मतदाता सूची विवाद: ज्ञानेश के इस्तीफे की मांग और 6 सवाल

Published on 3 अक्टू॰ 2026

बिहार और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले ही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का विरोध शुरू हो चुका था. बिहार चुनाव 2025 में कांग्रेस और बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रक्रिया का सबसे मुखर विरोध किया. हालांकि, बाद में बंगाल के आंदोलन में कांग्रेस और वामदल भी कूदे, लेकिन तीनों दलों ने इस मुद्दे पर एक साथ कभी कोई बड़ा आंदोलन नहीं किया. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में ही गड़बड़ी है, तो सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ही इस्तीफे की मांग क्यों? सवालों के दायरे में ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग है, तो राजनीतिक पार्टियां और प्रदर्शन करने वाले लोगों से भी सवाल जरूर पूछे जायेंगे.

सबसे बड़ी मांग- ज्ञानेश का इस्तीफा, सीईसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई

विवाद की शुरुआत हालांकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से ही शुरू हो गयी थी, लेकिन इसमें तेजी आयी बिहार और बंगाल चुनाव के बाद. बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद से तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, वामदल समेत उनके तमाम सहयोगी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के खिलाफ हमलावर हैं. इनकी सबसे बड़ी मांग है- ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई. राजनीतिक दलों का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर की प्रक्रिया में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मदद की. जबरन विपक्षी दलों के मतददाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिये गये, जिसका फायदा बिहार और बंगाल के चुनावों में भाजपा को मिला. दोनों राज्यों में भाजपा बड़े अंतर से जीती और सत्ता में आयी.

मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी के प्रदर्शन में उमड़ी भीड़. फोटो : एएनआई
मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी के प्रदर्शन में उमड़ी भीड़. फोटो : एएनआई

इलेक्शन कमीशन के पक्ष में भाजपा, सिर्फ फर्जी वोटर लिस्ट से हटाये गये

हालांकि, भाजपा का कहना है कि चुनाव आयोग और भाजपा दोनों का कहना है कि इलेक्शन कमीशन ने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया है. एसआईआर के दौरान वैसे लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाये गये हैं, जो या तो मर चुके हैं या किसी अन्य राज्य में रह रहे हैं और वहां के वोटर बन चुके हैं. भाजपा का तर्क है कि बंगाल में बड़े पैमाने पर अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिये फर्जी कागजात तैयार करके वोटर बन गये थे. ऐसे लोगों के नाम ही वोटर लिस्ट से हटाये गये हैं.

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई और दिल्ली में हुआ जोरदार प्रदर्शन.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई और दिल्ली में हुआ जोरदार प्रदर्शन.

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सीजेपी और लेफ्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ फूंका विरोध का बिगुल

इस बीच, एक नये राजनीतिक दल कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंका है. मुंबई में जोरदार प्रदर्शन करने के बाद पार्टी के चीफ अभिजीत दीपके ने ऐलान किया है कि अगर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर को नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर वैसा ही आंदोलन होगा, जैसा नीट-यूजीसी की परीक्षा में गड़बड़ी के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर हुआ था. जब मुंबई में सीजेपी का प्रदर्शन चल रहा था, उससे पहले दिल्ली में लेफ्ट के स्टूडेंट विंग आइसा और अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) ने देश की राजधानी में प्रदर्शन किया. यहां से 700 से अधिक लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया.

नयी दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन करते आइसा के कार्यकर्ता. फोटो : एएनआई
नयी दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन करते आइसा के कार्यकर्ता. फोटो : एएनआई

सीजेपी के आक्रामक अंदाज में आंदोलन और उसकी मांगों के आधार पर 6 ऐसे सवाल सामने हैं, जिनका जवाब सामने आना चाहिए. इनमें अधिकतर सवालों के जवाब इलेक्शन कमीशन को ही देने हैं. ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो या न हो, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो या नहीं, लेकिन इतना तय है कि जब तक आयोग से जुड़े सवालों का जवाब नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन का सिलसिला थमने वाला नहीं है. आयोग के साथ-साथ राजनीतिक दलों और सीजेपी को भी कुछ सवालों के जवाब देने होंगे. सभी 6 सवालों की लिस्ट यहां पढ़ें.

  1. SIR पर इतना विवाद क्यों? क्या चुनाव आयोग के पास वोटर लिस्ट से हटाये गये एक-एक नाम का विवरण है?
  2. मतदाता सूची में गड़बड़ी का सवाल उठा है तो जिम्मेदारी किसकी- चुनाव आयोग (ECI) की, राज्य मशीनरी की या सिस्टम की?
  3. ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगने की नौबत क्यों आयी? क्या आयोग की सफाई आंदोलन को रोकने के लिए काफी है?
  4. अगर SIR पूरी तरह पारदर्शी है, तो उसके हर चरण का डेटा सार्वजनिक करने में क्या दिक्कत है?
  5. CJP के सवालों का जवाब राजनीतिक मंच से मिलेगा या चुनाव आयोग दस्तावेजों के साथ जवाब देगा?
  6. अगर SIR में गड़बड़ी हुई है, तो दोषी सिर्फ ज्ञानेश कुमार ही क्यों? बाकी के 2 चुनाव आयुक्तों के खिलाफ कार्रवाई की मांग क्यों नहीं?