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वाराणसी2 घंटे पहले
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वाराणसी के भदवर स्थित हेरिटेज मेडिकल कॉलेज में इंजेक्शन लगाकर जान देने वाले यूरोलॉजिस्ट डॉ. गौतम शुभंकर (40 वर्ष) हॉस्पिटल के होनहार डॉक्टर में शुमार थे। उन्होंने हेरिटेज में पहली एड्रेनालेक्टॉमी सर्जरी की थी।
ज्वाइनिंग के बाद लगातार कई सर्जरी और कैंसर सिम्टोमैटिक मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर गौतम पर पारिवारिक कलह से परेशान थे। एक साल से डॉ. गौतम पिछले कुछ महीनों से पारिवारिक कारणों से पेशे में भी इसका असर दिखाई देने लगा था।
मरीजों को देखने से इनकार, ओपीडी और अस्पताल की ओटी सर्जरी के समय अचानक छोड़कर जाने से कई बार असहज स्थिति उत्पन्न हो गई थी। अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें चेतावनी दी, नोटिस भी दिया लेकिन हालात नहीं बदले। उनसे बातचीत कर काउंसलिंग कराने की कोशिश भी की गई लेकिन बात नहीं बनी।
हालांकि अब पारिवारिक विवाद में हारकर मौत को गले लगाने वाले डॉक्टर के जाने से उनके साथी दुखी हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पिता रविंद्र सिंह समेत परिजन शव लेकर बिहार रवाना हो गए।
पत्नी साथ रहने और बिहार आने का बनाती थी दबाव
अस्पताल में तैनात उनके सहकर्मियों ने बताया कि डॉ. गौतम पिछले कुछ समय से काफी परेशान रहते थे। बताया गया कि उनकी पत्नी उनके साथ रहना चाहती थीं लेकिन अस्पताल की दुश्वारियों के चलते वे साथ नहीं रह पा रही थीं। पिछले एक साल में दो-तीन बार कुछ दिनों के लिए आईं लेकिन फिर लौट गई।
पत्नी से विवाद के बीच डॉक्टर कई बार वह ओपीडी के बीच में ही बाहर या आवास में चले जाते थे। इससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता था और अस्पताल प्रबंधन को उनकी जगह दूसरे डॉक्टर की व्यवस्था करनी पड़ती थी। सहकर्मियों के मुताबिक करीब छह महीने में ऐसी करीब 10 घटनाएं हुईं।
ओपीडी छोड़कर चले जाने और काम के दौरान असहज रहने को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने उनसे कई बार बातचीत की। उन्हें समझाने के साथ चेतावनी भी दी गई। उनकी स्थिति को देखते हुए काउंसलिंग कराने की भी कोशिश की गई, लेकिन इसके बावजूद उनकी परेशानी कम नहीं हुई।
सहकर्मियों के मुताबिक सर्जरी के दौरान भी डॉ. गौतम कभी-कभी बेचैन हो जाते थे। इससे सर्जरी में देरी होती थी और ओपन सर्जरी में मरीज की जान का खतरा बढ़ जाता था। हालांकि चिकित्सकीय दक्षता के मामले में वह काफी अनुभवी और विशेषज्ञ माने जाते थे।
पढ़ाई में मेधावी, जटिल सर्जरी में बनाई पहचान
परिवार के अनुसार डॉ. गौतम पढ़ाई के समय से ही मेधावी थे। पढ़ाई में उनका काफी मन लगता था और चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ने को लेकर वह गंभीर रहते थे मेहनत और विशेषज्ञता के दम पर उन्होंने सफल यूरोलॉजिस्ट के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। जटिल यूरोलॉजिकल सर्जरी में भी उनकी अच्छी पकड़ थी।
हेरिटेज मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजी विभाग में रहते हुए उन्होंने कई जटिल सर्जरी कीं। अस्पताल में पहली लैप्रोस्कोपिक राइट एड्रेनलेक्टॉमी भी उनके नेतृत्व में सफलतापूर्वक की गई थी। मरीज में दाईं ओर करीब नौ सेंटीमीटर का एड्रेनल मायलोलिपोमा(कैंसर)था, जो इन्फीरियर वेना कावा (आईवीसी) और रीनल वेन से चिपका हुआ था। विस्तृत प्री-ऑपरेटिव जांच और सर्जिकल प्लानिंग के बाद लैप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन किया गया था, सर्जरी बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरी हुई और इसे ओपन सर्जरी में बदलने की जरूरत नहीं पड़ी थी
पत्नी आईं फिर पटना चली गई
पटना के कंकड़बाग निवासी डॉ. गौतम शुभंकर हेरिटेज मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजिस्ट थे। वह कॉलेज परिसर स्थित आवास की आठवीं मंजिल के कमरा नंबर 802 में रहते थे। करीब तीन माह पहले उनकी पत्नी पूजा भी पटना से उनके साथ रहने आई थीं। कुछ दिन रहने के बाद वह दोबारा पटना चली गई थीं।
पुलिस की शुरुआती जांच में पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव की बात सामने आई है। बताया गया कि डॉ. गौतम ने एनेस्थीसिया की ओवरडोज लेकर जान दी थी। मामले में उनके मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है, ताकि खुदकुशी से पहले की गतिविधियों और अन्य पहलुओं की जानकारी मिल सके।
साथी डॉक्टर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से व्यवहार में भारी बदलाव और गहरा मौन कामयाब करियर और सफेद एप्रन के पीछे अक्सर पुरुष कलह, अंतर्द्वंद्व और मानसिक प्रताड़ना को समाज के डर से भीतर ही दबाए रखते हैं। जब यह दबाव सीमा पार कर जाता है, तो परिणाम ऐसे दर्दनाक रूप में सामने आते हैं। एक डॉक्टर का यूं जान लेना केवल चिकित्सा जगत बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा सवाल खड़ाक करता है।
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