चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट) में हुए करोड़ों रुपए के कथित घोटालों के मामलों में CBI को बड़ी कामयाबी मिली है। दोनों मामलों में कुल छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल ग
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CBI ने अभियोजन मंजूरी से संबंधित आदेश सीबीआई कोर्ट में पेश कर दिए हैं। अब इन आरोपियों के खिलाफ चल रहे मामलों में अभियोजन पक्ष की कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के IDFC बैंक में जमा करीब 116 करोड़ रुपए के फंड में कथित हेराफेरी के मामले में पूर्व CFO नलिनी मलिक के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई है।
यह मंजूरी स्मार्ट सिटी की ओर से CBI को दी गई है। इसके बाद नलिनी मलिक के खिलाफ चल रहे मामले में अभियोजन की कार्रवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
3 बैंक अधिकारियों पर भी चलेगा केस
इसी मामले में तीन बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई है। इनमें रिभव ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमान शामिल हैं। यानी स्मार्ट सिटी की पूर्व CFO नलिनी मलिक समेत इस मामले में कुल चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मिल चुकी है। मामले की सुनवाई CBI कोर्ट में चल रही है। अब अभियोजन मंजूरी के आदेश कोर्ट रिकॉर्ड का हिस्सा बन गए हैं।
दूसरी ओर, चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी यानी क्रेस्ट में करीब 83 करोड़ रुपए के कथित घोटाले के मामले में भी CBI को दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई है।
इनमें प्रियंका भटोआ और अनुज कौशल शामिल हैं। दोनों के खिलाफ मामले में अभियोजन मंजूरी मिलने के बाद CBI की कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी।
सीबीआई के सरकारी वकील ने कोर्ट में पेश किए आदेश
CBI के सरकारी वकील नरेंद्र सिंह ने दोनों मामलों से संबंधित अभियोजन मंजूरी के आदेश CBI कोर्ट में पेश किए हैं। अब कोर्ट में इन मामलों की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष इन मंजूरियों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। इस तरह स्मार्ट सिटी के 116 करोड़ रुपए के फंड में कथित हेराफेरी और क्रेस्ट के 83 करोड़ रुपए के मामले में कुल छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल चुकी है।

नगर निगम चंडीगढ़।
जानिए क्या है पूरा स्कैम
- प्रोजेक्ट के पैसे शेल कंपनियों से निवेश किएः जांच के अनुसार, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद बैंक खाते में जमा रकम नगर निगम के खाते में ट्रांसफर होनी थी। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने रकम निकालकर शेल कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट में निवेश कर दिया।
- नगर निगम को लगाई चपतः जहां नगर निगम के खाते में करोड़ों रुपए आने थे, वहां केवल 81.20 रुपए ही ट्रांसफर हुए। बाकी रकम कथित तौर पर आरोपियों ने आपस में बांट ली।
- नलिनी मलिक ने फर्जी एफडी तैयार कीः सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि नलिनी मलिक समेत अन्य अधिकारियों और बैंक कर्मियों ने मिलकर 11 फर्जी एफडी तैयार की थीं, ताकि किसी को गड़बड़ी का शक न हो। बाद में इन्हीं एफडी के जरिए रकम को अलग-अलग कंपनियों में निवेश किया गया।