बाड़मेर में भाजपा को बहुमत, कई वार्डों में कमजोर प्रदर्शन: चार जगह जीत का अंतर 6 वोट से भी कम, पढ़ें चुनाव के रोचक नतीजे - Barmer News

Published on 15 सित॰ 2026

बाड़मेर नगर परिषद में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया, लेकिन 55 वार्डों के नतीजों में पार्टी के प्रदर्शन के कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। भाजपा एक वार्ड में पांचवें और तीन वार्डों में तीसरे नंबर पर रही, जबकि कांग्रेस एक वार्ड में चौथे और चार वार्ड

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वार्ड 21 में दो निर्दलीयों के बीच मुकाबला हुआ और भाजपा पांचवें नंबर पर रही। वहीं चार वार्डों में जीत का फैसला महज 3 से 6 वोट के अंतर से हुआ। वार्ड 28 में भाजपा सिर्फ 3 वोट से जीती, जबकि NOTA को 11 वोट मिले। चुनाव में पुराने चेहरों और परिवारों पर भरोसे का भी मिला-जुला असर रहा, 15 ऐसे मामलों में 9 जीते और 6 को हार मिली।

वार्ड संख्या 21 में दोनों निर्दलीय के बीच मुकाबला हुआ। बीजेपी के बांकाराम पांचवे ओर कांग्रेस के प्रेम प्रकाश चौथे नंबर पर रहे।

वार्ड संख्या 21 में दोनों निर्दलीय के बीच मुकाबला हुआ। बीजेपी के बांकाराम पांचवे ओर कांग्रेस के प्रेम प्रकाश चौथे नंबर पर रहे।

179 प्रत्याशी मैदान में, 81.57% वोटिंग

बाड़मेर नगर परिषद के 55 वार्डों में कुल 179 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। पहले चरण में हुई वोटिंग में नगर परिषद क्षेत्र में रिकॉर्ड 81.57% मतदान हुआ। भाजपा ने चुनाव में एकजुट होकर मैदान संभाला, जबकि कांग्रेस दो खेमों में बंटी नजर आई। चुनाव प्रचार में कांग्रेस के विधायक और सांसद भी नजर नहीं आए। कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की नाराजगी भी नतीजों पर भारी पड़ी।

भाजपा एक वार्ड में पांचवें और तीन में तीसरे नंबर पर

भाजपा का सबसे खराब प्रदर्शन वार्ड 21 में रहा, जहां पार्टी मुकाबले में भी नहीं रही और पांचवें नंबर पर पहुंच गई। यहां कांग्रेस चौथे नंबर पर रही। मुकाबला दो निर्दलीय पोकरसिंह और दलाराम के बीच हुआ, जिसमें पोकरसिंह जीते।

वार्ड 1 में त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा तीसरे नंबर पर रही। वार्ड 7 में कांग्रेस और निर्दलीयों के बीच मुकाबला हुआ। कांग्रेस ने 471 वोट लेकर जीत दर्ज की, जबकि दो निर्दलीयों को मिलाकर 648 वोट मिले। यहां भाजपा तीसरे नंबर पर रही। वार्ड 26 में भाजपा के बागी महेश सोनी और कांग्रेस के मुकेश जैन के बीच मुकाबला हुआ। यहां भी भाजपा तीसरे नंबर पर रही।

कांग्रेस एक वार्ड में चौथे और चार में तीसरे नंबर पर

कांग्रेस ने नगर परिषद में 21 सीटें जीती हैं, लेकिन कुछ वार्डों में उसका प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। वार्ड 5 में कांग्रेस चौथे नंबर पर रही, जबकि वार्ड 6 में तीसरे नंबर पर रही। दोनों वार्डों में भाजपा ने जीत दर्ज की।

वार्ड 37 में त्रिकोणीय मुकाबला हुआ, जिसमें कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। यहां निर्दलीय सुरेश सोनी ने भाजपा के दिग्गज मिरचुमल को हरा दिया। वार्ड 52 और 54 में भी कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। वार्ड 52 में भाजपा जीती, जबकि वार्ड 54 में निर्दलीय सायर कंवर ने भाजपा को हरा दिया। यह वार्ड पूर्व विधायक मेवाराम जैन का है, लेकिन यहां कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही।

चार वार्ड में 3 से 6 वोट से फैसला, NOTA ने भी बिगाड़ा गणित

बाड़मेर नगर परिषद के चार वार्डों में जीत का अंतर सिर्फ 3 से 6 वोट रहा। इनमें तीन वार्ड भाजपा और एक वार्ड कांग्रेस ने जीता। वार्ड 8 में भाजपा सिर्फ 5 वोट से जीती। यहां RLP को 11 और NOTA को 2 वोट मिले। वार्ड 10 में कांग्रेस 6 वोट से हारी और यहां NOTA को 10 वोट मिले। वार्ड 28 में भाजपा सिर्फ 3 वोट से जीती, जबकि NOTA को 11 वोट मिले। वार्ड 36 में कांग्रेस ने 6 वोट से जीत दर्ज की। यहां NOTA को 4 और निर्दलीय मनोज को 128 वोट मिले।

निर्दलीय सुरेश सोनी ने बीजेपी के दिग्गज मिरचुमल को हराया।

निर्दलीय सुरेश सोनी ने बीजेपी के दिग्गज मिरचुमल को हराया।

भाजपा ने मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया, 1265 वोट से हार

भाजपा ने 55 वार्डों में एक मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया था। मुस्लिम बाहुल्य वोटर वाले इस वार्ड में भी भाजपा प्रत्याशी को हार मिली और वह 1265 वोटों से चुनाव हार गए। इससे इस सीट का नतीजा भी चुनाव में चर्चा का विषय रहा।

पार्षद खुद या परिवार के सदस्य उतरे, 6 हारे और 9 जीते

कई मौजूदा पार्षदों ने खुद दोबारा चुनाव लड़ा या अपनी पत्नी, बेटी और परिवार के सदस्यों को मैदान में उतारा। ऐसे कुल 15 मामलों में 9 को जीत मिली, जबकि 6 को हार का सामना करना पड़ा।

वार्ड बदलकर लड़े सभापति समेत कई पुराने चेहरे हारे

नगर परिषद के सभापति दीपक माली ने वार्ड बदलकर कांग्रेस से वार्ड 19 में चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। वार्ड 16 की पार्षद रहीं उषा कुमारी की जगह उनके पिता किशोर भार्गव ने भाजपा से चुनाव लड़ा, लेकिन वे भी हार गए। वार्ड 17 की पार्षद रहीं भूरी देवी को कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं।

वार्ड 24 से दो बार पार्षद रहे बांकाराम चौधरी को भाजपा ने इस बार वार्ड 23 से मैदान में उतारा, लेकिन वे हार गए। वार्ड 43 से पार्षद रहे रूस्तम खान की जगह कांग्रेस ने उनकी पत्नी गुलशन बानू को वार्ड 41 से टिकट दिया, लेकिन उन्हें भी हार मिली। वार्ड 53 से पार्षद रहे अशोक दर्जी कांग्रेस के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।

पुराने चेहरों और परिवारों पर फिर जताया भरोसा, 9 जीते

नगर परिषद के उपसभापति सुरतानसिंह को कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय मैदान में उतरे और जीत गए। महावीर बोहरा ने अपनी पत्नी मधुलता को चुनाव मैदान में उतारा और वे जीत गईं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दमाराम माली ने वार्ड 19 से दोबारा जीत दर्ज की।

वार्ड 23 से निर्दलीय पार्षद रहे छगनलाल माली की जगह उनकी पत्नी विद्या को भाजपा ने मैदान में उतारा और वे जीत गईं। वार्ड 28 से पार्षद रहे सुनील सिंघवी को भाजपा ने इस बार वार्ड 27 से चुनाव लड़ाया और उन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज की।

वार्ड 31 से पार्षद रहीं पकंज सेठिया की जगह कांग्रेस ने उनके पति प्रवीण सेठिया को वार्ड 30 से टिकट दिया और वे जीत गए। वार्ड 35 से पार्षद रहे पृथ्वीराज चांडक की जगह भाजपा ने उनकी पत्नी अर्चना चांडक को वार्ड 34 से चुनाव लड़ाया और वे जीत गईं।

वार्ड 39 से पार्षद रहे प्रीतमदास को कांग्रेस ने इस बार वार्ड 38 से टिकट दिया और वे जीत गए। वार्ड 44 से पार्षद रहे नींबसिंह पर कांग्रेस ने दोबारा भरोसा जताया और इस बार वार्ड 43 से टिकट दिया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की।

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