जयपुर में JDA और जमीन से जुड़े मामलों में कार्रवाई नहीं होने से नाराज चार महिलाएं और दो पुरुष पानी की टंकी पर चढ़ गए। प्रताप नगर सेक्टर-9 में रविवार दोपहर करीब 1 बजे यह घटना हुई। रेशमा, काली, लक्ष्मी, कुसुम, किशन और दौलत टंकी पर चढ़े गए थे।
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प्रदर्शनकारियों ने कहा- हम सुबह से भूखे-प्यासे हैं। अपनी मांगों को लेकर टंकी पर बैठे हैं। सूचना के बाद पुलिस, SDRF और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची और टंकी के नीचे सुरक्षा जाल बिछाया गया।
वहीं पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। साथ ही मामले में कार्रवाई के लिए 10 दिन का समय मांगा है।

कार्रवाई नहीं होने से नाराज 4 महिलाएं और 2 पुरुष टंकी पर चढ़ गए थे।

सभी लोग रात तक टंकी पर चढ़े रहे।
पुलिस ने कार्रवाई के लिए 10 दिन का मांगा समय
मौके पर मौजूद हरिओम और चांदमल ने बताया- पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। साथ ही मामले में कार्रवाई के लिए 10 दिन का समय मांगा है। हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कार्रवाई की ठोस बात होने तक नीचे उतरने को तैयार नहीं हैं।
प्रदर्शन के दौरान पूर्व डिप्टी मेयर पूर्णित कर्णावट के विरोध में भी प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पानी की टंकी पर कर्णावट का पोस्टर लगा दिया। मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीम लगातार प्रदर्शनकारियों से समझाइश कर रही है। किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए टंकी के नीचे जाल लगाया गया है। आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
1998 में पट्टे लेने का दावा, जमीन पर स्टे के चलते नहीं लिया पजेशन
टंकी पर चढ़ी महिलाओं के साथ मौजूद दौलत, हरिओम ने बताया- मैंने साल 1998 में श्री जगदीश धाम योजना के नाम से पट्टे लिए थे। उनके अनुसार अचरोल गृह निर्माण सहकारी समिति लिमिटेड ने इसी नाम से कॉलोनी काटी थी। इस जमीन पर कॉलोनी डवलप की गई, उसे लेकर विवाद था। जमीन पर तालाब होने के कारण मामले में स्टे आ गया और हमने भूखंडों का पजेशन नहीं लिया।
2005 में केस के बाद आया स्टे, पुनीत कर्णावट पर रजिस्ट्री कराने का आरोप
दौलत हरिओम का आरोप है कि साल 2005 में केस करने के बाद जमीन पर स्टे आया था। इसके बावजूद साल 2005 में पुनीत कर्णावट ने इस जमीन की रजिस्ट्री करवा ली। उन्होंने बताया कि साल 2022 में जमीन से जुड़े मामले में फैसला आया। उनका आरोप है कि पुनीत कर्णावट ने जमीन पर JDA अप्रूव्ड दूसरी कॉलोनी काट दी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा- इसी जमीन पर हमारे पहले से भूखंड हैं।
पजेशन लेने पहुंचे तो रोकने का आरोप, धमकी देने की भी शिकायत
दौलत हरिओम ने बताया- दूसरी कॉलोनी काटे जाने की जानकारी मिलने पर हम लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन हमें अपने भूखंडों का पजेशन नहीं लेने दिया गया। उनका आरोप है कि अब पुलिस और कुछ लोग हमें धमका रहे हैं। उन्होंने कहा-पुनीत कर्णावट से भी कई बार मुलाकात कर मामले का समाधान कराने की कोशिश की गई, लेकिन वहां से भी हमें धमकी दी गई।
योजना में 206 भूखंडधारी, 13 को मिला पजेशन
प्रदर्शनकारियों के अनुसार- श्री जगदीश धाम योजना में कुल 206 भूखंडधारी हैं, जिनमें से 13 लोगों को पजेशन मिल चुका है। उनका कहना है कि पानी की टंकी पर चढ़ी महिलाओं के भी इस योजना में भूखंड हैं और वे लंबे समय से यहां रह रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हम अपने भूखंडों पर अधिकार और पजेशन की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों की चार प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने श्री जगदीश धाम योजना की जमीन को लेकर चार प्रमुख मांगें रखी हैं। उनकी मांग है कि पुनीत कर्णावट और गोविंद अग्रवाल को योजना की जमीन पर किसी भी तरह का काम करने से रोका जाए।
- योजना के निदेशक देशराज बैरवा और गौरी शंकर गुप्ता भूखंडधारकों को तत्काल कब्जा दिलाएं।
- भूखंडों पर निर्माण कार्य में किसी तरह की बाधा नहीं डाली जाए और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
- निर्माण कार्य के दौरान पुलिस या आरोपी पक्ष के लोगों की ओर से किसी तरह की दबंगई नहीं की जाए।
- भूखंडधारकों के अधिकार और कब्जेसंबंधित मामले में उचित कार्रवाई की जाए।
कर्णावट बोले- फर्जी पट्टों के जरिए ब्लैकमेल करने का आरोप, 2025 में दर्ज हुई FIR
पुनीत कर्णावट ने आरोप लगाया कि पानी की टंकी पर चढ़े लोगों को कुछ लोग फर्जी पट्टों के जरिए ब्लैकमेल कर धन ऐंठने के लिए उकसा रहे हैं। उन्होंने बताया- इस मामले में 12 जून 2025 को प्रताप नगर थाने में FIR कराई गई थी। पुलिस जांच के दौरान आरोपियों को दस्तावेज पेश करने के लिए नोटिस दिए गए थे।
कर्णावट ने दावा किया कि दस्तावेज फर्जी होने के कारण पुलिस पर दबाव बनाने के लिए टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन किया गया। उन्होंने कहा कि विवादित जमीन प्राइम बिल्ड होम प्राइवेट लिमिटेड ने साल 2005 में रजिस्ट्री के जरिए खरीदी थी और भुगतान चेक से किया था।
कर्णावट ने कहा- अचरोल गृह निर्माण सहकारी समिति ने कभी 'जगदीश धाम' नाम से कोई योजना नहीं बनाई। इसका उल्लेख JDA के रिकॉर्ड और सहकारी समिति की सरकारी ऑडिट रिपोर्ट में भी होने का दावा है। उनके अनुसार साल 1976 से 2005 तक समिति ने जयपुर में कोई जमीन नहीं खरीदी। वहीं उसकी आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि वह विवादित जमीन खरीद सके।
उन्होंने बताया कि 'जगदीश धाम योजना' के फर्जी पट्टों को लेकर 2022 की FIR पर पहले से जांच चल रही है। कर्णावट ने दावा किया कि जांच में देशराज बैरवा के बयानों में भी सामने आया है कि उसने खातेदारों से समिति के पक्ष में कोई एग्रीमेंट नहीं किया और न ही 'जगदीश धाम योजना' के पट्टे जारी किए थे।
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