कोशिश हुई।

वर्षवार प्रस्तावों की संख्या में बड़ा अंतर दिखाई देता है—

वित्तीय वर्षअनुशंसित कार्यपिछले वर्ष से बदलाव
2023-2496
2024-2513640 की वृद्धि
2025-26286150 की वृद्धि
2026-2749आंशिक वित्तीय वर्ष

वर्ष 2025-26 में सबसे ज्यादा प्रस्ताव आए। अकेले इसी वर्ष चार वर्षों के कुल प्रस्तावों का लगभग 50.44 प्रतिशत हिस्सा दर्ज हुआ।

वर्ष 2023-24 में प्रस्तावों की संख्या कम थी, लेकिन स्वीकृति दर 100 प्रतिशत रही। इसके विपरीत 2025-26 में प्रस्ताव सबसे अधिक थे, लेकिन करीब 45 प्रतिशत प्रस्ताव निरस्त हो गए।

यह तुलना बताती है कि केवल प्रस्तावों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और पात्रता भी महत्वपूर्ण है।

365 स्वीकृत कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है?

चार वर्षों में कुल 365 विकास कार्यों को स्वीकृति मिली। लेकिन उपलब्ध PDF रिपोर्ट से इन कार्यों की भौतिक प्रगति नहीं मिलती।

स्वीकृति मिलने के बाद किसी काम को पूरा होने तक कई चरणों से गुजरना पड़ता है—

  1. विधायक द्वारा संस्तुति;
  2. भूमि और स्थल का सत्यापन;
  3. तकनीकी अनुमान तैयार होना;
  4. प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति;
  5. कार्यदायी संस्था का निर्धारण;
  6. आवश्यकता होने पर निविदा;
  7. पहली किस्त जारी होना;
  8. निर्माण कार्य शुरू होना;
  9. मौके पर निरीक्षण;
  10. निर्माण पूर्ण होना;
  11. उपयोगिता प्रमाणपत्र;
  12. अंतिम भुगतान।

इसलिए 365 स्वीकृत कार्यों को 365 पूर्ण कार्य नहीं माना जा सकता। यह पता लगाने के लिए अलग कार्यवार प्रगति रिपोर्ट देखनी होगी।

इसी तरह 365 स्वीकृत कार्यों की कुल लागत भी ज्ञात नहीं है। अलग-अलग कार्यों की लागत बहुत भिन्न हो सकती है। एक छोटी इंटरलॉकिंग गली और बड़े सामुदायिक भवन को रिपोर्ट में एक-एक कार्य के रूप में गिना जाएगा, लेकिन दोनों की लागत समान नहीं होगी।

विधायक निधि में वास्तविक खर्च कितना हुआ?

चारों विधायकवार PDF में रुपये में धनराशि का विवरण उपलब्ध नहीं है। इनमें निम्न जानकारी नहीं दी गई—

  • वर्षवार नई विधायक निधि;
  • पिछले वर्ष की बची राशि;
  • कुल उपलब्ध धनराशि;
  • स्वीकृत कार्यों की लागत;
  • वास्तविक भुगतान;
  • प्रतिबद्ध धनराशि;
  • शेष बजट;
  • प्रति कार्य औसत लागत।

इसलिए इन रिपोर्टों के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि मदन भैया ने चार वर्षों में कितनी विधायक निधि खर्च की।

रुपये में वास्तविक स्थिति जानने के लिए उत्तर प्रदेश विधायक निधि के आधिकारिक MLALAD पोर्टल पर विधायकवार बजट आवंटन और व्यय रिपोर्ट देखनी होगी।

वर्षवार व्यापक रिपोर्टों के लिए ये लिंक उपयोगी हैं—

  • UP MLA Fund Report 2023-24
  • UP MLA Fund Report 2024-25
  • UP MLA Fund Report 2025-26
  • UP MLA Fund Report 2026-27

विधायक निधि और MLALAD से जुड़ी सभी विशेष रिपोर्टें उत्तर प्रदेश विधायक निधि रिपोर्ट सेक्शन पर पढ़ी जा सकती हैं।

मदन भैया कौन हैं?

मदन भैया का वास्तविक नाम मदन सिंह कसाना है। UttarPradesh.org पर उपलब्ध विधायक प्रोफाइल के अनुसार उनका जन्म 11 सितंबर 1959 को हुआ। वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित गुर्जर नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय हैं। खतौली से पहले उनकी राजनीति मुख्य रूप से गाजियाबाद और पुराने खेकड़ा विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी रही।

उनका विस्तृत परिचय यहां पढ़ा जा सकता है—

मदन भैया का विधायक प्रोफाइल, जीवन परिचय और राजनीतिक सफर

मदन भैया का राजनीतिक सफर

UttarPradesh.org की प्रोफाइल रिपोर्ट के मुताबिक मदन भैया ने वर्ष 1989 में जेल में रहते हुए पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था। वह चुनाव नहीं जीत पाए, लेकिन दूसरे स्थान पर रहकर क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

वर्ष 1991 में उन्होंने जनता दल के टिकट पर चुनाव जीता और पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 1993 में वह दोबारा विधायक बने। वर्ष 2002 और 2007 में भी उन्होंने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की।

पुरानी खेकड़ा विधानसभा सीट के परिसीमन के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं। इसके बाद उन्होंने लोनी विधानसभा क्षेत्र से भी चुनाव लड़ा, लेकिन 2012, 2017 और 2022 में सफलता नहीं मिली।

दिसंबर 2022 के खतौली उपचुनाव ने उनके राजनीतिक सफर को नया मोड़ दिया। राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी गठबंधन ने उन्हें खतौली से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को हराकर पांचवीं बार विधानसभा में प्रवेश किया।

खतौली उपचुनाव 2022 में 22,143 मतों से जीत

खतौली विधानसभा सीट पर वर्ष 2022 में सामान्य चुनाव के बाद उपचुनाव हुआ था। तत्कालीन भाजपा विधायक विक्रम सैनी की सदस्यता समाप्त होने के कारण सीट खाली हुई थी।

उपचुनाव में रालोद-सपा गठबंधन ने मदन भैया को उम्मीदवार बनाया। भाजपा ने राजकुमारी सैनी को मैदान में उतारा। UttarPradesh.org के विधायक प्रोफाइल के अनुसार मदन भैया ने भाजपा प्रत्याशी को 22,143 मतों के अंतर से हराया और पांचवीं बार विधायक निर्वाचित हुए।

मदन भैया की विधानसभा जीत का क्रम

वर्षविधानसभा/क्षेत्रस्थिति
1991खेकड़ा क्षेत्रपहली बार विधायक
1993खेकड़ा क्षेत्रदूसरी बार जीत
2002खेकड़ा क्षेत्रतीसरी बार जीत
2007खेकड़ा क्षेत्रचौथी बार जीत
2022 उपचुनावखतौलीपांचवीं बार विधायक

उनकी 2022 की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि वह लंबे चुनावी अंतराल के बाद विधानसभा लौटे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुर्जर और ग्रामीण मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ को इस चुनाव परिणाम ने फिर सामने रखा।

खतौली विधानसभा की विकास जरूरतें

खतौली विधानसभा क्षेत्र में नगरीय और ग्रामीण दोनों तरह की आबादी शामिल है। ऐसे क्षेत्र में विधायक निधि से प्रस्तावित विकास कार्यों की प्रकृति विविध हो सकती है।

ग्रामीण संपर्क मार्ग

गांवों की गलियों, संपर्क मार्गों, इंटरलॉकिंग और सीसी रोड की मांग विधायक निधि के प्रस्तावों में प्रमुख रहती है। बरसात में कीचड़ और जलभराव से प्रभावित रास्तों पर छोटे निर्माण तत्काल राहत दे सकते हैं।

नाली और जल निकासी

खतौली नगर और आसपास के गांवों में जल निकासी एक महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दा है। छोटी नालियां, क्रॉस ड्रेन और पुलिया विधायक निधि के माध्यम से प्रस्तावित किए जा सकते हैं।

शिक्षा संबंधी कार्य

सरकारी विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष, चहारदीवारी, शौचालय, पेयजल, इंटरलॉकिंग और फर्नीचर जैसे कार्य विधायक निधि की पात्र श्रेणियों में शामिल हो सकते हैं।

सार्वजनिक पेयजल

सार्वजनिक हैंडपंप, सबमर्सिबल पंप और पेयजल सुविधाओं के छोटे निर्माण स्थानीय स्तर पर उपयोगी होते हैं।

सामुदायिक सुविधाएं

सामुदायिक भवन, यात्री शेड, सार्वजनिक बैठने के स्थान और अंत्येष्टि स्थलों से जुड़े स्थायी निर्माण भी स्थानीय मांगों में शामिल रहते हैं।

लेकिन चारों PDF में कामों के नाम नहीं दिए गए हैं। इसलिए यह दावा नहीं किया जा सकता कि मदन भैया के 365 स्वीकृत कार्यों में किस श्रेणी के कितने काम शामिल थे।

200 निरस्त प्रस्तावों पर जवाबदेही जरूरी

चार वर्षों में कुल 200 प्रस्ताव निरस्त होना इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। कुल 567 प्रस्तावों में लगभग 35.27 प्रतिशत को मंजूरी नहीं मिली।

इनमें 64 प्रस्ताव वर्ष 2024-25, 129 प्रस्ताव वर्ष 2025-26 और सात प्रस्ताव 2026-27 की रिपोर्ट में दर्ज हैं। 2023-24 में कोई प्रस्ताव निरस्त नहीं हुआ था।

वित्तीय वर्षनिरस्त कार्यकुल प्रस्तावों में हिस्सा
2023-2400%
2024-256447.06%
2025-2612945.10%
2026-27714.29%
कुल20035.27%

निरस्तीकरण की इतनी बड़ी संख्या के बाद यह जानना जरूरी है कि क्या ये कार्य तकनीकी कारणों से खारिज हुए, जमीन विवादित थी या प्रस्ताव योजना के नियमों से बाहर थे।

यदि अधिकतर प्रस्ताव दस्तावेजी या तकनीकी कमियों के कारण निरस्त हुए, तो विधायक कार्यालय और संबंधित विभाग के बीच प्रस्ताव भेजने से पहले जांच की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।

यदि कार्य किसी दूसरी योजना में पहले से स्वीकृत थे, तो दोहरे प्रस्ताव से बचने के लिए ग्राम पंचायत, नगर निकाय और जिला प्रशासन के रिकॉर्ड का पहले मिलान होना चाहिए।

जनता को कार्यवार विवरण क्यों मिलना चाहिए?

विधायक निधि की पारदर्शिता केवल कुल संख्याएं जारी करने से पूरी नहीं होती। प्रत्येक कार्य के साथ कम से कम निम्न विवरण सार्वजनिक होना चाहिए—

ऐसा डेटा उपलब्ध होने पर नागरिक अपने गांव या मोहल्ले में विधायक निधि के कामों की मौके पर जांच कर सकते हैं।

चार वर्षों की रिपोर्ट से क्या तस्वीर सामने आती है?

मदन भैया की चार साल की विधायक निधि कार्य रिपोर्ट मिश्रित तस्वीर पेश करती है।

वर्ष 2023-24 में 96 प्रस्ताव दिए गए और सभी स्वीकृत हुए। यह सबसे बेहतर स्वीकृति प्रदर्शन था।

वर्ष 2024-25 में प्रस्ताव बढ़कर 136 हुए, लेकिन केवल 71 मंजूर हुए और 64 निरस्त हो गए।

वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 286 प्रस्ताव आए। स्वीकृत कार्य बढ़कर 157 हुए, लेकिन 129 प्रस्ताव निरस्त भी हुए।

वर्ष 2026-27 की शुरुआती रिपोर्ट में 49 में से 41 प्रस्ताव स्वीकृत हैं। इस वर्ष स्वीकृति दर सुधरी है, लेकिन आंकड़े पूरे वित्तीय वर्ष के नहीं हैं।

चारों वर्षों में कुल 365 स्वीकृत कार्य एक बड़ी संख्या है। इसके बावजूद 200 प्रस्तावों का निरस्त होना बताता है कि प्रस्तावों की पात्रता, तकनीकी तैयारी और प्रशासनिक समन्वय में सुधार की गुंजाइश रही।

विधायक निधि का अंतिम मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितने प्रस्ताव दिए या स्वीकृत हुए। असली सवाल यह है कि 365 स्वीकृत कार्यों में कितने जमीन पर शुरू हुए, कितने पूरे हुए, उनकी गुणवत्ता कैसी रही और उन पर वास्तव में कितनी धनराशि खर्च हुई।

  • समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।

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