विनोबा भावे विश्व विद्यालय ही नहीं, इनसे जुड़े महाविद्यालय भी गबन करने में पीछे नहीं हैं। मामला हजारीबाग स्थित केबी महिला महाविद्यालय के स्व-वित्तपोषित विभाग से जुड़ा है। विभाग में तैनात कर्मचारी ने छात्राओं से फीस तो जमा कराई। पूरी फीस महाविद्यालय क
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तत्कालीन कुलपति ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर मामले की जांच कराई। कमेटी ने इसमें कर्मचारी को दोषी माना। उसकी बर्खास्तगी की संस्तुति की। इसके साथ ही विभाग की इंचार्ज और एक अन्य शिक्षक की संलिप्तता होने का शक जाहिर किया। दोनों को प्रशासनिक और वित्तीय प्रभार न देने की संस्तुति भी की। कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने के बजाय शिक्षक को उसी महाविद्यालय का कार्यवाहक प्राचार्य बना दिया गया। केबी महिला महाविद्यालय के स्व-वित्तपोषित विभाग (सीएनडी) में वर्ष 2020-21 में छात्राओं से 2122100 फीस जमा कराई गई। महाविद्यालय के खाते में जमा केवल 1659535 कराई गई। दो साल बाद, वर्ष 2023 में इसकी शिकायत छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन और तत्कालीन कुलपति से की। मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन कुलपति ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। इसमें विश्वविद्यालय के डा. राको हरि प्रसाद, डॉ. प्रनीता, और फाइनेंस पदाधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार कुशवाह को शामिल किया। तीनों ने जांच की। शिकायत सही मिली। वर्ष 2020-21 में 462565 रुपए बैंक खाते में कम जमा किए गए। बताया गया कि विभाग में संविदा पर तैनात तृतीय श्रेणी कर्मचारी सुरेश प्रसाद बैंक में रुपए जमा कराने का काम देखते हैं। इस विभाग की प्रभारी डॉ. नंदा हैं। इसके साथ ही डा. मुकुल कुमार वर्सर-2 की भूमिका में हैं। जांच कमेटी को डा. नंदा वर्मा ने बताया कि कोविड के दौरान छात्राओं ने पूरी राशि जमा नहीं की। इस पर जांच कमेटी ने वर्ष 2021-22 और 2022-23 के भी रिकॉर्ड खंगाले। यहां भी गड़बड़ी मिली। ^केबी महिला महाविद्यालय में फीस घोटाले मामले की शिकायत मिली है। क्या मामला है, इसे देखा जा रहा है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। -प्रोफेसर चंद्र भूषण शर्मा, कुलपति, विनोबा भावे विश्व विद्यालय कब- कब हुए जमा : वर्ष 2021-22 में 3593950 रुपये छात्रों से फीस के रूप में जमा किए गए। महाविद्यालय के खाते में 3459595 रुपए ही जमा किए गए। यानी 134555 रुपये कम जमा कराए गए। वहीं, वर्ष 2022-23 में 4233800 रुपए फीस के रूप में लिए गए। बैंक खाते में 4143850 रुपए ही जमा किए गए। यानी 89950 रुपये बैंक खाते में कम जमा कराए गए। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि कर्मचारी सुरेश प्रसाद ने 686870 रुपये का गबन किया है।
कर्मचारी को तत्काल बर्खास्त किया जाए जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि तृतीय वर्गीय कर्मचारी सुरेश प्रसाद ने 686870 रुपए का गबन किया है। वहीं डा. नंदा वर्मा और मुकुल कुमार की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। कर्मचारी को तत्काल बर्खास्त किया जाए। उनसे गबन की राशि वसूली जाए। तय समय पर राशि नहीं देते हैं तो कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जाए। वहीं जांच कमेटी ने डा. नंदा वर्मा और डा. मुकुल कुमार के लिए लिखा कि इनकी संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए दोनों को प्रशासनिक और वित्तीय प्रभार नहीं दिया जाए। अगर वर्तमान में है तो उसे हटा लिया जाए।
^केबी महिला महाविद्यालय में फीस घोटाले की जांच में हम भी शामिल थे। जांच में कर्मचारी को दोषी पाया गया था। दो शिक्षकों पर संलिप्तता से इनकार नहीं किया गया था। मामले में क्यों कार्रवाई नहीं हुई, इसकी जांच करेंगे। महाविद्यालय को नोटिस भी भेजेंगे। -सुरेंद्र कुमार कुशवाह, कुल सचिव, विनोबा भावे विश्व विद्यालय
डॉ. मुकुल को बनाया प्रभारी प्राचार्य कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, पिछले साल डॉ. मुकुल कुमार को केबी महिला महाविद्यालय का प्रभारी प्राचार्य बना दिया गया। जब कमेटी की जांच रिपोर्ट की जानकारी ली गई तो बताया गया कि वीसी लगातार बदलने के कारण रिपोर्ट वीसी तक पहुंची ही नहीं थी। वर्ष 2025 में जब वर्तमान वीसी, यानी कुलपति प्रोफेसर चंद्र भूषण शर्मा ने ज्वाइन किया, उसके बाद रिपोर्ट वीसी को सौंपी गई।
^मामले की जांच जरूर हुई थी। कहीं कोई गबन नहीं हुआ। जो भी आरोप हैं, निराधार हैं। वह एक साल पहले ही महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य बने हैं। -डॉ. मुकुल कुमार , कार्यवाहक प्राचार्य, केबी महिला महाविद्यालय